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Successful Startups

Take Inspiration from some of the most successful Startups. Understand the key factors contributing to their success.

Name of the Company About the Company - कंपनी के बारे में What Made it So Successful? कंपनी की सफलता का कारण How did it Start? शुरुवात Website Link - लिंक Media Coverage
क्राफ्ट्स फूड्स

कंपनी का राजस्व 40,386 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इसके कर्मचारियों की संख्या 97,000 से अधिक है। कंपनी 11 उत्पाद वर्गों में वैश्विक रूप से सर्वोच्च स्थान पर है। ये वर्ग हैं- कॉफी, कुकीज, क्रैकर्स, क्रीम क्रैकर्स, चीज, डेजर्ट मिक्सेज, ड्राई पैकेज्ड डिनर, लंच कॉम्बिनेशन्स, पाउडर्ड सॉफ्ट ड्रिंक, प्रोसेस्ड चीज, सलाद ड्रेसिंग और स्नैक नट्स। ये उत्पाद दुनिया भर के 220 से अधिक कारखानों में तैयार होते हैं और 140 से अधिक देशों में बेचे जाते हैं।

क्राफ्ट्स की सफलता का मुख्य कारण है इसका नवोन्मेषिता से जुड़ाव। संस्था की शुरुआत ही नवोन्मेष से हुई। जब इस संगठन ने शुरुआत की, उस समय रेफ्रिजरेशन नहीं होता था और बड़े ठेलों से बेचा जानेवाला चीज जल्दी खराब हो जाता था। क्राफ्ट ने एक नवोन्मेषी,मिश्रित और पास्चुरीकृत चीज़ विकसित करने का फैसला किया, जो खराब न हो। उसने इसे पेटेन्ट कराया और तभी से यह संगठन सफल हो गया और एक ब्रान्ड नाम बन गया। इसने एक और नवोन्मेषी उत्पाद आरंभ किया- कतरा हुआ प्रोसेस्ड चीज, जिसने बाजार पर इसकी पकड़ को मजबूत कर दिया। कंपनी ने स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता की बढ़ती प्रवृत्ति को भी जल्दी समझ लिया और लाइट बोलोना तथा टर्की बैकन जैसे उत्पाद उतारे, जिससे उसके माँस उत्पादों की बिक्री बढ़ी। उसने चीज की कम वसा वाले तथा वसा-रहित किस्में भी बाजार में उतारीं। कई अभिग्रहणों के ज़रिए इसने अन्य बाजारों में भी अपनी पकड़ बढ़ाई है।

जेम्स एल. क्राफ्ट ने 1903 में दरवाजे-दरवाजे चाकर चीज का थोक व्यापार शुरू किया, जो अच्छा नहीं चला। सच कहें तो उसमें 3000 अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ।

पेप्सिको

पेप्सिको सुविधाजनक अल्पाहार, खाद्य एवं पेय पदार्थों में दुनिया में अग्रणी है। इसकी राजस्व आय 60 अरब डॉलर और कर्मचारियों की संख्या 285,000 से अधिक है।

पेप्सिको को अपने बाजार में उभरते हुए घटकों की सुस्पष्ट समझ थी। पेप्सी ने प्रतिस्पर्धी उत्पादों के मौजूदा उपयोगकर्ताओं की ब्रान्ड वफादारी का ध्यान से विश्लेषण करने के बाद युवा पीढ़ी पर अपने विपणन प्रयासों को केन्द्रित करने का फैसला किया। पेप्सिको ब्रान्डों- ऐक्वाफिना और गैटोरेड का अपने-अपने वर्गों में 50% से अधिक बाजार हिस्सा है। अल्पाहार घटक में भी इसने एक बड़ा पोर्टफोलियो तैयार कर लिया है।

सॉफ्ट ड्रिंक की रेसिपी 1890 में कैलब ब्रैडहैम ने तैयार की और उस पेय का नाम रखा- "पेप्सी-कोला"। जब यह पेयर लोकप्रिय होने लगा तो 1902 में पेप्सी-कोला कंपनी शुरू की गई।

