एमएसएमई श्रेणीनिर्धारण

MSME Rating

 

श्रेणीनिर्धारण के लाभ

  • ऋण सुपात्रता के बारे में तृतीय पक्ष का स्वतंत्र मूल्यांकन : इससे सुप्रसिद्ध स्वतंत्र एजेन्सियों से गुणवत्ता का प्रमाण मिल जाता है।
  • निधीयन प्राप्त करने के लिए बेहतर स्थिति : इससे बैंकों, ऋणदाताओं और वित्तीय संस्थाओं में स्वीकार्यता बढ़ती है और सस्ती दर पर शीघ्रता से ऋण प्राप्त करने में मदद मिलती है। इसके परिणामस्वरूप संपार्श्विक प्रतिभूति की अपेक्षाओं में कमी आती है तथा उधार की शर्तें सरल हो जाती हैं।
  • मूल्यवर्द्धन श्रृंखला के भागीदारों में विश्वास बढ़ना : श्रेणीनिर्धारण से खरीदारों, आपूर्तिकर्ताओं और सहयोगकर्ताओं में साख स्थापित करने में मदद मिलती है। इससे अन्य जोखिमधारकों के साथ बेहतर शर्तों के लिए मोलभाव/बातचीत में मदद मिलती है।
  • न्यूनतम मानकों का निर्धारण : श्रेणीनिर्धारण से अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों को वित्तीय एवं गैर-वित्तीय मानदंडों के संदर्भ में अपने प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में अपनी स्थिति पहचानने में मदद मिलती है। इससे न्यूनतम मानकों के निर्धारण मदद मिलती है और उनमें और अधिक सुधार के अवसर प्राप्त होते हैं।
  • ब्रांड निर्माण : स्वतंत्र एजेन्सी के श्रेणीनिर्धारण से विभिन्न जोखिमधारकों, जैसे - खरीदारों, आपूर्तिकर्ताओं और सहयोगकर्ताओं/संयुक्त उद्यम के भागीदारों, आदि की नज़रों में एमएसएमई की पहचान में सुधार होता है।
  • ब्याजदर का लाभ : कुछ बैंक /वित्तीय संस्थाएँ एसएमई रेटिंग एजेन्सी ऑफ़ इंडिया लि. (स्मेरा) से श्रेणीनिर्धारण प्राप्त एमएसएमई को ब्याजदरों में छूट देती हैं।

प्ररूपी श्रेणीनिर्धारण प्रक्रिया

सामान्य रूप से, सूचना प्राप्त होने से लेकर श्रेणीनिर्धारण प्रदान किए जाने तक की संपूर्ण प्रक्रिया में दो से चार सप्ताह का समय लगता है। एक प्ररूपी श्रणीनिर्धारण प्रक्रिया में निम्नलिखित चरम शामिल होते हैं :

  1. श्रेणीनिर्धारण के लिए अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम का अनुरोध
  2. वित्तीय एवं प्रबंधकीय सूचनाओं का प्रस्तुतीकरण
  3. कार्यदायित्व और विस्तृत प्रश्नावली को अंतिम रूप देना
  4. कार्यस्थल का दौरा एवं प्रबंधतंत्र से चर्चा
  5. गहन विश्लेषण, उद्योगगत अनुसंधान और प्रारूप रिपोर्ट
  6. श्रेणीनिर्धारण समिति के समक्ष प्रस्तावित श्रेणीनिर्धारण
  7. अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम को श्रेणीनिर्धारण की सूचना देना
  8. श्रेणीनिर्धारण समिति के समक्ष अपील
  9. अंतिम रिपोर्ट का प्रकाशन

