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Successful Startups

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निरुलाज

आज निरूला के नोएडा स्थित कारखाने में बेकरी, कन्फेक्शनरी, चीज प्लान्ट, आइस क्रीम प्लान्ट, खाद्य प्रसंस्करण इकाई तथा हॉट किचन समाहित हैं। नोएडा ने उत्तर भारत में अपना व्यवसाय फैलाया है और पानीपत, देहरादून,चंडीगढ़, जयपुर, मेरठ तथा पठानकोट में रेस्तराँ खोले हैं। इसने 2005 में इंडिय ऑयल कॉर्पोरेशन से संबंध कायम करके उसके द्वारका, पंजाबी बाग़, जनकपुरी, गुड़गाँव और चंडीगढ़ स्थित ईंधन केन्द्रों पर अपने आउटलेट खोले। एचपीसीएल से भी निरुला का राष्ट्रीय अनुबंध है और इसने दिल्ली, जयपुर व पठानकोट में परियोजनाएं शुरू की हैं।

निरुला भारतीय स्वाद-ग्रंथियों को तृप्त करने वाली भारत की पहली फास्ट फूड श्रृंखला है। यह बच्चों और युवा वयस्कों वाले परिवारों के लिए गर्मजोशी से भरी हुई, समसामयिक और पहुँचने में आसान जगह है, जहाँ खाना मिलता है। यहाँ कई प्रकार के हिन्दुस्तानी और अंतरराष्ट्रीय भोजन, पेय पदार्थ और डेजर्ट ऐसे दाम पर मिलते हैं जो हम आसानी से चुका सकें।

मेजबानी उद्योग में निरुला एक जाना-पहचाना नाम है। सफलता की बाकी कहानियों की तरह निरुला की शुरुआत भी छोटी ही रही। निरुला परिवार 1928 में दिल्ली आया। निरुला बंधुओं ने होटल व खाद्य सेवा उद्योग में जाने से पहले कई व्यवसायों पर हाथ आजमाए, जिसमें औषधि, चश्मे की दुकान और फोटो स्टुडियो शामिल हैं।

याहू!

याहू ने 2010 में $6,324 मिलियन का राजस्व जुटाया। याहू मेल के 2,730 लाख प्रयोक्ता होने का अनुमान है। इसका अधिकांश राजस्व विज्ञापन से आता है।

यह एक सर्ज इंजिन तथा वेब डायरेक्टरी के तौर पर आरंभ हुई। बाद में वेब पोर्टल के रूप में इसका विस्तार किया गया । इसके लोकप्रिय उत्पाद हैं - याहू मेल, याहू फाइनेन्स, याहू मैसेंजर तथा याहू गेम्स

याहू वेब डायरेक्टरी एक सर्चेबल पेज इंडेक्स के बजाय एक हायरार्की के रूप बनाई गई थी। याहू ने कई अधिग्रहण भी किए, जिससे यह इंटरनेट पर सबसे अधिक देखी जाने वाली वेबसाइटों में से एक हो गई। याहू का विश्वास है कि टीम वर्क, नवोन्मेष तथा ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण पर बल देकर ही सफलता हासिल की जा सकती है।

स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के स्नातक जेरी यंग तथा डेविड फाइलो ने 1944 में इसकी स्थापना की। यह वर्ल्ड वाइड वेब की डायरेक्टरी के रूप में शुरू हुई और इस 1995 में औपचारिक रूप से निगमित किया गया।

फैबइंडिया

फैबइंडिया के भारत भर में 141 खुदरा स्टोर हैं और दुबई, नेपाल तथा इटली में एक-एक स्टोर है।