एशियन पेंट्स

एशियन पेंट्स भारत की सबसे बड़ी पेंट कंपनी और एशिया की तीसरी सबसे बड़ी पेंट कंपनी है। इसका टर्नओवर 77.06 अरब रुपये है। प्रोफेशनलिज्म, त्वरित विकास और शेयरहोल्डिंग के निर्माण के लिए कॉर्पोरेट जगत में इस समूह की प्रतिष्ठा स्पृहणीय है। एशियन पेंट्स का कारोबार 17 देशों में है और दुनिया भर में इसके 24 पेंट बनाने के कारखाने हैं, जो 65 देशों के उपभोक्ताओं की सेवा कर रहे हैं। एशियन पेंट्स के अलावा यह समूह दुनिया भर अपनी सहायक कंपनियों बर्जर इन्टरनेशनल लिमिटेड, ऐपको कोटिंग्स, एससीआईबी पेंट्स और टॉबमैन्स के माध्यम से भी कार्यरत है।

कंपनी के उल्लेखनीय नवोन्मेषण में शामिल हैः अपना रंग खुद बनाओ, होम सॉल्यूशन्स (प्रदान किए गए पेंटिंग के कार्य एशियन पेंट्स के विनिर्देशों के अनुसार होते हैं जो उच्च विश्वसनीयता वाले तथा बढ़िया गुणवत्ता वाले होते हैं)। उन्होंने इस प्रक्रिया को ब्रान्ड किया है।

 केन्द्रीय विचार:

इसने भारत के पेंट उद्योग में कई नवोन्मेषी संकल्पनाएं भी आरंभ कीं, जिनमें से कुछ हैं- कलर वर्ल्ड (डीलर टिंटिंग प्रणालियाँ), होम सॉल्यूशन्स (पेंटिंग समाधान सेवा), किड्स वर्ल्ड (बच्चों के कमरे के लिए पेंटिंग समाधान), कलर नेक्स्ट (गहन अनुसंधान के माध्यम से रंग संबंधी रुझानों का अनुमान) और रोयाल प्ले स्पेशल इफेक्ट पेन्ट्स।

कंपनी ने 1942 में आरंभ होने से लेकर अब तक एक लंबी यात्रा की है। चार मित्रों ने इसे एक भागीदारी फर्म के रूप में आरंभ किया। वे उस समय भारत में काम कर रही दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे मशहूर पेंट कंपनियों को चुनौती देना चाहते थे। पिछले 25 वर्ष के अंतराल में एशियन पेन्ट्स कॉर्पोरेट जगत की एक बड़ी ताकत और भारत की अग्रणी पेंट कंपनी बनके उभरा है। मजबूत उपभोक्ता-केन्द्रिकता और नवोन्मेषिता की भावना से परिचालित यह कंपनी 1968 से बाजार में अग्रणी स्थान बनाए हुए है। आज यह भारत की किसी भी पेंट कंपनी से दुगने आकार की है। एशियन पेंट सजावटी और औद्योगिक इस्तेमाल में आनेवाले पेंटों की व्यापक श्रेणी तैयार करता है।

टेस्को

टेस्को ग्लोबल ग्रॉसरी और जनरल मर्केन्डाइज रिटेलर है जो वित्तीय सेवाएं भी प्रदान करती है। इसने 2011 में 60.93 अरब डॉलर राजस्व एकत्र किया। इसके कर्मचारियों की संख्या 472,000 है।

इसकी सफलता सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से इसके इंटीग्रेशन में निहित है। संगठन का हर क्षेत्र सूचना प्रौद्योगिकी से सक्षम रूप से जुड़ा हुआ है। इसने अपने सप्लायरों का प्रबंधन भी बहुत अच्छी तरह किया है। इसके ज्यादातर सप्लायर विदेश में हैं क्योंकि उससे इसे लाभ का मार्जिन अधिक मिलता है। विभिन्न कार्यक्रमों के ज़रिए यह अपने दूसरे फ्रेन्चाइजी को भी सफल बनाने में कामयाब रहा है। यूके के बाजार में यह पूरी तरह अग्रणी है और इस कारण इसका ब्रान्ड ऐसा बन गया है जो खुद बिकता है।

जैक कोहेन ने 1919 में टेस्को की स्थापना की। उस समय उन्होंने लंदन के पूर्वी सिरे पर स्थित वेल स्ट्रीट मार्केट, हैकने के एक स्टॉल से सरप्लस ग्रॉसरी बेचना शुरू किया। टेस्को ब्रान्ड पहली बार 1924 में रोशनी में आया।

