Frequently Asked Questions

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•संबंधित वस्तु के उत्पादक/ निर्माता अधिकृत प्रयोगकर्ता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं•यह एक पंजीकृत भौगोलिक संकेतक के संबंध में होना चाहिए•आवेदन निर्धारित प्रारूप में लिखित रूप में निर्धारित शुल्क के साथ किया जाना चाहिए

वस्तुओं की इन तीन श्रेणियों के संबंध में काम करने वाले व्यक्ति निर्माता के अंतर्गत आते हैं:


1. कृषि वस्तुओं के संबंध में उनका उत्पादन, प्रसंस्करण, व्यापार  या करोबार शामिल हैं.

2. प्राकृतिक वस्तुओं के संबंध में उनका दोहन , व्यापार  या करोबार शामिल हैं.

3. हस्तशिल्प या औद्योगिक वस्तुओं के संबंध में उन्हें बनाने, निर्माण, व्यापार या करोबार शामिल हैं.

पंजीकरण अनिवार्य नहीं है. किंतु पंजीकरण,  उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई की सुविधा और बेहतर कानूनी संरक्षण देता है. पंजीकृत मालिक और अधिकृत उपयोगकर्ता उल्लंघन के प्रति कार्रवाई शुरू कर सकते हैं. अधिकृत उपयोगकर्ता भौगोलिक संकेतक का उपयोग करने के लिए अनन्य अधिकार का भी प्रयोग कर सकते हैं.

एक अधिकृत उपयोगकर्ता को किसी पंजीकृत भौगोलिक संकेतक से संबंधित वस्तु के संबंध में उस भौगोलिक संकेतक के प्रयोग का अनन्य अधिकार होता है.

किसी भौगोलिक संकेतक का पंजीकरण 10 साल की अवधि के लिए वैध होता है.

यह प्रत्येक 10 वर्ष की अवधि के बाद आगे समय-समय पर नवीकृत किया जा सकता है.

यदि किसी पंजीकृत भौगोलिक संकेतक का नवीकरण नहीं किया जाए तो उसे रजिस्टर से हटाया जा सकता है.

• जब कोई अनधिकृत उपयोगकर्ता किसी भौगोलिक संकेतक का प्रयोग इस तरीके से करता है जो यह दर्शाए कि उन वस्तुओं का भौगोलिक क्षेत्र ऐसी वस्तुओं के मूल भौगोलिक क्षेत्र के अलावा कोई अन्य क्षेत्र है जिसकी वजह से वह ऐसी वस्तुओं के मूल भौगोलिक क्षेत्र के संबंध में लोगों को गुमराह कर रहा हो.


• जब किसी पंजीकृत भौगोलिक संकेतक के प्रयोग के परिणामस्वरूप, भौगोलिक संकेतक के संक्रमण सहित एक अनुचित प्रतियोगिता उत्पन्न हो जाए.

किसी पंजीकृत भौगोलिक संकेतक के पंजीकृत मालिक या अधिकृत उपयोगकर्ता उसके उल्लंघन के प्रति कार्रवाई आरंभ कर सकते हैं.

नहीं, एक भौगोलिक संकेतक संबंधित वस्तुओं के उत्पादकों की एक सार्वजनिक संपत्ति होता है. यह समनुदेशन, संचारण, प्रसारण, लाइसेंस, प्रतिज्ञा, बंधक, या इस तरह के अन्य समझौते का विषय नहीं होता. हालांकि, जब एक अधिकृत उपयोगकर्ता की मृत्यु हो जाती है तो उसका हक उसके उत्तराधिकारी को अन्तरित हो जाता है.

जी हां. अपीलीय बोर्ड या भौगोलिक संकेतक के रजिस्ट्रार के पास किसी भौगोलिक संकेतक या अधिकृत उपयोगकर्ता को रजिस्टर से हटाने की शक्ति है. इसके अलावा, किसी पीड़ित व्यक्ति के आवेदन पर ऐसी कार्रवाई की जा सकती है.

