ऊर्जा दक्षता एवं लागत बचत

Energy Efficiency & Cost Savings

ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग से घरों, व्यवसायों और विभिन्न प्रकार के परिवहनों में ऊर्जा दक्षता प्राप्त की जा सकती है। यह इस बात पर ज़ोर देता है कि जीवाश्म-ईँधन से उत्पन्न ऊर्जा के स्तर के बराबर ऊर्जा सेवा उपलब्ध कराने के लिए ऊर्जा स्रोतों का न्यूनतम उपयोग किया जाए। बिजली उत्पन्न करने के लिए प्रधानत: जीवाश्म ईंधन, जैसे - कोयला, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का उपयोग होता है। इस बिजली का उपयोग आगे प्रकाश, तापन /शीतलन तथा औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है, जिससे ग्रीनहाउस गैसें, जैसे – कार्बन डाई-आक्साइड, मीथेन, आदि उत्सर्जन होती हैं। ग्रीनहाउस गैसों का सामान्य पर्यावरण और जीवन पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण यह माना जाता है कि ऊर्जा दक्ष विधियाँ ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करती हैं और उन्हें भारत सहित सभी देशों में अपनाया गया है। यह भी माना जाता है कि ऊर्जा दक्ष विधियाँ आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक संस्थाओं में विभिन्न सामानों और उपकरणों की उत्पादकता में सुधार लाती हैं। 

 

 EnergyManagerTraining.com का संदर्भ लें, जो भारत में ऊर्जा दक्षता संबंधी सूचनाओं का पावरहाउस है।

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) तथा जीटीज़ेड ने ऊर्जा प्रबंधकों और ऊर्जा लेखापरीक्षकों के लिए इस पोर्टल का क्रियान्वयन किया है, ताकि ऊर्जा संरक्षण अधिनियम में निहित विनियमों का परिचालन सुकर बनाया जा सके। इस पोर्टल का उद्देश्य जोखिमधारकों के बीच विचार-विमर्श सुकर बनाना, जनता की राय प्राप्त करना और ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन में मदद करना है। 

अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित पृष्ठ देखें।

 

ऊर्जा लेखापरीक्षा, परामर्शदात्री एवं प्रमाणन एजेन्सियाँ

Energy Audits, Consulting & Certifying Agencies

 

ऊर्जा लेखापरीक्षा

ऊर्जा लेखापरीक्षा के माध्यम से ऊर्जा-दक्ष प्रणालियों की आवश्यकता और उनके चयन के बारे में निश्चय किया जा सकता है, जिसमें व्यवसाय के उत्पादन पर बिना कू प्रतिकूल प्रभाव डाले ऊर्जा के उपयोग में कमी लाने के लिए किसी व्यवसाय इकाई के ऊर्जा उपयोग का निरीक्षण, सर्वेक्षण और विश्लेषण कर बृहद मूल्यांकन किया जाता है। ऊर्जा दक्षता का उद्देश्य लागत को इष्टतम बनाने, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा पहलुओं में सुधार करने तथा परिचालनों एवं रखरखाव प्रणालियों को बेहतर बनाने के उपाय चिह्नित करने में मदद करना है। आवासीय एवं वाणिज्यिक भवनों तथा औद्योगिक इकाइयों के लिए ऊर्जा लेखापरीक्षाएँ ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) या राज्य-स्तरीय ऊर्जा विनियामक निकायों से मान्यताप्राप्त लेखापरीक्षकों से कराई जा सकती हैं।

ऊर्जा लेखापरीक्षा कराने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया हेतु यहाँ क्लिक करें

परामर्शदात्री एवं प्रमाणन एजेन्सियाँ

ऐसी अनेक एजेन्सियाँ हैं, जो ऊर्जा मानकों के लिए प्रशिक्षण एवं प्रमाणन उपलब्ध कराती हैं। ऐसी एजेन्सियों की सूची नीचे दी गई है:

पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) : ऊर्जा लेखापरीक्षा, ईंधन तेल नैदानिक अध्ययन, लघु उद्योग अध्ययन, अनुवर्तन अध्ययन तथा संस्थागत प्रशिक्षण कार्यक्रम।

विनरॉक इंटरनेशनल इंडिया : यह प्राकृतिक संसाधन प्रबंध, स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में कार्य करती है।    