मूलतः इथनिक गारमेंट्स का कारोबार है। वे (अच्छी सिलाई और कटाई से युक्त) रेडीमेड वस्त्रों में रंग, कपड़ा और डिजाइन के ऐसे विकल्प पेश करते हैं जो अपीलिंग होते हैं। उनका इन-स्टोर अनुभव भी औरों से अलग होता है। कतिपय सावयव उत्पादों पर वे प्रमाणन भी प्रदान करते हैं। फैबइंडिया अपने अद्वितीय सीओसी (समुदाय के स्वामित्व वाली कंपनी) मॉडल से समावेशी पूँजीवाद को बढ़ावा देता है। सीओसी मॉडल में कंपनियाँ रहती हैं, जो ग्रामीण उत्पादक और फैबइंडिया के बीच मूल्यवर्द्धक मध्यवर्ती के रूप में कार्य करती हैं। जैसा कि नाम सुझाता है, इनका स्वामित्व उन समुदायों के पास होता है, जहां से वे ऑपरेट करती हैं। इन कंपनियों की न्यूनतम 26% शेय़रधारिता शिल्पियों के पास होती है।

इसकी स्थापना जॉन बिसैल ने 1960 में भारत की विविध शिल्प परंपरा की वस्तुओं को बाजार में उतारने के लिए की थी। फैबइंडिया ने होम फर्निशिंग की निर्यातक कंपनी के रूप में शुरुआत की थी। पहला फैबइंडिया खुदरा स्टोर ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली में पंद्रह वर्ष बाद खोला गया।

अमूल

गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन फैडरेशन लि. (जीसीएमएमएफ) भारत का सबसे बड़ा खाद्य उत्पाद विपणन संगठन है, जिसका कुल वार्षिक कारोबार(2010-11) 2.2 अरब अमेरिकी डालर है। यह रोजाना लगभग 120 लाख लीटर दूध (सर्वश्रेष्ठ अवधि के दौरान) 15,712 ग्राम दुग्ध सहकारी सोसाइटियों, 17 सदस्य संघों, जो 24 जिलों को कवर करते हैं, और 30 लाख दुग्ध उत्पादक सदस्यों से प्राप्त करता है।

उच्च गुणवत्ता के दुग्ध उत्पाद, नवोन्मेषी विज्ञापन, हास्य का प्रभावी उपयोग तथा सतत ब्रांड पहचान, अमूल गर्ल के लिए देश भर में सुविदित, उसके नवोन्मेषी उत्पाद (दही, आइसक्रीम तथा कई प्रकार के चीज)। उत्पाद भारत में लगभग सर्वत्र उपलब्ध हैं।

बिचौलियों को समाप्त कर दूध के उत्पादकों तथा उपभोक्ताओं के बीच सीधा लिंकेज स्थापित किया। खरीद, प्रसंस्करण और विपणन का नियंत्रण दुग्ध उत्पादकों (किसानों) द्वारा किया जाता है। व्यावसायिक प्रबंधन।

कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लि. ने केवल 2 ग्राम डेरी सहकारी सोसायटियों तथा 247 लीटर दूध के साथ शुरुआत की और आज इसे अमूल डेरी के नाम से जाना जाता है। संस्थापक अध्यक्ष त्रिभुवनदास पटेल के प्रेरक नेतृत्व तथा डॉ. वर्गीज कुरियन, जिन्हें 1950 से डेरी चलाने का काम सौंपा गया था, के प्रतिबद्ध व्यावसायिक तौर-तरीकों के फलस्वरूप अमूल एक के बाद एक मुकाम हासिल करता गया।

वालमार्ट

वालमार्ट 15 देशों में 55 विभिन्‍न नामों से 8500 स्‍टोर परिचालित करता है । 2011 में इसका राजस्‍व 418952 मिलियन डालर रहा ।

 

 

 

विश्‍व में सबसे बड़ा खुदरा स्‍टोर, जो व्‍यय की पूर्ण वसूली, कम कीमतों एवं बडी मात्रा में विविधता के लिए जाना जाता है। 

कीमतों एवं लाभ मार्जिनों को घटाकर उच्‍च बिक्री की रणनीति अपनाने का निर्णय किया । वे अपना माल कम लागत के उत्‍पादकों से लेते हैं, जिससे उन्‍हें कीमते कम रखकर ग्राहकों को खुश रखने में मदद मिलती है ।