• इसका स्रोत एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र होता है.


• यह कृषि, प्राकृतिक या विनिर्मित वस्तुओं की पहचान के लिए प्रयोग किया जाता है


• विनिर्मित वस्तुओं का उत्पादन, संसाधन या निर्माण उसी क्षेत्र में किया जाना चाहिए.


• उसमें एक विशेष गुणवत्ता या प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताएं होनी चाहिए.

व्यापार चिह्न एक संकेत है जो संबंधित व्यापार के दौरान प्रयोग किया जाता है और वह उस उद्यम की वस्तुओं और सेवाओं को अन्य उद्यमों की वस्तुओं और सेवाओं से अलग दर्शाता है. जबकि भौगोलिक संकेतक एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से आनेवाली वस्तुओं की विशिष्ट विशेषताओं की पहचान के लिए प्रयोग किया जाता है.

भारत सरकार ने अति लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास(एमएसएमईडी) अधिनियम 2006 अधिनियमित किया हॆ जिसके अनुसार अति लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों की परिभाषा निम्नवत हॆः-

  • किसी वस्तु के निर्माण अथवा उत्पादन, प्रसंस्करण अथवा परिरक्षण करने वाले उद्यम निम्न के अनुसारः
  1. अति लघु (माइक्रो) उद्यम वह होता हॆ जिसमे संयंत्र एवं मशीनरी पर निवेश रु 25 लाख लक होता हॆ;
  2. लघु उद्यम वह हॆ जिसमें संयंत्र एवं मशीनरी पर निवेश रु 25 लाख से अधिक किंतु रु 5 करोड़ से अधिक नहीं होता; तथा
  3. मध्यम उद्यम वह हॆ जिसमे संयंत्र एवं मशीनरी पर व्यय रु 5 करोड़ से अधिक किंतु रु 10 करोड़ से अधिक नहीं होता।

उक्त उद्यमों के मामले में संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश उनकी मूल लागत होती हॆ जिसमें भूमि तथा भवन एवं लघु उद्योग मंत्रालय के 5 अक्तूबर, 2006 की अधिसूचना सं एस.ओ.1722(ई) में उल्लिखित मदें शामिल नहीं होतीं।

  • वे उद्यम जो सेवा प्रदान करने अथवा उपलब्ध कराते हॆं, तथा जिनका उपस्करो/ उपकरणों में निवेश (मूल लागत भूमि, भवन तथा फ़र्नीचर, फ़िटिंग्स एवं एमएसएमईडी अधिनियम 2006 में अधिसूचित उन मदों को छोड़कर जिनका प्रदान की जा रही सेवा से सीधा संबंध नहीं हॆ), का विवरण निम्नवत हॆः-
    1. अति लघु (माइक्रो) उद्यम वह होता हॆ जिसमे उपस्करों/उपकरणों पर निवेश रु 10 लाख से अधिक नहीं होता हॆ;
    2. लघु उद्यम वह हॆ जिसमें उपस्करों/उपकरणों पर निवेश रु 10 लाख से अधिक किंतु रु 2 करोड़ से अधिक नहीं होता; तथा
    3. मध्यम उद्यम वह हॆ जिसमे उपस्करों/उपकरणों पर व्यय रु 2 करोड़ से अधिक किंतु रु 5 करोड़ से अधिक नहीं होता।