आंध्र प्रदेश औद्योगिक एवं तकनीकी परामर्श संगठन लि.(एपिटको लिमिटेड) : यह एक प्रमुख तकनीकी परामर्श संगठन है, जिसे अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं (आईडीबीआई, आईएफ़सीआई, आईसीआईसीआई), आंध्र प्रदेश के उद्योग विकास निगमों (एपीआईडीसी, एपीएसएफ़सी) तथा वाणिज्य बैंकों (आंध्र बैंक, इंडियन बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, सिंडिकेट बैंक) ने संयुक्त रूप से प्रवर्तित किया है।


ज़ेनिथ एनर्ज़ी : ज़ेनिथ की सक्षमताओं के मुख्य क्षेत्र निम्नलिखित है:

  • संसाधन निर्धारण अध्ययन
  • व्यवहार्यता रिपोर्टें
  • विस्तृत परियोजना रिपोर्टें
  • स्वच्छ विकास कार्यप्रणाली (सीडीएम) से संबंधित परियोजनाओं का विकास
  • स्वच्छ विकास कार्यप्रणाली (सीडीएम) परियोजनाओं के फलस्वरूप उत्सर्जन में हुई कमी का विपणन
  • ऊर्जा प्रबंध और लेखापरीक्षा सेवाएँ
  • सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण, आदि


सी-टेक सॉल्यूशन्स प्रा. लि. : यह बीईई से मान्यताप्राप्त ऊर्जा लेखापरीक्षा फ़र्म है, जो औद्योगिक सुरक्षा बेहतर बनाने और ऊर्जा लागत कम से कम करने के लिए कार्यरत है।


इंटरनेशनल क्वालिटी मैनेजमेन्ट सॉल्यूशन्स (आईक्यूएमएस) इंडिया : यह फ़र्म परामर्श, प्रशिक्षण तथा प्रमाणन के कार्य करती है। यह अनुपालन की जाँच करने या सत्यापन करने के लिए आपूर्तिकर्ता के स्तर पर द्वितीय पक्ष की लेखापरीक्षाओं के लिए सहयोग प्रदान करती है। यह ऊर्जा लेखापरीक्षा भी करती है।


एनर्जेटिक कंसल्टिंग प्रा.लि. : यह महाराष्ट्र ऊर्जा विकास एजेन्सी, ऊर्जा प्रबंध केंद्र, केरल तथा पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान से मान्यताप्राप्त ऊर्जा लेखापरीक्षा फ़र्म है।


औद्योगिक ऊर्जा बचत कंपनी (इंडस्ट्रियल एनर्ज़ी सेविंग्स कंपनी) :  इसे ऊर्जा लेखापरीक्षा /अनेक औद्योगिक एवं वाणिज्यिक भवनों के क्रियान्वयन का अनुभव है। यह फ़र्म लघु एवं मध्यम उद्यमों की ऊर्जा लागत में कमी करने में विशेषज्ञता से सहयोग कर सकती है।


श्निडर इलेक्ट्रिक कंन्ज़र्व : कंन्ज़र्व को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अधीन, ऊर्जा लेखापरीक्षा एजेन्सी के रूप में अस्थायी मान्यता का अनुमोदन प्रादन किया है। सरकार से स्थायी मान्यता दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है।


एक्टिव एनर्ज़ी एसोशिएट्स : यह निम्नलिखित ऊर्जा सेवाएँ देती है :

  • ऊर्जा लेखापरीक्षा
  • ऊर्जा प्रबंध संबंधी समाधान
  • ऊर्जा बचत योजनाओं का कार्यान्वयन
  • शर्त-आधारित निगरानी सेवाएँ
  • वैद्युत प्रणालियों की विश्वसनीयता की लेखापरीक्षा
  • आंतरिक वायु गुणवत्ता संबंधी लेखापरीक्षा
  • तापलेखन(थर्मोग्राफ़ी) (वैद्युत एवं वातानुकूलन प्रणालियाँ)
  • अल्ट्रासोनिक रिसाव का पता लगाना (संपीडित वायु एवं वाष्प)