नोकिया

नोकिया समूह के दुनिया भर में लगभग 139,000 कर्मचारी हैं और इसकी ब्रान्ड कीमत 25 अरब डॉलर से अधिक है।

नोकिया बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागतें कम रखने का निरन्तर प्रयास करते रहने के कारण बाजार में अग्रणी स्थान बनाए हुए है। इस कारण यह उस दाम में फोन बनाने में सफल रहा है जिस पर कोई और संगठन नहीं बना सकता। भारत, चीन जैसे देशों में इसका एकाधिकार है। यहाँ यह बड़े स्तर पर मौजूदगी बनाने के कारण यह वैश्विक लाभ कमाने में भी सफल रहा है। यह सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी इस्तेमाल करता है, जिससे अच्छी गुणवत्ता मिलती है। नोकिया मोबाइल का हार्डवेयर भी अधिक टिकाऊ पाया गया है, जिससे उसकी मरम्मत की जरूरत कम पड़ती है। मोबाइलों की बैटरी ज्यादा चलती हैं, और उनको जल्दी-जल्दी चार्ज नहीं करना पड़ता।

1865 में फ्रेडरिक आइडेस्टाम नाम के एक खनन इंजिनियर ने दक्षिण-पश्चिम फिनलैंड के टैम्मरकोस्की प्रपात पर लकड़ी की लुगदी बनाने का अपना पहला कारखाना लगाया। कुछ वर्षों बाद उन्होंने नोकियांवीरटा नदी के किराने दूसरा कारखाना लगाया। इससे उन्हें 1871 में अपनी कंपनी का नाम नोकिया ऐब रखने की प्रेरणा मिली। इसके बाद उनको लगा कि बिजली के कारोबार में उन्हें अपना व्यवसाय आगे बढ़ाना चाहिए।

गूगल

2010 में राजस्व 21,796 मिलियन डॉलर। वे पूरी दुनिया के बाजार में सेवारत हैं। अनुमान है कि गूगल हर रोज एक अरब से अधिक सर्च पर कार्रवाई करता है। पूरी दुनिया में इसके एक मिलियन से अधिक डाटा सेंटर फैले हुए हैं।

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सरलता ने उनको लोकप्रिय बनाया है। उनके परिणामों की रफ्तार और सटीकता ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। इसने दुनिया की लगभग हर वेबसाइट को अपनी सूची में डाला है। इसे मारक उत्पादों की सहूलियत प्राप्त है, जैसे गूगल डॉक्युमेन्ट्स, पिकासा, मैप्स, यू ट्यूब, कैलेन्डर, बुक्स, अर्थ, ब्लॉगर और जी मेल।

गूगज अनौपचारिक कॉर्पोरेट संस्कृति के लिए जाना जाता है। फॉर्च्यून पत्रिका ने इसे काम करने के लिए सबसे अच्छी कंपनियों में से एक के रूप में चुना है। इन्होंने बहुत से जन-हितकारी उपक्रम भी आरंभ किए हैं.

इसे 1996 में लैरी पेज और सेगी ब्रिन ने एक अनुसंधान परियोजना के रूप में तब शुरू किया, जब वे स्टैनफोर्ड युनिवर्सिटी में पीएचडी के छात्र थे।

इन्फोसिस

2011 में राजस्व 6,041 मिलियन डॉलर। इन्फोसिस पूरी दुनिया में फैला हुआ है। अमेरिका, भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, मध्य-पूर्व एशिया, यूके, जर्मनी, फ्रान्स, स्विटजरलैन्ड, नीदरलैन्ड्स, पोलैन्ड, कनाडा और दूसरे बहुत से देशों में इसके 64 कार्यालय तथा 65 डेवलपमेंट सेन्टर विद्यमान हैं। 30 सितंबर 2011 को इन्फोसिस और इसकी सहायक संस्थाओं के कर्मचारियों की संख्या 141,822 थी।

वे अपने ग्राहकों की आवश्यकता पर आधारित समाधान के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं। उन्होंने अपने ग्राहकों की जरूरत को समझा और कम लागत पर अच्छी गुणवत्ता वाले संसाधन प्रदान किए।