ऋण प्रदान करने हेतु क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण का उद्देश्य यह हॆ कि अति लघु एवं लघु उद्यमों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके जिसे चिह्नित क्लस्टरों में बॆंकिंग सेवायें उपलब्ध कराने के माध्यम से पूरा किया जा सकता हॆ। क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण निम्नांकित मामलों में लाभकारी सिद्ध हो सकता हॆ-(क) स्पष्ट रूप से परिभाषित तथा चिह्नित समूह के साथ व्यवसाय करने में;(ख) जोखिम के आकलन हेतु युक्तिसंगत जान्कारी की उपलब्धता(ग) ऋण देने वाली संस्थाओं द्वारा मानिटरिंग(घ) लागत में कमी।       अतएव, बॆंकों को निदेश दिया गया हॆ कि वे इस दृष्टिकोण को प्रमुखता दें तथा एसएमई वित्तपोषण हेतु इसे अधिकाधिक अपनायें। यूनाईटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट आर्गनाईज़ेशन (यूनिडो) ने देश के विभिन्न भागों के 21 राज्यों में फ़ॆले 388 क्लस्टरों को चिह्नित किया हॆ। माइक्रो, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने भी स्कीम फ़ार रिजेनेरेशन आफ़ ट्रॆडिशनल इंडस्ट्रीज़ (स्फ़ूर्ति) योजना के अंतर्गत तथा माइक्रो एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) के अंतर्गत 121 अल्पसंख्यक बहुल जिलों में स्थित क्लस्टरों की सूची अनुमोदित की हॆ। तदनुसार बॆंको को निदेश दिया गया हॆ कि वे देश के अल्ल्प संख्यक बहुल क्षेत्रों में रहने वाले अल्पसंख्यक उद्यमियों के चिह्नित क्लस्टरों को ऋण प्रवाह बढाने हेतु उपयुक्त कदम उठायें। 

एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार तथा सिडबी ने संयुक्त रूप से माइक्रो तथा लघु उद्यमों हेतु ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट की स्थापना की हॆ जिसका उद्देश्य संपार्श्विक प्रतिभूति / तृतीय पक्ष गारंटी लिये बिना अति लघु तथा लघु उद्यम क्षेत्र को ऋण प्रवाह बढाना हॆ। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह हॆ कि ऋण देने वाली संस्था परियोजना की अर्थक्षमता को प्रमुखता दे तथा वित्तपोषित परिसंपत्तियों की मात्र प्राथमिक प्रतिभूति से अपने ऋण को सुरक्षित करें। क्रेडिट गारंटी योजना ऋण दात्री संस्था को आश्वस्त करने हेतु हॆ कि यदि कोई एमएसई इकाई, जिसने संपार्श्विक प्रतिभूति रहित ऋण सुविधा प्राप्त की हॆ, ऋण्दाता के प्रति अपनी देयताओं को नहीं पूरा कर पाता तो गारंटी ट्रस्ट ऋणदाता को होने वाले नुकसान की भरपायी चूक की बकाया राशि की 85% तक करेगा। सीजीटीएमएसई ऋण्दात्री संस्थाओं द्वारा बिना संपार्श्विक प्रतिभूति तथा/अथवा तृतीय पक्ष गारंटी लिये प्रदान किये गये रु 100 लाख तक की ऋण सुविधाओं हेतु कवर प्रदान करेगा। उक्त गारंटी कवर हेतु सीजीटीएमएसई द्वारा गारंटी तथा वार्षिक सेवा शुल्क प्रभारित किया जाता हॆ। वर्तमान में गारंटी शुल्क तथा वार्षिक सेवा शुल्क ऋणकर्ता द्वारा वहन किया जाता हॆ।

नहीं। क्रेडिट रेटिंग अनिवार्य नहीं हॆं परंतु यह एमएसई ऋणकर्ताओं के हित में हॆ कि वे क्रडिट रेटिंग करवा लें क्योंकि इससे उनके द्वारा बॆंकों से लिये गये ऋण का मूल्य निर्धारित करने में सहायता मिलती हॆ।

सामान्य भाषा में ट्रेड मार्क (ब्रांड नाम से प्रचलित) वह दृश्य चिह्न हॆ जो शब्द हस्ताक्षर, अथवा नाम, अथवा उपाय/युक्ति, अथवा लेबल, अथवा अंक अथवा रंगों के संयोजन, कुछ भी हो सकता हॆ, जिसे किसी अंडरटेकिंग द्वारा अपने माल अथवा सेवाओं व अन्य वाणिज्यिक मदों को, समान माल अथवा सेवायें बनाने वाली अन्य अंडरटेकिंगों से अलग दिखाने हेतु प्रयोग किया जाता हॆ।  