ट्रांसगियर इलेक्ट्रिकल सर्विसेज़ :  यह कंपनी ऊर्जा लेखापरीक्षा का कार्य करने वाली एक ऊर्जा लेखापरीक्षा कंपनी है, जिसके पास कार्य सँभालने के लिए बीईई से प्रमाणित और अनुभवी ऊर्जा लेखापरीक्षक है और मापन के लिए तकनीकी रूप से योग्य स्टाफ़ भी उपलब्ध है। यह न केवल ऊर्जा बचत के लिए सुझाव देती है, बल्कि ऊर्जा प्रबंध तथा लेखापरीक्षा-उपरांत बचत प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए भी सहयोग करती है। ऊर्जा बचत और ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए सुझाई गई योजनाओं के साथ अपेक्षित तकनीकी विशिष्टताएँ और निवेश के लिए बज़ट अनुमान भी उपलब्ध कराए जाते हैं।  



इलिऑन टेक्नोलॉजीज़ ऐंड कंसल्टिंग प्रा.लि. : इलिऑन एक ऊर्जा परामर्श कंपनी है, जो अपने ग्राहकों को विस्तृत, अनुकूलित ऊर्जा बचत समाधान उपलब्ध कराती है। यह हमारे ग्राहकों को उनकी ऊर्जा संबंधी ज़रूरते पूरी करने के लिए सभी प्रकार के समाधान उपलब्ध कराती है। यह हमारे ग्राहकों के स्वामित्व वाली / परिचालित सुविधाओं की ऊर्जा, दक्षता या अतिभार में कमी लाने वाली विस्तृत निष्पादन-आधारित परियोजनाओं के विकास, संस्थापन और वित्तीयन में संलग्न है। इनकी परामर्शदाता नामसूची में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, भारत से प्रमाणित ऊर्जा लेखापरीक्षक, अग्रणी बैंकर और विभिन्न उद्योगों के अतिकुशल अभियंता (इंजीनियर) शामिल हैं।


 

भारत सरकार की ओर से ऊर्जा दक्षता पर कार्रवाई

Energy Efficiency by the Government of India

भारत में, भारत सरकार ने विभिन्न कानूनों और विनियमों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता संबंधी कार्यक्रम शुरू किए हैं। ये कानून और विनियम पिछले 20 वर्षों में क्रमश: लागू के गए हैं। इस अवधि के दौरान लागू कुछ निर्देशी कानून एवं विनियम नीचे दिए गए हैं, जो व्यवसायों के नियमित परिचालनों में ऊर्जा दक्ष विधियाँ अपनाए जाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने में सहायक रहे हैं :

  • वार्षिक रिपोर्ट में कंपनी स्तर की ऊर्जा दक्षता के बारे में सूचना प्रकट करना, ताकि पर्यावरणीय लागत और लाभ तथा देश में संबद्ध अंशदान का पता लगाया जा सके।

   स्रोत: “कॉर्पोरेट एन्विरॉनमेन्ट रिपोर्टिंग ऑन इंटरनेट – एन इनसाइट इनटू इंडियन प्रैक्टिसेस”

  • ऊर्जा दक्षता और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण के लिए त्वरित मूल्यह्रास
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन जो त्वरित मूल्यह्रास का उपयोग न करने वाले उन व्यवसायों को प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिनका पवन बिजली परियोजनाओं से जुड़ा ग्रिड एसईसी दरों पर ग्रिड को बिजली की बिक्री के लिए स्थापित किया गया है और उत्पादक अंतर्गृहीत बिजली परियोजनाओं में संलग्न होते हैं।  .

स्रोत: ए प्रेजेन्टेशन ऑन जेनरेशन बेस्ड इंसेन्टिव्स (जीबीआई)

  • ऊर्जा संरक्षम कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और निगरानी करने तथा ऊर्जा दक्षता के बारे में नीतिगत दिशानिर्देश एवं सलाह उपलब्ध कराने के लिए ऊर्जा मंत्रालय के अधीन (स्वायत्त) ऊर्जा प्रबंध केंद्र की स्थापना।