इसे सैम वॉल्‍टन ने 1962 में आरंभ किया । वे शुरू में एक खुदरा स्‍टोर पर प्रबंधक थे और उन्‍होंने 1958 में एक फ्रेंचाइजी खरीदी । फिर उन्‍होंने अपना स्‍वयं का स्‍टोर खोलने का निर्णया किया, जिसे वालमार्ट नाम से जाना जाने लगा ।

एप्पल इंक

निवल बिक्री $10,82,490 लाख ( 2011). उनके उत्पाद दुनिया भर में उपलब्ध हैं।

मैकिंटोश की कुल बिक्री 160 लाख यूनिट,

आई पॉड की कुल बिक्री 420 लाख यूनिट,

आई फोन की बिक्री 720 लाख यूनिट तथा आई पैड की बिक्री 320 लाख यूनिट

 

आई पॉड़, आई फोन, आई पैड, आई ट्यून्स तथा मैकिन्टोश कंप्यूटर

सफलतापूर्वक पर्सनल कंप्यूटर बनाने तथा बड़े पैमाने पर बाजार मे उतारने वाली पहली कंपनी।

केंद्रीय विचार:

कंप्यूटर और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स डिजायन की सादगी और इस्तेमाल में आसानी को ध्यान में रखकर बनाए गए।

महत्वपूर्ण फर्क :

'इंजीनियरों द्वारा डिजाइन किए गए तथा इंजीनियरों के लिए डिजाइन किए गए'  उत्पादों की बजाय 'डिजाइनर उत्पाद'

स्टीव जॉब्स तथा स्टीव वॉजनिएक ने एक गैरेज में शुरू किया।

 

माइक्रोसॉफ्ट

राजस्व $ 699430 लाख । दुनिया भर के बाजार में उपस्थिति ।

विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, एक्सबीओएस 360। उन्होंने वहनीय कंप्यूटिंग दी तथा जीयूआई दी, जो इस्तेमाल करने में आसान है। उनका ऑपरेटिंग सिस्टम तमाम तरह के कंप्यूटर पेरीफेरल्स के अनुकूल है और तृतीय पक्ष सॉफ्टवेयर के ब़डी वैरायटी उपलब्ध है।

जब कंप्यूटर उद्योग हार्डवेयर पर ध्यान केंद्रित करने में व्यस्त था, माइक्रोसॉफ्ट ऐसी पहली कंपनी थी जिसने केवल सॉफ्टवेयर पर काम किया और उसने लाइसेंसिग मॉडल अपनाया, जिससे उसके उत्पादों की बिक्री अनेक विक्रेताओं के माध्यम से हो सकी।

पॉल एलन तथा बिल गेट्स ने इसकी स्थापना उस समय की जब वे अभी कॉलेज में पढ़ ही रहे थे।

हल्दीराम

देश भर में उनकी उपस्थिति है।

विशिष्ट रूप से भारतीय कन्वेनिएंस फूड - स्वाद में खास है और इसकी राष्ट्रव्यापी अपील है। उनके फूड कोर्ट हैं, जो भारतीय खाना परोसते हैं। उनकी पैकेज्ड नमकीन तथा मिठाइयाँ स्वाद में विशिष्ट हैं और उनका अच्छा गुणवत्ता नियंत्रण है। वे रेडी टु ईट मार्केट में प्रवेश कर रहे हैं। उनके सभी रेस्टोरेन्ट / खाद्य शुद्ध शाकाहारी हैं। खास स्वाद (बीकानेर भुजिया), स्वच्छता, सुविधा (पैकेज्ड रसगुल्ला तथा भारतीय नमकीन)

इसकी शुरूआत बीकानेर में एक छोटी सी दुकान से हुई। इसकी नमकीन का स्वाद खास तौर पर अलग है और ग्राहकों को इसकी लत लग जाती है।