ट्रेड मार्क को अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत कराने हेतु विधिक अपेक्षायें निम्नवत हॆः-          

  • चयनित ट्रेड मार्क को लिखित/चित्र रूप में प्रस्तुत करने योग्य (कागज़ पर) होना अनिवार्य हॆ।
  • इसमे एक अंडरटेकिंग के माल अथवा सेवाओं को अन्य से अलग दिखाने की क्षमता होती चाहिये।
  • यदि यह एक शब्द हॆ तो इसे बोलना, वर्तनी तथा याद रखना आसान होना चाहिये।
  • आविष्कारित शब्द अथवा निर्मित शब्द सर्वश्रेष्ठ ट्रेड मार्क होते हॆं
  • कृपया भॊगोलिक नाम के चयन से बचें। किसी को भी उसपर एकाधिकार नहीं हो सकता।
  • उत्पाद की गुणवत्ता के वर्णन हेतु प्रशंसासूचक शब्दों (जॆसे बेस्ट, परफ़ेक्ट, सुपर, इत्यादि) के प्रयोग से बचें।

यह भी सुझाव हॆ कि एक बाज़ार सर्वेक्षण करके यह पता लगाया जाये कि समान मार्क पहले से ही तो बाज़ार में प्रयोग में नहीं हॆ।

आधुनिक व्यवसाय हालात में ट्रेड मार्क चार कार्य करता हॆः-

  • यह माल / सेवा तथा उसके मूल की पहचान कराता हॆ।
  • यह उक्त उत्पाद की गुणवत्ता के अपरिवर्तित रहने की गारंटी लेता हॆ।
  • यह माल/सेवाओं का विज्ञापन करता हॆ।
  • यह माल/सेवाओं की एक छवि निर्मित करता हॆ।

कोई भी व्यक्ति जो ट्रेड मार्क का प्रवर्तक होने का दावा करता हॆ निर्धारित प्रक्रियानुसार इसके पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकता हॆ। आवेदन में ट्रेड मार्क, माल/सेवाये, आवेदक का नाम एवं पता तथा एजेंट का नाम एवं पता (यदि कोई हो तो), पावर आफ़ अटार्नी, मार्क के प्रयोग की अवधि तथा हस्ताक्षर होने चाहिये। आवेदन हिंदी अथवा अंग्रेज़ी में होना चाहिये तथा इसे उपयुक्त कार्यालय में जमा किया जाना चाहिये। 

ट्रेड मार्क्स अधिनियम 1999 के अंतर्गत यह प्रावधान हॆ कि माल तथा सेवाओं का वर्गीकरण इनके अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण के अनुसार किया जाये। वर्तमान में उक्त अधिनियम की अनुसूची IV में विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले माल तथा सेवाओं की सूची का सारांश दिया गया हॆ जोकि मात्र सांकेतिक हॆ। कॊन सा माल अथवा सेवा किस श्रेणी में वर्गीकृत किया जायेगा यह पूर्णतः रजिस्ट्रार के प्राधिकार में आता हॆ। अधिनियम की अनुसूची IV ट्रेड मार्क्स पर इस प्रश्नावली के अंत में संलग्न हॆ। अन्य माल तथा सेवाओं के विस्तृत वर्णन हेतु डब्ल्यूआईपीओ द्वारा प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण को देखें अथवा स्थानीय कार्यालय में सहायता हेतु संपर्क करें। 