स्रोत: ऊर्जा मंत्रालय, वार्षिक रिपोर्ट, 2001-02

  • मूल्य एवं उत्पादन नियंत्रण की समाप्ति, ताकि औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित किया जा सके।
  • ऊर्जा मूल्य सुधार, ताकि ऊर्जा दक्षता संबंधी गतिविधियों का मार्गदर्शन किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धी क्षमता को बढ़ावा दिया जा सके।  
  • राज्य-स्तरीय ऊर्जा संरक्षण निधियों का गठन, जो कई उद्योगों में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने में राज्य को समर्थ बनाते हैं।
  • 50% लागत साझेदारी के माध्यम से ऊर्जा लेखापरीक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए भिन्न-भिन्न योजनाएँ
  • ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिए “विस्तृत परियोजना रिपोर्टें” बनाने को बढ़ावा देने के लिए अनुदान निधियाँ  
  • सौर्य गृह-जल ताप प्रणालियों की संस्थापना के लिए प्रोत्साहन  
  • ऊर्जा दक्षता प्रमाणन के व्यापार का अधिकार देना, जिससे व्यवसायों के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्द्धा प्रोत्साहित होती है।
  • एलायन्स फ़ॉर एनर्ज़ी एफ़िसिएन्ट इकोनॉमी(एईईई) नामक का उद्योग संघ का गठन, जिसकी स्थापना भारत के ऊर्जा दक्ष उद्योगों एवं सेवा-प्रदाताओं के बीच सहयोग सुकर बनाने के लिए किया गया, ताकि वे नीतिगत अनुसंधान एवं हिमायती संगठन के रूप में संगठित हो सकें और उसके माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में सरकार की ऊर्जा संरक्षण व ऊर्जा दक्षता संबंधी नीति के कार्यान्वयन, बाज़ार विकास तथा ऊर्जा दक्षता संबंधी सुधारों के क्रियान्वयन में सहयोग करे।
  • ऊर्जा मंत्रालय के अधीन उन  ऊर्जा सेवा कंपनियों (ईएससीओ) को नामसूचीबद्ध करने की शुरूआत, जो ऊर्जा दक्षता संबंधी गतिविधियों का निष्पादन करती हैं।


उपर्युक्त सरकारी गतिविधियाँ मुख्यत: भारत में ऊर्जा दक्षता प्रणालियाँ और पद्धतियाँ आरंभ करने के लिए शुरू की गई गतिविधियाँ दर्शाती हैं। इनमें से अधिकतर गतिविधियों का इस नोट में निर्दिष्ट विभिन्न मानको, योजनाओं और प्रमाणन में भी परीक्षण किया गया है।  

ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग हेतु उपकरण व कार्यक्रम

Equipments & Programs for Efficient Energy Use

ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग हेतु उपकरण व कार्यक्रम 

विद्युतीय उपकरण 

इनमें ऊर्जादक्ष मोटरें, ट्रांसफार्मर व चल आवृत्ति ड्राइव्‍स शामिल हैं, जो विद्युतीय शक्ति को विद्युत के प्रभावी उपयोग में बदलती है, जिससे विद्युत उपभोग की लागत घटती है । ये उपकरण घरों व वाणिज्यिक कारोबार में उपयोग आते हैं । अन्‍य उदाहरण हैं :

  • प्रकाश व्‍यवस्‍था  – सीएफएल, मेटल हेलीडस लैंप, एलईडी आदि ।
  • अन्‍य विद्युत लोड – ऊर्जादक्ष वायु संपीडक, ब्‍लोअर, पंखे, पंप, कैपेसिटर, स्‍वचालित शक्ति घटक नियंत्रक (एपीएफसी)

 औद्योगिक उपकरण

वॉटर ट्यूब बॉयलर, ऊर्जादक्ष बॉयलर, रेक्‍यूपरेटर, कंडेसेंट रिकवर व रिसाइकल प्रणाली, हीट पंप आदि । ऊर्जादक्षता ब्‍यूरो  (बीईई) द्वारा जारी ऊर्जादक्ष उपकरणों की पूरी सूची हेतु  यहां क्लिक करें ।   

भवनों में ऊर्जा प्रबंधन कार्यक्रम 

बीईई द्वारा शुरू किए गए ऊर्जा प्रबंध कार्यक्रम का लक्ष्‍य ऊर्जा कचरे व लागतों को घटाना, ऊर्जा संरक्षण उपायों का किसी सुविधा या भवन पर प्रभाव का अध्‍ययन, ऊर्जा संरक्षण उपायों को लागू करने की लागतों व लाभ का अध्‍ययन व सुविधा रखरखाव हेतु एक कार्यक्रम का विकास करना है ।