केन्द्रीय विचार:

इन्फोसिस ने ग्लोबल डिलीवरी मॉडल (जीडीएम) की शुरुआत की, जो उद्योग में एक विघटनकारी ताकत के रूप में उभरा और जिससे ऑफशोर आउटसोर्सिंग में तेजी आई। जीडीएम इस सिद्धान्त पर आधारित है कि काम को उस जगह लेकर जाओ जहाँ सबसे अच्छी प्रतिभा उपलब्ध है, जहाँ वह आर्थिक रूप से सबसे बुद्धिमत्तापूर्ण हो और जहाँ स्वीकार्य जोखिम की मात्रा सबसे कम हो।

इसकी शुरुआत 1981 में 7 उद्यमियों के एक समूह ने की, जो इस प्रकार हैं- एन.आर. नारायण मूर्ति, नन्दन नीलेकणि, कृस गोपालकृष्णन, एस.डी. शिबुलाल, के. दिनेश, अशोक अरोड़ा और एन.एस. राघवन। उन्होंने 10,000 रुपये की शुरुआती पूँजी से इसे आरंभ किया।

एजेन्सी फैक्स (अफैक्स)

वर्तमान में इसका प्रधान कार्यालय नोएडा, भारत में है। हाल ही में एबीसी इलेक्ट्रॉनिक्स ने इसे चयनित क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी वेबसाइट के रूप में प्रमाणित किया। इस वेबसाइट का ट्रैफिक एक महीने में 2.67 मिलियन पेज रिकॉर्ड किया गया, जिसने विश्व के पिछले अग्रणी अमेरिकी वेबसाइट ऐडेज डॉट कॉम तथा यूके की वेबसाइट ब्रान्डरिपब्लिक डॉट कॉम को पीछे छोड़ दिया।

यह एक ऑनलाइन पोर्टल है जो भारत में मार्केटिंग, विज्ञापन तथा मीडिया प्रोफेशनल्स के लिए सूचनाएँ व खबरे प्रकाशित करने के लिए जाना जाता है। इन क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स के लिए यह सूचना का विश्वसनीय स्रोत है। उन्होंने बाजार की इस जरूरत को पहचाना और अंतराल को पूरा किया।

केन्द्रीय विचार:

उनका लक्ष्य सरल था- विज्ञापन, मीडिया और मार्केटिंग की सूचना संबंधी जरूरतों को पूरा करते हुए उनसे जुड़े प्रोफेशनल्स के जीवन को आसान बनाना। देश के सभी मीडिया व विज्ञापन गृहों के डाटाबेस को नियमित रूप से अद्यतन बनाए रखने के अलावा, अफैक्स इन एजेंसियों से सूचना का आदान-प्रदान भी करता रहता है।

1999 में श्रीकान्त खान्डेकर ने तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर नई दिल्ली में एक गैराज में इसकी स्थापना की थी।

हंगामा.कोम

अब हंगामा बॉलीवुड और दक्षिण-एशियाई मनोरंजन जगत का सबसे बड़ा ऐग्रीगेटर, डेवलपर, पब्लिशर और डिस्ट्रीब्यूटर है।  हंगामा मोबाईल भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया में भी मोबाइल मनोरंजन तथा मूल्यवर्धित सेवाओं (वीएएस) के मामले में सबसे आगे है।

भारत में समस्त मोबाइल मनोरंजन सामग्री का लगभग 75% (सर्कल आधारित) यही चलाते हैं। हंगामा डिटिडल भारत की नंबर 1 डिजिटल विज्ञापन एजेन्सी है। कंपनी ने 350 से अधिक ब्रान्डों के लिए नवोन्मेषी मार्केटिंग समाधान प्रस्तुत किए हैं, जिनमें कोका कोला, नोकिया, मास्टर कार्ड, आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्स, नाइकी. बकार्डी तथा कैडबरीज शामिल हैं। हंगामा गेम स्टूडियो की स्थापना का श्रेय भी हंगामा को जाता है, जो भारत का पहला गेमिंग स्टूडियो है। यह कई तरह की डिजिटल स्क्रीनों जैसे मोबाइल, पीसी और टेलीविजन के लिए गेमिंग सामग्री बनाता है। हंगामा ने हंगामा डॉट कॉम नाम का भारत का प्रीमियम क्रॉस प्लैटफॉर्म डिजिटल स्टोर भी शुरू किया है, जो बॉलीवुड, इन्स्ट्रुमेंटल, गजल, भक्ति, भारतीय क्षेत्रीय संगीत, अंतरराष्ट्रीय संगीत और सबसे बढ़कर डिजिटल डाउनलोड्स के लिए फुल लेंथ म्युजिकल ट्रैक, वीडियो, रिंगटोन, मोबाइल वॉलपेपर और डायलॉग प्रदान करता है।

