हरित रेटिंग्स

Green Ratings

हरित रेटिंग किसी उद्योग की पर्यावरण अनुकूलता का अनुमान हॆ। यह किसी उद्योग की गतिविधि के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले कुप्रभावों का आकलन करता हॆ तथा उद्योग द्वारा हानि को न्यूनतम स्तर तक रखने हेतु किये गये उपायों का आकलन करता हॆ। यह आकलन एक विश्वसनीय तृतीय पार्टी मूल्यांकनकर्ता द्वारा किया जाता हॆ। यह रेटिंग उद्योग की वर्तमान प्रक्रियाओं तथा प्रॊद्योगिकी तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले उनके प्रभाव का अध्ययन करने, स्वच्छ प्रॊद्योगिकी अपनाने तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने हेतु अपनाई गई विभिन्न प्रक्रियाओं के आधार पर प्रदान की जाती हॆ।

 

विश्व में हरित रेटिंग की प्रासंगिकता

द्रुतगामी ऒद्योगीकरण तथा इससे संबंधित ग्लोबल वार्मिंग ने हमारे ग्रह के इकालाजिकल संतुलन के स्थायित्व पर प्रश्नचिह्न लगा दिया हॆ। “यूनाइटेड नेशंस फ़्रेमवर्क कन्वेन्शन आन क्लाइमेट चेंज” तथा विशेष रूप से “क्योटो प्रोटोकाल” ने विकसित / उद्योगीकृत देशों पर कठिन तथा विधिक रूप से बाध्यकारी ग्रीनहाउसगॆस (जीएचजी) उत्सर्जन नियम लागू किये हॆ। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोपियन यूनियन जॆसे देशों ने जीवाश्म ईंधन आधारित उद्योगों पर कार्बन कर लगा दिया हॆ।

पर्यावरण अवक्रमण के विषय में बढती जागरूकता विश्व भर में पर्यवरण संबंधी विनियमों को अधिक कठोर बना रही हॆ। एमएसएमई क्षेत्र भी इस प्रवाह से अछूता नहीं रह सकता। निर्यात करने वाली एमएसएमई इकाइयों को शीघ्र ही यूरोपीय देशों द्वरा कार्बन कर लागू करना जॆसी व्यापार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता हॆ। स्वयं को एक ज़िम्मेदार कार्पोरेट नागरिक के रूप में स्थापित करने तथा पर्यावरण संस्थाओं जॆसे ग्रीन पीस, आदि की संभावित निंदा से बचने के लिये एमएसएमई को निकट भविष्य में हरित रेटिंग्स की आवश्यकता महसूस होगी।

भारत में हरित रेटिंग

भारत में हरित रेटिंग संबंधी पहल का विस्तार भवनों तथा निर्माण उद्योगों सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो चुका हॆ।
हरित भवन पहल

अधिक ऊर्जा दक्ष तथा इको अनुकूल भवनों के निर्माण के लिये न्यू एंड रिन्युवेबल एनर्ज्जी मिनिस्ट्री ने द एनर्जी एंड रिसोर्स इन्स्टीत्यूट (टेरी) के सहयोग से भारत मॆं हरित भवनों की रेटिंग हेतु राष्ट्रीय रेटिंग प्रणाली “ग्रीन रेटिंग फ़ार इंटीग्रेटेड हॆबिटॆट असेसमेंट (गृह) विकसित की हॆ। गृह रेटिंग प्रणाली में विभिन्न भागों जॆसे स्थल का चयन एवं आयोजना, संसाधनों की बचत तथा दक्ष उपभोग, भवन का परिचालन तथा रखरखाव एवं नवोन्मेषी उपायों आदि जॆसे 34 मानक शामिल हॆं। अधिक विवरण हेतु गृह.देखे।

हरित रेटिंग परियोजना

यह सेंटर फ़ार सायंस एंड एन्वायरन्मेंट (सीएसई) द्वारा भारतीय उद्योगों के अपना पर्यावरण संबंधी कार्यनिष्पादन सुधारने के लिये मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु 1995 में आरंभ एक गॆर सरकारी पहल हॆ। यह परियोजना मुख्यतः कंपनियों की स्वॆच्छिक सहभागिता पर आधारित था तथा नकारात्मक प्रचार से बचने हेतु कंपनी की इच्छा पर निर्भर था क्योंकि यह रेटिंग जन सामान्य की सूचना हेतु जारी की जाती हॆं। हरित रेटिंग प्रदान करने के साथ साथ इस पहल के अंतर्गत उद्योगों को अपना कार्यनिष्पादन सुधारने हेतु उठाये जाने वाले कदमों पर भी सुझाव दिये जाते हॆं। अधिकाश मामलों में कंपनियों ने सीएसई द्वारा सुझाये गये उपायों को लागू किया गया। इस परियोजना में पेपर एवं पल्प, सीमेंट, आटोमोबाइल तथा क्लोर अलकलाई क्षेत्र शामिल हॆ। अधिक जानकारी हेतु ग्रीन रेटिंग कार्यक्रम.देखें। ग्रीन क्रेडेन्शियल्स हेतु रेट की गयी कंपनियों में से अधिकांश बड़े उद्यम हॆं।