बीईई ने स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं, होटलों स्‍कूल जैसे वाणिज्यिक भवनों हेतु ऊर्जा प्रबंधन कार्यक्रम बनाए हैं, ताकि इन्‍हें आवासीय, वाणिज्यिक व औद्योगिक भवनों में लागू किया जा सके ।  (संबंधित बीईई रिपोर्टों हेतु ऊपर की लिंक पर क्लिक करें)

ऊर्जा प्रबंधन हेतु कदम

  • ऊर्जा प्रबंध कार्यक्रम शुरू करना : इसमें ऊर्जा प्रबंध ग‍तिविधियों हेतु शामिल व उत्‍तरदाई सहभागियों की पहचान करना तथा ऐसी योजना बनाना है, ताकि किसी विशेष समयावधि हेतु ऊर्जा संरक्षण के लक्ष्‍यों पर ध्‍यान देता है । इसमें दृष्टिकोणों का प्रचार करने की प्रक्रिया हेतु उपाय लागू करने, रणनीतियों व उपायों की निगरानी व स्‍टाफ सदस्‍यों को शिक्षा व पुरस्‍कार द्वारा प्रेरित करना है ।
  • दक्षता का लक्ष्‍य निर्धारण :  दक्षता लक्ष्‍य भवन की लाभप्रदता की माप से निर्धारित किए जाते हैं व तदनुसार परिवर्ती घटकों जैसे राजस्‍व, परिचालन व्‍यय, परिचालन मार्जिन व ऋणों का मूल्‍यांकन व निगरानी की जा सकती है । उक्‍त परिवर्ती घटकों के अनुसार भवन की वार्षिक ऊर्जा लागत की गणना व विश्‍लेषण किया जाएगा ।
  • ऊर्जा आकलन करना :  इस आकलन में मौजूदा ऊर्जा उपयोग व लागत, संभावित ऊर्जा बचत के अवसर व कार्यक्रम के भावी तुलनाओं हेतु सीमा तय करना शामिल है । आकलन प्रत्‍यक्ष आकलन के माध्‍यम से, जिसमें प्रेक्षण व ऊर्जा उपयोग व लागतों का खाता तैयार करना शामिल है, अथवा ऊर्जा लेखापरीक्षा, जो एक विस्‍तृत विश्‍लेषण है, में सर्वे व ऊर्जा प्रवाह के विश्‍लेषण से किया जा सकता है ।
  • ऊर्जा बचत के अवसरों की तलाश करना : ऊर्जा बचत के अवसरों की पहचान किसी भवन में ऊर्जा प्रबंधन को कर्मचारी प्रशिक्षण, ट्रेकिंग व ऊर्जा उपभोग की रिपोर्टिंग व सतत सुधार हेतु परिस्थितियों के निर्माण से की जा सकती है ।
  • ऊर्जा प्रबंध प्रणाली (ईएमएस) का कार्यान्‍वयन : ईएमएस एक कंप्‍यूटर आधारित नियंत्रण प्रणाली है, जो भवन की यांत्रिक व विद्युतीय उपकरणों का नियंत्रण व निगरानी करती है , जैसे वायु का प्रवाह, प्रकाश, आग व सुरक्षा प्रणालियां आदि । इन प्रणालियों का लक्ष्‍य ऊर्जा दक्षता के कार्यनिष्‍पादन की निगरानी है, जो कि मौजूदा व पिछले कार्यनिष्‍पादन की तुलना से अथवा मौजूदा कार्यनिष्‍पादन की तुलना, संबंधित क्षेत्र के लिए उपयुक्‍त स्‍थापित प्रक्रियाओं से करके की जाती है ।

 वाणिज्यिक भवनों हेतु ऊर्जा प्रबंध कार्यक्रम के उदाहरणों में शामिल हैं :

  • गर्म व ठंडी प्रणालियों, ताप शोषक कांच, निम्‍न उत्‍सर्जक कांच
  • दीवारों व छतों का इंसुलेशन  
  • ऊर्जा, पानी व अन्‍य स्रोतों का दक्ष उपयोग  
  • निवासियों तथा /अथवा कर्मचारियों की स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा 