मैकडोनाल्ड

मैकडोनाल्ड 119 से अधिक देशों में स्थित है और दुनिया भर में इसके 31,000 रेस्टोरेंट हैं। उनका दावा है कि वे दिन भर में 580 लाख ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करते हैं। 2010 में उनका निवल राजस्व $ 2,40,780 लाख था। राजस्व प्रॉपर्टी डीलिंग, बिक्री और फ्रैंचाइजी रॉयल्टी तथा किराए के माध्यम से आता है।

फास्ट फूड में विशेषज्ञता है, स्वच्छ रेस्टोरेंट हैं, फेमिली सेटिंग देते हैं । उनके द्वारा प्रदत्त भोजन मूलत: बच्चों के को बहुत भाते हैं। उनके भोजन सच में पैसे की कीमत वसूल करा देते हैं। उनके यहाँ मुख्यत:बर्गर, फ्रेंच फ्राइज़, शीतल पेय, शेक तथा डेजर्ट उपलब्ध हैं। मैकडोनाल्ड का मैन्यु स्थानीय स्वाद के अनुसार होता है और यह देश - देश के अनुसार अलग-अलग होता है।

यद्यपि फास्टफूड की संकल्पना पहले से थी, पर कहा जाता है कि मैकडॉनाल्ड फ्रैंचाइजी मॉडल का अग्रणी है। दुनिया भर में उनके गुणवत्ता मानक भी हैं, जिसका उद्देश्य यह है कि कुछ उत्पाद दुनिया में कहीं भी एक ही जैसा स्वाद दें।

रिचर्ड और मॉरिस मैकडोनाल्ड नामक दो भाइयों ने  1940 में इसकी स्थापना की।

सबवे

व्यवसाय आकार | परिचालन :

2010 में 1620 करोड़ डालर का राजस्व । सबवे दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल चेन रेस्टोरेंट है। इसके 98 देशों में कुल 35,000 रेस्टोरेंट हैं। रेस्टोरेंटों की संख्या की दृष्टि से सबवे मैकडोनाल्ड से भी आगे निकल गया है।

कंपनी की सफलता के कारण :

इसका मुख्य उत्पाद सब सैंडविच का सबमेरिन है। ग्राहक सबवे को एक स्वास्थ्यप्रद तथा मितव्ययी विकल्प के रूप में देखते हैं। सैंडविच ग्राहक के सामने तैयार की जाती हैं और उन्हें उनके स्वाद के अनुसार अऩुकूलित किया जा सकता है। मैन्यु में कुछ स्टेफल आइटम हैं, किंतु उसे स्थानीय तथा पसंद के अनुसार अऩुकूलित किया जाता है। सबवे ने फ्रैंचाइजी मॉडल अपनाया है। खासियत यह है कि उनके सैंडविच ग्राहकों के सामने तैयार किए जाते हैं (यह असैंबली लाइन से मिलती-जुलती प्रक्रिया है), जहां ग्राहक अपनी इच्छानुसार उसके घटक चुन सकते हैं। वे जहाँ तक संभव होता है, एकदम ताजा सामग्री इस्तेमाल करते हैं। मालिकों का दावा है कि यह मॉडल की सादगी है, जिसने ग्राहकों और फ्रैंचाइजी, दोनों को समान रूप से आकर्षित किया है। अन्य फास्टफूड रेस्टोरेंट की तुलना में उन्होंने खुद को अधिक स्वास्थकर विकल्प देने वाले के तौर पर पेश किया है।

आरंभिक चरण- यह कैसे शुरू हुआ ? : 

 

फ्रैड डि लूसा ने एक पारिवारिक मत्र से 1000 डालर उधार लेकर 1965 में आरंभ किया । वेबसाइट लिंक : सबवे इंडिया आधिकारिक वेबसाइट 

कंपनी का मूल:  विदेशी

फ्रैड डि लूसा ने एक पारिवारिक मत्र से 1000 डालर उधार लेकर 1965 में आरंभ किया । 

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