स्मेरा हरित रेटिंग्स

भारत में उद्यमों की हरित रेटिंग एसएमईरेटिंग एजेंसी लि (स्मेरा) द्वारा की जाती हॆ।. हरित रेटिंग सिडबी तथा स्मेरा की संयुक्त पहल हॆ। द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) नालेज पार्टनर के रूप में कार्य करता हॆ। सिडबी हरित रेटीकृत कंपनियों को प्रोस्ताशित करता हॆ तथा रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराता हॆ। भारत सरकार ने भी ऋण्दात्री संस्थाओं से अनुरोध किया हॆ कि वे अपने उधारकर्ता एमएसएमई को हरित रेटिंग हेतु प्रोत्साहित करें।


स्मेरा भारतीय एमएसएमई की हरित रेटिंग आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली एकमात्र संस्था हॆ। . आप्टिमिस्म (सिडबी की द्विमासिक पत्रिका ) में हरिते रेटिंग्स पर उद्धरण  पढे।

हरित रेटिंग के लाभ

  • पर्यावरण अनुकूलता के संबंध में स्वतंत्र तृतीय पार्टी मूल्यांकनः  यह इस बात की और इंगित करता हॆ कि एमएसएमई पर्यावरण तथा समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी के प्रति सजग हॆ।
  • रियायती दरों पर ऋण:  इससे एमएसएमई को सिडबी जॆसी वित्तीय संस्थाओं से रियायती दरों पर ऋण प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
  • पर्यावरण संबंधी जोखिम से बचावः Iइसके फ़लस्वरूप कठोर पर्यावरण संबंधी नियमों से संबंधित जोखिम में भी कमी होगी।
  • वॆल्यू चेन भागीदारों के बीच अधिक विश्वास: यह रेटिंग ऋणदाताओं, खरीदारों, भागीदारों, संयुक्त उद्यम भागीदारों, को इस बारे में आश्वस्त करती हॆ कि एमएसएमई एक ज़िम्मेदार कार्पोरेट नागरिक हॆ तथा इकालाजी को कुप्रभावित नहीं करती हॆ।
  • स्व-मूल्यांकन टूल: हरित रेटिंग एक स्व-मूल्यांकन टूल हॆ जिसके द्वारा सुधार के क्षेत्र का पता लगाने में सहायता मिलती हॆ।

जागरूकता उत्पन्न  करना: एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा प्रदत्त हरित रेटिंग विभिन्न स्टेकहोल्डर्स जॆसे  खरीदारों,आपूर्तिकर्ताओं, संयुक्त उद्यम भागीदारों की नज़र में एमएसएमई की दर्शनीयता को बढाती हॆ।

     हरित रेटिंग प्रक्रिया

एक सामान्य हरित रेटिंग प्रक्रिया को निम्नांकित चित्र में दर्शाया गया हॆ। आमतॊर पर सूचना प्राप्त करने से लेकर रेटिंग आवंटित करने तक 15 व्यवसाय दिवस लगते हॆं (स्रोतः स्मेरा)। स्मेरा द्वारा की गयी हरित रेटिंग की लागत रु 50,000/- हॆ(सेवाकर अतिरिक्त)।

  1. रेटिंग हेतु एमएसएमई का अनुरोध प्राप्त होना
  2. वित्तीय एवं प्रबंधकीय सूचना प्रस्तुत करना
  3. कार्य तथा विस्तृत प्रश्नावली को अंतिम रूप देना
  4. साइट विज़िट तथा प्रबंधन के साथ विचार विमर्श
  5. गहन विश्लेषण, उद्योग रिसर्च तथा मसॊदा रिपोर्ट
  6. रेटिंग समिति के समक्ष प्रस्तावित रेटिंग
  7. एमएसएमई को रेटिंग की सूचना देना
  8. रेटिंग समिति के समक्ष अपील
  9. अंतिम रेटिंग का प्रकाशन

वांछित दस्तावेज़ों की निर्देशक सूची

1. लघु उद्योग पंजीकरण/ उद्यमी ज्ञापन

2. विगत तीन वर्षों की लेखापरीक्षित लेखा रिपोर्ट तथा तुलनपत्र

3. वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र

4. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किये गये नवीनतम परीक्षण की रिपोर्ट

5. आईएसओ प्रमाणन अथवा कोई अन्य गुणवत्ता प्रमाणन

6. ऊर्जा लेखापरीक्षा प्रमाणपत्र, यदि कोई हो।

7. प्रोसेस मॆप के विवरण तथा प्रोसेस मॆप के अनुसार ऊर्जा खपत

8. पर्यावरण पर होने वाले दुष्प्रभवोम को रोकने हेतु इकाई द्वारा उथाये गये कदम, यदि कोई हो।

मॆं हरित रेटिंग का प्रयोग कॆसे कर सकता हूं?

  • यह स्थापित करने के लिये कि एमएसएमई पर्यावरण के प्रति जागरूक एक ज़िम्मेदार कार्पोरेट नागरिक हॆ।
  • क्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं, तकनीकी सहयोगियों, संयुक्त उद्यम भागीदारों की नज़र में विश्वसनीयता स्थापित करने हेतु
  • पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में परियोजनायें कार्यान्वित करने हेतु।
  • उद्योग में विद्यमान बेस्ट प्रॆक्टिसेस तथा सुधार की गुंजाइश वाले क्षेत्रों की पहचान करना

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एमएसएमई वित्तपोषण एवं विकास परियोजना के अंतर्गत, डीएफ़आईडी, यूके के तकनीकी सहायता घटक के अधीन सहायता-प्राप्त।