कचरे व जहरीले पदाथों में कमी, परिचालन व रखरखाव का अधिकतम उपयोग आदि ।

ऊर्जा दक्षता - आवश्यकता और लाभ

Needs & Benefits of Energy Efficiency

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सीमित संसाधनों तथा सीमित परिचालन मार्जिनों के कारण नाजुक स्थिति में होते हैं। बढ़ती हुई ऊर्जा लागत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की उत्पादन तथा वितरण लागत को और बढ़ा सकती है। इस प्रकार उनकी दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता तथा लाभप्रदता घटती है। ऊर्जा लागत में कमी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की उत्पादन तथा वितरण लागत घटाने में सहायक हो सकती है। तथापि, भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में ऊर्जा दक्षता सुधारों तथा अवसरों को चिह्नित करने के लिए ज्ञान, वित्तपोषण तथा एकनिष्ठ कार्मिकों की कमी है। ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं में मोटे तौर पर उत्पादन प्रक्रियाओं, ऊर्जा-उत्पादन प्रक्रियाओं तथा कार्यस्थल पर ऊर्जा उपयोग के विनियमन में सुधारों का समावेश होता है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्य़म उद्यमों में ऊर्जा दक्षता कार्यान्वित करने के कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं :

  • बेहतर कर्मचारी उत्पादकता - हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए हवा के तापमान को नियंत्रित करने तथा उच्च दक्षता प्रकाश व्यवस्था संस्थापित करने से उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा - आवासीय, वाणिज्यिक और/अथवा औद्योगिक इकाइयों में ऊर्जा दक्षता प्रणालियाँ लगाने से ऐसी अनुकूल स्थितियाँ बन सकती हैं, जो वहां के लोगों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से अहानिकर हों।
  • बेहतर उत्पाद गुणवत्ता - ऊर्जा दक्षता उपकरणों में बड़े निवेश से ऊर्जा लागत में बचत हो सकती है और लंबे समय तक चलने वाले निवेशों की लागत का प्रतिफल कम समय में ही मिलने लगता है और इस प्रकार व्यावसायिक इकाई में उत्पाद गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
  • पर्यावरणिक प्रभाव - ऊर्जा दक्ष उपकरणों के जरिए होने वाले जीएचजी उत्सर्जन की जांच भारत में सभी संगत व्यावसायिक मानकों पर की जाती है। तदनुसार, जीएचजी उत्सर्जन काफी सीमित रहा है।
  • प्रतिस्पर्धात्मकता - उपर्युक्त लाभों का समग्र योग लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देती है और बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की उनकी क्षमता बढ़ाती है।

ऊर्जा दक्षता के संवर्द्धन की योजनाएँ

Schemes for Promotion of Energy Efficiency
  1. लघु एवं मध्यम उद्यम में ऊर्जा दक्षता योजना

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) से जारी ऊर्जा बचत उपकरणों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें।

तदनुसार, लघु एवं मध्यम उद्यम सिडबी की वित्तीय योजना का लाभ उठा सकते हैं, जिससे ऊर्जा बचत उपकरणों में एमएसएमई निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकता है।

ऊर्जा बचत परियोजनाओं के लिए सिडबी की वित्तीयन योजना के लिए यहाँ क्लिक करें।

बीईई 28 लघु एवं मध्यम उद्यम समूहों में ऊर्जा दक्षता के अवसरों के बारे में सूचना के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यशालाएँ आयोजित कर रहाइसके अलावा, बीईई ने ऐसे ऊर्जा बचत उपकरणों की सूची तैयार की है, जिनका भारत में लघु एवं मध्यम उद्यम उपयोग कर सकते हैं। स सूची में उपकरणों का विवरण, उनके लाभ, संदर्भ, आदि दिया गया है।

2. बचत लैम्प योजना

लघु उद्योग सीडीएम-गतिविधि कार्यक्रम (एसएससी-पीओए) के बारे में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
 

बचत लैम्प योजना एक स्वैच्छिक सीएफ़एल प्रकाश योजना है, जिसका परिचालन और क्रियान्वयन लघु उद्योग सीडीएम-गतिविधि कार्यक्रम (एसएससी-पीओए) के अधीन, बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के सहयोग से, बीईई करता है। यह योजना ऊर्जा के दक्ष उपयोग का रूपायन और संवर्द्धन करने तथा ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के नवोन्मेषी वित्तपोषण को प्रोत्साहित करने वाले “भारतीय ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001’’ के अधीन बीईई को प्रदत्त शक्तियों का परिणाम माना जाता है। इस योजना की कुछ चुनिंदा विशेषताएँ निम्नवत् हैं :

