दस्तावेज़ी अपेक्षाएँ

 

एअर-वे बिल


एअर-वे बिल वायुमार्ग से सामानों के लदान/प्रेषण का प्रमाण है। एअर-वे बिल लदान के लिए माल प्राप्त होने का प्रमाण होता है, मलभाड़े का बीजक होता है, बीमा का प्रमाणपत्र होता है, पारेषण की सँभलाई, प्रेषण एवं सुपुर्दगी के बारे में एअरलाइन के कर्मचारियों के लिए दिशानिर्देश होता है। किसी एअर-वे बिल में निम्नलिखित शामिल होते हैं:

  • परेषक और परेषिती का विवरण
  • प्रस्थान एवं गंतव्य हवाईअड्डा
  • सामान का विवरण (भार, माप या नौ-परिवहन चिह्न)
  • उस पर वास्तविक वाहक/जहाज कंपनी या नामांकित एजेन्ट या नामांकित वाहक/जहाज कंपनी के हस्ताक्षर और दिनांक अनिवार्यत: अंकित होने चाहिए।
  • उस पर यह भी अंकित होना चाहिए कि मालभाड़ा अदा कर दिया गया है या गंतव्य स्थल पर अदा किया जाएगा।

विनिमय बिल


विनिमय बिल एक विशेष प्रकार का लिखित दस्तावेज़ है, जिसके अंतर्गत निर्यातक एक ऐसी निश्चित रक़म की माँग कर रहा होता है, जिसका भुगतान आयातक भविष्य में करेगा और आयातक उक्त राशि परस्पर सहमत तिथि को या उससे पहले निर्यातक को अदा करने की सहमति भी देता है। इस दस्तावेज़ का ऐसे थोक व्यापार में विशेष महत्त्व होता है, जिनमें बड़ी रक़म शामिल होती है।  


विनिमय बिल में निम्नलिखित व्यक्ति संलग्न होते हैं :

  • आहर्ता : वह व्यक्ति, जो बिल लिखता या तैयार करता है।
  • अदाकर्ता : वह व्यक्ति, जो बिल का भुगतान करता है।
  • आदाता : वह व्यक्ति, जिसे भुगतान किया जाना होगा।
  • बिलधारक : वह व्यक्ति, जिसके कब्ज़े में बिल रहता है।l

देयतिथियों के आधार पर, विनिमय बिल दो प्रकार के होते हैं:

  • तिथि-पश्चात् विनिमय बिल: इस मामले में, देयतिथि आहरण की तिथि से गिनी जाती है और इसे तिथि-पश्चात् बिल भी कहा जाता है।
  • दर्शनी-पश्चात् विनिमय बिल: इस मामले में, देयतिथि की गणना बिल की स्वीकृति की तिथि से की जाती है और इसे दर्शनी-पश्चात् बिल भी कहते हैं।

लदान बिल


लदान बिल वह दस्तावेज़ है, जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन के लिए लादे गए सामानों के लिए नौ-परिवहन एजेन्सी देती है और उस पर वाहक पोत का प्रतिनिधि हस्ताक्षर करता है।


लदान बिल में शामिल मुख्य पक्ष निम्नलिखित होते हैं :

  • नौभार परेषक : व्यक्ति, जो सामान भेजता है।
  • परेषिती : व्यक्ति जो सामानों की सुपुर्दगी लेता है।
  • अधिसूचन पार्टी : व्यक्ति, सामान्यत: आयातक, जिसे नौ-परिवहन कंपनी या उसका एजेन्ट सामान पहुँचने की सूचना देता है।
  • वाहक : व्यक्ति या कंपनी, जिसने सामानों के परिवहन के लिए परेषक से संविदा निष्पादित की है।

लदान बिल में उधार और साथ ही साथ यूसीपी 500 के अनुपालन की सभी अपेक्षाएँ पूरी होनी चाहिए। ये निम्नवत् हैं :

  • परेषक, परेषिती और अधिसूचन पार्टी का सही-सही विवरण
  • वाहत पोत और लादने एवं उतारे जाने वाले बंदरगाह
  • प्राप्ति का स्थान और सुपुर्दगी का स्थान
  • विवरण कि मालभाड़ा अदा कर दिया गया है या गंतव्य पर अदा किया जाना है।
  • बिल की तिथि उधार की शर्तों में विनिर्दिष्ट लदान की अंतिम तिथि या उससे पहले की होनी चाहिए।
  • वाहक का वास्तविक नाम अंकित हो या नामांकित वाहक के एजेन्ट के रूप में हस्ताक्षर होना चाहिए।

