ऊर्जा दक्षता - आवश्यकता और लाभ

Needs & Benefits of Energy Efficiency

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सीमित संसाधनों तथा सीमित परिचालन मार्जिनों के कारण नाजुक स्थिति में होते हैं। बढ़ती हुई ऊर्जा लागत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की उत्पादन तथा वितरण लागत को और बढ़ा सकती है। इस प्रकार उनकी दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता तथा लाभप्रदता घटती है। ऊर्जा लागत में कमी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की उत्पादन तथा वितरण लागत घटाने में सहायक हो सकती है। तथापि, भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में ऊर्जा दक्षता सुधारों तथा अवसरों को चिह्नित करने के लिए ज्ञान, वित्तपोषण तथा एकनिष्ठ कार्मिकों की कमी है। ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं में मोटे तौर पर उत्पादन प्रक्रियाओं, ऊर्जा-उत्पादन प्रक्रियाओं तथा कार्यस्थल पर ऊर्जा उपयोग के विनियमन में सुधारों का समावेश होता है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्य़म उद्यमों में ऊर्जा दक्षता कार्यान्वित करने के कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं :

  • बेहतर कर्मचारी उत्पादकता - हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए हवा के तापमान को नियंत्रित करने तथा उच्च दक्षता प्रकाश व्यवस्था संस्थापित करने से उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा - आवासीय, वाणिज्यिक और/अथवा औद्योगिक इकाइयों में ऊर्जा दक्षता प्रणालियाँ लगाने से ऐसी अनुकूल स्थितियाँ बन सकती हैं, जो वहां के लोगों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से अहानिकर हों।
  • बेहतर उत्पाद गुणवत्ता - ऊर्जा दक्षता उपकरणों में बड़े निवेश से ऊर्जा लागत में बचत हो सकती है और लंबे समय तक चलने वाले निवेशों की लागत का प्रतिफल कम समय में ही मिलने लगता है और इस प्रकार व्यावसायिक इकाई में उत्पाद गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
  • पर्यावरणिक प्रभाव - ऊर्जा दक्ष उपकरणों के जरिए होने वाले जीएचजी उत्सर्जन की जांच भारत में सभी संगत व्यावसायिक मानकों पर की जाती है। तदनुसार, जीएचजी उत्सर्जन काफी सीमित रहा है।
  • प्रतिस्पर्धात्मकता - उपर्युक्त लाभों का समग्र योग लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देती है और बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की उनकी क्षमता बढ़ाती है।