  • योजना में उद्दीप्त लैंप के बदले में आवासीय परिवारों को एसएससी-पीओए के माध्यम से गुणवत्तायुक्त, दीर्घायु (लंबे समय तक चलने वाले), सेल्फ़-बैलस्टेड सीएफ़एल का 15 रुपये की क़ीमत पर वितरण किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत सीएफ़एल की क़ीमत बाज़ार में लगभग 80 से 130 रुपये की क़ीमत से काफी कम है।  
  • उन सीएफ़एल को एकत्र करने और उनका निपटान करने का दायित्व एसएससी-पीओए के क्रियान्वयनकर्ताओं का होगा, जो अपना जीवनकाल पूर्ण कर चुके हैं या जो परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान अपनी आयु से पहले ही खराब हो गए हैं। 
  • दीर्घायु सीएफ़एल आईएस 15111 मानक से कहीं अधिक अपेक्षाओं पूरी करते हैं, जिसके अनुसार नियत जीवनकाल न्यूनतम 6000 घंटे होता है। 
  • सेल्फ़-बैलस्टेड सीएफ़एल सामान्यत: 2.4 या 6 लघु फ्लोरसेन्ट ट्यूब होते हैं, जो बैलस्ट से जुड़े आधार पर लगे होते हैं और इनकी क्षमता 51 से 56 एसएम/वॉट होती है, जो इसी प्रकार के आईसीएल की तुलना में चार से पाँच गुना है।  

3. मानक एवं लैबलिंग योजना

इस योजना का उद्देश्य ग्राहक को ऊर्जा बचत और तदनुसार बाज़ार में उपलब्ध घरेलू सामानों एवं अन्य उपकरणों की लागत-बचत क्षमताओं के बारे में सुविचारित चुनाव का अवसर प्रदान करना है। यह योजना मई, 2006 में शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत उपकरणों एवं सामानों, जैसे – फ़्रॉस्ट-फ़्री ऱेफ़्रिजेरेटर, ट्युबुलर फ़्लोरसेन्ट लैंप, रूम एअर कंडीशनर, प्रत्यक्ष शीचलन रेफ्रिजरेटर, वितरण ट्रांसफ़ॉर्मर, इंडक्शन मोटर, पंपसेट, छत के पंखे, एलपीजी, इलेक्ट्रिक गीज़र, और टीवी के लिए तालिका में दी गई अनिवार्य एवं स्वैच्छिक योजनाएँ शामिल हैं। 

योजना के अंतर्गत परिभाषित उद्योग मानकों के लिए लेबलिंग अपेक्षाओं का तालिकाबद्ध सार देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

4. ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (कोड) (तारांकन कार्यक्रम)

बीपीओ भवनों और कार्यालय भवनों के लिए तारांकन योजनाओं (स्टार रेटिंग स्कीमें) तथा तदनुरूपी पात्रता मानदंड के लिंक वाली तालिका देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

बीईई ने बीपीओ, कार्यालय भवनों, विद्यालयों, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा होटलों (तालिका 3 देखें) के वाणिज्यिक भवनों को तारांकन उपलब्ध कराने से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की है। तारांकन कार्यक्रम में भवनों की ऊर्जा दक्षता के निष्पादन का परिकलन कर एक से पाँच के मानदंड पर श्रेणीनिर्धारण (तारांकन) किया जाएगा, जिसमें पाँच तारे वाला भवन सर्वाधिक ऊर्जा दक्ष होगा।  

5. राज्यस्तरीय निर्दिष्ट एजेन्सियों (एसडीए) की सांस्थिक क्षमता का सुदृढ़ीकरण

बीईई ने राज्यस्तरीय निर्दिष्ट एजेन्सियाँ नियत की हैं, जो ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के समन्वय, विनियमन और प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं।

राज्यस्तरीय निर्दिष्ट एजेन्सियों के बारे में “पृष्ठभूमि नोट” के लिए यहाँ क्लिक करें।

राज्यस्तरीय निर्दिष्ट एजेन्सियों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें।