भारत सरकार की ओर से ऊर्जा दक्षता पर कार्रवाई

Energy Efficiency by the Government of India

भारत में, भारत सरकार ने विभिन्न कानूनों और विनियमों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता संबंधी कार्यक्रम शुरू किए हैं। ये कानून और विनियम पिछले 20 वर्षों में क्रमश: लागू के गए हैं। इस अवधि के दौरान लागू कुछ निर्देशी कानून एवं विनियम नीचे दिए गए हैं, जो व्यवसायों के नियमित परिचालनों में ऊर्जा दक्ष विधियाँ अपनाए जाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने में सहायक रहे हैं :

  • वार्षिक रिपोर्ट में कंपनी स्तर की ऊर्जा दक्षता के बारे में सूचना प्रकट करना, ताकि पर्यावरणीय लागत और लाभ तथा देश में संबद्ध अंशदान का पता लगाया जा सके।

   स्रोत: “कॉर्पोरेट एन्विरॉनमेन्ट रिपोर्टिंग ऑन इंटरनेट – एन इनसाइट इनटू इंडियन प्रैक्टिसेस”

  • ऊर्जा दक्षता और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण के लिए त्वरित मूल्यह्रास
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन जो त्वरित मूल्यह्रास का उपयोग न करने वाले उन व्यवसायों को प्रोत्साहन उपलब्ध कराने पर केंद्रित है, जिनका पवन बिजली परियोजनाओं से जुड़ा ग्रिड एसईसी दरों पर ग्रिड को बिजली की बिक्री के लिए स्थापित किया गया है और उत्पादक अंतर्गृहीत बिजली परियोजनाओं में संलग्न होते हैं।  .

स्रोत: ए प्रेजेन्टेशन ऑन जेनरेशन बेस्ड इंसेन्टिव्स (जीबीआई)

  • ऊर्जा संरक्षम कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और निगरानी करने तथा ऊर्जा दक्षता के बारे में नीतिगत दिशानिर्देश एवं सलाह उपलब्ध कराने के लिए ऊर्जा मंत्रालय के अधीन (स्वायत्त) ऊर्जा प्रबंध केंद्र की स्थापना।

स्रोत: ऊर्जा मंत्रालय, वार्षिक रिपोर्ट, 2001-02

  • मूल्य एवं उत्पादन नियंत्रण की समाप्ति, ताकि औद्योगिक प्रतिस्पर्द्धा को प्रोत्साहित किया जा सके।
  • ऊर्जा मूल्य सुधार, ताकि ऊर्जा दक्षता संबंधी गतिविधियों का मार्गदर्शन किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धी क्षमता को बढ़ावा दिया जा सके।  
  • राज्य-स्तरीय ऊर्जा संरक्षण निधियों का गठन, जो कई उद्योगों में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने में राज्य को समर्थ बनाते हैं।
  • 50% लागत साझेदारी के माध्यम से ऊर्जा लेखापरीक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए भिन्न-भिन्न योजनाएँ
  • ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिए “विस्तृत परियोजना रिपोर्टें” बनाने को बढ़ावा देने के लिए अनुदान निधियाँ  
  • सौर्य गृह-जल ताप प्रणालियों की संस्थापना के लिए प्रोत्साहन  
  • ऊर्जा दक्षता प्रमाणन के व्यापार का अधिकार देना, जिससे व्यवसायों के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्द्धा प्रोत्साहित होती है।
  • एलायन्स फ़ॉर एनर्ज़ी एफ़िसिएन्ट इकोनॉमी(एईईई) नामक का उद्योग संघ का गठन, जिसकी स्थापना भारत के ऊर्जा दक्ष उद्योगों एवं सेवा-प्रदाताओं के बीच सहयोग सुकर बनाने के लिए किया गया, ताकि वे नीतिगत अनुसंधान एवं हिमायती संगठन के रूप में संगठित हो सकें और उसके माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में सरकार की ऊर्जा संरक्षण व ऊर्जा दक्षता संबंधी नीति के कार्यान्वयन, बाज़ार विकास तथा ऊर्जा दक्षता संबंधी सुधारों के क्रियान्वयन में सहयोग करे।
  • ऊर्जा मंत्रालय के अधीन उन  ऊर्जा सेवा कंपनियों (ईएससीओ) को नामसूचीबद्ध करने की शुरूआत, जो ऊर्जा दक्षता संबंधी गतिविधियों का निष्पादन करती हैं।


उपर्युक्त सरकारी गतिविधियाँ मुख्यत: भारत में ऊर्जा दक्षता प्रणालियाँ और पद्धतियाँ आरंभ करने के लिए शुरू की गई गतिविधियाँ दर्शाती हैं। इनमें से अधिकतर गतिविधियों का इस नोट में निर्दिष्ट विभिन्न मानको, योजनाओं और प्रमाणन में भी परीक्षण किया गया है।  

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