उद्-गम प्रमाणपत्र


उद्गम प्रमाणपत्र आयातक देश के सीमा-शुल्क विभाग के प्राधिकारियों द्वारा अपेक्षित होता है, ताकि वे सामान पर आयात शुल्क लगा सकें। इसे सामान्यत: चैम्बर ऑफ़ कामर्स जारी करता है और उसमें चैम्बर की मुहर, परिवहन किए जाने वाले सामानों का विवरण, आदि सूचनाएँ शामिल होती हैं।


प्रमाणपत्र में यह वे सभी सूचनाएं उपलब्ध होनी चाहिए, जो उधार की शर्तों के अनुसार आवश्यक होती हैं और वे अन्य सभी दस्तावेज़ों के साथ सुसंगत होने चाहिए। इसमें सामान्यत: निम्नलिखित शामिल होते हैं :

  • निर्यातक के रूप में कंपनी का नाम और पता
  • आयातक का नाम
  • पैकेज़ संख्या, नौ-परिवहन चिह्न और सामान का विवरण, जो अन्य दस्तावेज़ों के साथ मेल खाता हो।
  • यदि की भार या माप दी गई हो, तो वह अन्य दस्तावेज़ों में दिए गए भार या माप से पूरी तरह मेल खानी चाहिए। .
  • उस पर चैम्बर ऑफ़ कामर्स के हस्ताक्षर एवं मुहर लगी होनी चाहिए।


वाणिज्यिक बीजक


वाणिज्यिक बीजक वह दस्तावेज़ है, जो विक्रेता क्रेता को उपलब्ध कराता है। इसे निर्यात बीजक या आयात बीजक भी कहते हैं। वाणिज्यिक बीजक का उपयोग कराधान के प्रयोजन से सामान का मूल्यांकन करने के लिए आयातक देश के सीमा-शुल्क प्राधिकारी करते हैं।


बीजक में निम्नलिखित अवश्य शामिल होने चाहिए:

  • ऋण में नामांकित लाभग्राही (विक्रेता) द्वारा जारी हो।
  • ऋण के आवेदक (क्रेता) को संबोधित हो।
  • सामानों का ठीक वही विवरण शामिल हो, जो ऋण में वर्णित है।
  • मूल प्रति की निर्दिष्ट संख्या में प्रतियों के साथ जारी किया गया हो (मूल प्रति पर “मूल-प्रति” अंकित होना आवश्यक है।
  • उसमें मूल्य और यदि उपयुक्त हो, तो यूनिट मूल्य शामिल हो।
  • उसमें देय मूल्य राशि अंकित हो, जो ऋण में दी गई राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • उसमें नौ-परिवहन की शर्तें शामिल हों।

बीमा प्रमाणपत्र


इसे बीमा पॉलिसी के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रमाणित करता है कि परिवहन के जाने वाले सामान खुली पॉलिसी के अंतर्गत बीमाकृत हैं और वाद-योग्य नहीं हैं। साथ में शामिल जोखिमों का संक्षिप्त विवरण भी दिया गया हो।


यह आवश्यक है कि बीमा के प्रभावी होने की तिथि परिवहन दस्तावेज़ जारी किए जाने वाली तिथि या उससे पहले की हो।


साथ ही, यदि उसे साखपत्र के अधीन प्रस्तुत किया गया हो, तो बीमाकृत राशि उसी मुद्रा में होनी चाहिए, जिसमें ऋण है और बीमा सामान्यत: बिल राशि + 10 प्रतिशत राशि का होना चाहिए।


कोई बीमा पॉलिसी पूरी करने की अपेक्षाएँ निम्नवत् हैं :