  • कोई भी नाम (इसमें आवेदक अथवा व्यवसाय में उसके पूर्वज का व्यक्तिगत नाम अथवा उपनाम अथवा व्यक्ति का हस्ताक्षर शामिल हॆ), जोकि व्यापार के लिये मार्क के रूप में अपनाने के लिये असामान्य न हो ।
  • कोई आविष्कारित शब्द अथवा शब्दकोष का कोई भी मनचाहा शब्द जोकि माल/ सेवाओं के गुणावगुण अथवा चरित्र को सीधे सीधे वर्णित न करता हो।
  • अक्षर अथवा अंक अथवा इनका कोई भी संयोजन
  • ट्रेड मार्क के प्रवर्तक का अधिकार या तो अधिनियम के अनुसार पंजीकरण के द्वारा हासिल किया जा सकता हॆ अथवा किसी विशेष माल अथवा सेवा के साथ प्रयोग के द्वारा।
  • डिवाइसें, जिनमे काल्पनिक डिवाइसे तथा चिह्न शामिल हॆं ।
  • मोनोग्राम
  • रंगों का संयोजन अथवा एक ही रंग किसी शब्द अथवा डिवाइस के साथ संयुक्त।
  • माल अथवा उनकी पॆकेजिंग की आकृति ।
  • मार्क जिसमें त्रिआयामी चिह्न हो।
  • ध्वनि चिह्न जब उन्हें पारंपरिक नोटेशन्स के रूप में दर्शाया गया हो अथवा शब्दों में चित्रित किया गया हो।
  • इसके द्वारा माल तथा सेवाओं के वास्तविक उद्गम की पहचान होती हॆ। ब्रांड अपने आप में ही प्रामाणिकता की मुहर हॆ।
  • इसके द्वारा माल तथा सेवाओं के मूल उदगम की पहचान सिद्ध होती हॆ।
  • इसके द्वारा आगे की खरीद को बढावा मिलता हॆ।
  • यह वफ़ादारी तथा संबद्ध होने का चिह्न हॆ ।
  • इससे उपभोक्ता को लाइफ़स्टाइल अथवा फ़ॆशन स्टेट्मेंट दर्शाने में भी सहायता मिल सकती हॆ।
  • पंजीकृत प्रवर्तकः ट्रेड मार्क का पंजीकृत प्रवर्तक अन्य व्यापारियों को अपने ट्रेड मार्क के अनधिकृत प्रयोग से रोक सकता हॆ, क्षतिपूर्ति हेतु दावा ठोक सकता हॆ तथा अतिलंघन करने वाले माल अथवा लेबलों को नष्ट कर सकता हॆ।
  • सरकारः ट्रेड मार्क के पंजीकरण से सरकार को वर्तमान वर्ष में रु 40 करोड़ की आय हुई हॆ तथा इसमें लगातार वृद्धि हो रही हॆ।
  • विधिक व्यवसायी (प्रोफ़ेशनल) – ट्रेड मार्क पंजीकरण प्रणाली पूरी तरह से व्यवसायियों तथा विधिक एवं पॆरा-विधिक परामर्शदाताओं (एजेंटों) द्वारा संचालित की जाती हॆ जो ट्रेड मार्क आवदनों पर कार्रवाई के लिये ग्राहकों की और से कार्य करते हॆं। 
  • क्रेता तथा ट्रेड मार्क माल एवं सेवाओं के अंतिम उपभोक्ता।

ट्रेड मार्क के पंजीकरण से उसके मालिक को पंजीकृत ट्रेड मार्क पर एकाधिकार प्राप्त हो जाता हॆ तथा इसे जिन माल अथवा सेवाओं के संबंध में पंजीकृत किया गया हॆ उनपर चिह्न (R) के द्वारा इंगित किया जाता हॆ। इस एकाधिकार के अतिलंघित होने पर स्वामी देश के उपयुक्त न्यायालय में अतिलंघन से राहत की मांग कर सकता हॆ। तथापि, यह एकाधिकार पंजी में उल्लिखित शर्तों जॆसे प्रयोग हेतु सीमित क्षेत्र, इत्यादि पर आधारित होता हॆ। यही नहीं, यदि विशेष परिस्थितियों में किन्हीं दो अथवा अधिक व्यक्तियों ने एक समान अथवा लगभग एक समान ट्रेड मार्क पंजीकृत करवा लिया हो तो ऎसे मामलों में एकाधिकार का एक दूसरे के विरुद्ध प्रयोग नहीं किया जा सकता। 

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