भारत और दक्षिण एशिया में मोबाइल मनोरंजन सेवाएं प्रदान करते हैं। फिल्मों, संगीत और विज्ञापन पर केन्द्रित है।  वे अपनी वेबसाइट पर फ्लैश-आधारित गेम भी होस्ट करते हैं और उपभोक्ताओं में बहुत लोकप्रिय हैं। ग्राहकों में सभी वर्गों में संगीत, वॉलपेपर तथा रिंगटोन डाउनलोड की सुविधा है।

 

केन्द्रीय विचार:

हंगामा भारत में मनोरंजन सेवाएं देनेवाली पहली कंपनियों में से एक है। कंपनी नवोन्मेषिता, रचनात्मकता व निष्पादन को महत्त्व देती है और व्यवसाय के नैतिक मूल्यों में विश्वास करती है। वे कई तरह के प्लैटफॉर्मों पर विद्यमान हैं, जिसने उनकी सफलता में योगदान किया है।

1999 में नीरज रॉय के नेतृत्व में केवल 4 कर्मचारियों को लेकर ऑनलाइन प्रोमोशन एजेन्सी के रूप में शुरुआत की।

 

गिली

गिली (गिली इंडिया लि.) भारत के सबसे लोकप्रिय हीरा ब्रान्डों में एस एक है। इसका मुख्यालय मुंबई में है। गिली गीतांजलि समूह का हीरा आभूषण ब्रान्ड है,। यह देश का सबसे बड़े हीरा एवं आभूषण विनिर्माता तथा खुदरा विक्रेता है। भारत में गिली मुख्य रूप से अंगूठियाँ, हार, कान की बालियाँ, पेंडैंट, चूड़ियाँ, और रंगीन पत्तर बनाता है। इसका कारोबार पूरे भारत भर में है। इसके 66 एक्स्क्लूजिव ब्रान्ड आउटलेट (ईबीओ) तथा 400 शॉप इन शॉप (एसआईएस) काउन्टर हैं। गिली कंपनी के स्वामित्व वाले और कंपनी-परिचालित, तथा फ्रेन्चाइडी आधार पर धारित व परिचालित स्टोर, दोनों चलाता है। इसकी मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय बाजारों जैसे यूरोप के ऐंटीवर्प और इटली, अमेरिका, मध्य-पूर्व तथा एशिया के अन्य बाजारों जैसे जापान, चीन हॉङ्ग कॉङ्ग व थाईलैंड में भी है।

इसने वहन करने योग्य दामों पर, सुरुचिपूर्ण, ब्रान्डेड हीरे के आभूषण उतारे, जिन्हें हर कोई हर समय पहन सकता है। जब हीरे केवल अमीरों के पास हुआ करते थे, और हीरे के खुदरा विक्रेता बहुत कम थे, वैसे समय में गिली ने बिना किसी झिझक के सभी के लिए कम दाम पर सुरुचिपूर्ण आभूषण उतारने की पहल की।

सफलता के सूत्र:

गिली सूत्र ने लोगों की इस धारणा को बदलने का काम किया है कि हीरे के आभूषण केवल विशेष मौकों पर पहने जाते हैं। महिलाओं ने अपने आप को हर समय सजाए-संवारे रखने संबंधी गिली के अंदाज को अब पूरी तरह अपना लिया है। इस तरह गिली ने हर भारतीय महिला के दिल को चुराया है। गिली पहला ब्रान्ड है जिसने ग्राहक को बेचे गए हर आभूषण के साथ  "प्रामाणिकता प्रमाणपत्र" देना शुरू किया।.

गीतांजलि समूह की सहायक.

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