  • उस पक्ष का नाम, जिसके नाम में दस्तावेज़ जारी किए गए हैं।
  • पोत का नाम या फ़्लाइट का विवरण
  • स्थान जहाँ से बीमा शुरू होता है, सामान्यत: विक्रेता का मालगोदाम या लदान का बंदरगाह तथा स्थान जहाँ बीमा समाप्त होता है, सामान्यत: क्रेता का मालगोदाम या गंतव्य बंदरगाह।
  • बीमा मूल्य, जो ऋण में विनिर्दिष्ट है।
  • चिह्न और संख्याएँ वही होनी चाहिए, जो अन्य दस्तावेज़ों में अंकित हैं।
  • सामानों का विवरण, जो ऋण में दिए गए और बीजक पर अंकित विवरण से मेल खाना चाहिए।
  • दावा निपटान करने वाले एजेन्ट का नाम और पता तथा साथ में वह स्थान जहाँ दावे देय हों।
  • जहाँ-कहीं आवश्यक हो, प्रतिहस्ताक्षर किए जाने चाहिए।
  • जारी करने की तिथि परिवहन दस्तावेज़ों की तिथि के बाद की नहीं होनी चाहिए, जब तक कि कवर उस तिथि से पहले से प्रभावी न दिखाया गया हो।

निरीक्षण प्रमाणपत्र


निरीक्षण प्रमाणपत्र वह दस्तावेज़ है, जो विक्रेता के अनुरोध पर तैयार किया जाता है, जब वह यह चाहता है कि परिवहन से पूर्व सामानों को मुहरबंद करने से पहले, लदान वाले बंदरगाह पर प्रेषित माल की जाँच कोई तृतीय पक्ष करे।


इस प्रक्रिया में, विक्रेता व्यापार संबंधी अन्य दस्तावेज़ों, जैसे बीजक, पैकिंग सूची, नौ-परिवहन बिल, लदान बिल, आदि के साथ एक वैध निरीक्षण प्रमाणपत्र बैंक को बातचीत/मोलभाव के लिए प्रस्तुत करता है।

माँग किए जाने पर, निरीक्षण का कार्य विश्व की ख्यातिप्राप्त निरीक्षण एजेन्सियाँ नाममात्र के शुल्क पर कर सकती हैं।


साखपत्र


इंटरनेशनल चैम्बर ऑफ़ कामर्स ने यूनीफ़ॉर्म कस्टम ऐंड प्रैक्टिस फ़ॉर डॉक्यूमेन्ट्री क्रेडिट में साखपत्र की परिभाषा निम्नवत् दी है :


"कोई व्यवस्था, चाहे उसका कोई नाम हो या कोई वर्णन किया गया हो, जिसके द्वारा कोई बैंक (जारीकर्ता बैंक) किसी ग्राहक (आवेदक) के या उसकी ओर से के गए अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए और उसके अनुदेशों पर :

  • किसी तृतीय पक्ष (लाभग्राही) को भुगतान करता है या उसे आदेश करता है या लाभग्राही द्वारा आहरित विनिमय बिल स्वीकार करता है।  
  • किसी अन्य बैंक को ऐसे भुगतान करने के लिए या ऐसे विनिमय बिल (प्रारूप) स्वीकार करने और भुगतान करने के लिए प्राधिकृत करता है।
  • उपलब्ध कराए गए निर्धारित दस्तावेज़ों के प्रति यह बातचीत करने के लिए किसी अन्य बैंक को प्राधिकृत करता है कि शर्तों का अनुपालन किया जाए।


साखपत्र का आधारभूत मुख्य सिद्धांत यह है कि बैंक केवल दस्तावेज़ों के साथ संव्यवहार करता है न कि सामानों में। किसी साखपत्र के अधीन भुगतान करने का निर्णय पूरी तरह से इस बात पर आधारित होता है कि क्या बैंक को प्रस्तुत दस्तावेज़ में अंकित विवरण पूरी तरह साखपत्र की शर्तों के अनुरूप हैं।

पैकिंग सूची


इसे पैकेज़िंग विशिष्टताओं के नाम से भी जाना जाता है। इसमें सामानों के नौपरिवहन में प्रयुक्त पैकिंग सामग्री का विवरण शामिल होता है। इसमें सामानों का भार या माप भी अंकित होती है।  


पैकिंग सूची में निम्नलिखित अवश्य होने चाहिए :

  • सामानों (“ए”) का विवरण, जो अन्य दस्तावेज़ों के साथ सुसंगत हो।
  • नौ-परिवहन चिह्न (“बी”) एवं संख्याएँ, जो अन्य दस्तावेज़ों के साथ सुसंगत हो।

www.infodriveindia.com से लिया गया।

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