श्रेणीनिर्धारण प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज़ *

  • लघु उद्योग पंजीकरण प्रमाणपत्र /उद्यमी ज्ञापन
  • संस्था के अंतर्नियम एवं बहिर्नियम
  • पिछले तीन वर्ष के लेखापरीक्षित लेखे
  • परियोजना रिपोर्ट, जिसमें परियोजना की रूपरेखा, परियोजना लागत, वित्तीयन संरचना (केवल नई परियोजनाओं के लिए) शामिल हो
  • संयंत्र एवं मशीनों, आदि का बीमा संबंधी विवरण
  • उत्पादों की सूची, तकनीकी एवं वितरण /विपणन सहयोग (यदि की हो), अंतिम उपयोगकर्ता-वर्ग, हस्तगत/प्राप्त क्रय-आदेश, आदि का विवरण
  • संयंत्र स्थापना, उपकरण /मशीनों, समयबद्ध कार्यक्रम, आदि के बारे में विवरण
  • उपलब्ध कर रियायत, सब्सिडी (यदि की हो)
  • बैंकों से उपलब्ध ऋण/उधार सुविधा से संबद्ध अग्रिम का स्वरूप और प्रदत्त प्रतिभूति
  • गुणवत्ता प्रमाणन, कोई पुरस्कार जीता हो, निर्यात विवरण
  • एमएसएमई और बैंक के बीच हुए संव्यवहार के विवरण सहित बैंकर की रिपोर्ट (गोपनीय)

* टिप्पणी: यह सूची निर्देशात्मक है और विभिन्न एजेन्सियों के लिए भिन्न-भिन्न होती है।

श्रेणीनिर्धारण एजेन्सी से संपर्क करना

श्रेणीनिर्धारण एजेन्सी से ऑनलाइन संपर्क किया जा सकता है। इच्छुक व्यक्ति फ़ॉर्म डाउनलोड कर, उसे भरकर तथा आवश्यक दस्तावेज़ संलग्न कर अपेक्षित शुल्क के साथ एजेन्सी को भेज सकता है। इसके अलावा, कोई एमएसएमई एजेन्सी के कार्यालय से संपर्क कर सकता है, क्योंकि अधिकतर एजेन्सियों के प्रमुख नगरों में कार्यालय मौजूद हैं। श्रेणीनिर्धारण एजेन्सियाँ अपनी वेबसाइट, विक्रय कार्यालय और प्रतिनिधियों के नेटवर्क के माध्यम से श्रेणी-2 और श्रेणी-3 के नगरों में भी अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों तक अपनी पहुँच रखती है।

श्रेणीनिर्धारण के उपयोग एवं वैधता

नियत श्रेणीनिर्धारण जारी के जाने की तिथि से विशिष्टत: एक वर्ष के लिए वैध होता है, बशर्ते उस अवधि के दौरान की ऐसा महत्त्वपूर्ण परिवर्तन /घटना न घटी हो, जिसका संगठन /परियोजना के व्यवसाय और वित्तीय मापदंडों पर वस्तुत: पड़ सकता हो। सामान्यत: यह सिफारिश की जाती है कि इकाइयाँ अपना श्रेणीनिर्धारण वार्षिक आधार पर नवीकृत कराएँ।

नियत श्रेणीनिर्धारण निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा सकती है:

  • ऋण-सुपात्रता स्थापित करने के लिए बैंक, ऋणदाता और वित्तीय संस्थाओं को प्रस्तुत करना
  • संपार्श्विक प्रतिभूति की अपेक्षाओं, ऋण की शर्तों और ब्याजदर के लिए मोलभाव/बातचीत करने में
  • खरीदारों, आपूर्तिकर्ताओं और तकनीकी सहयोगकर्ताओं तथा संयुक्त उद्यम के भागीदारों की नज़रों में साख /प्रतिष्ठा स्थापित करने में
  • कंपनी की सबलताएँ /दुर्बलताएँ तथा सुधार वाले क्षेत्र पहचानने में
  • उद्योग-विशेष में प्रचलित सर्वोत्तम प्रक्रियाओं की पहचान करने में / पता लगाने में
  • विदेशी व्यवसाय भागीदारों के साथ संपर्क स्थापित करने में

एमएसएमई श्रेणीनिर्धारण के बारे में भ्रांतियाँ

भ्रांति 1: ऋणदाता और बैंक अक्सर एमएसएमई उद्यमों को उनके छोटे आकार और गैर-मानकीकृत प्रक्रियाओं के कारण हेय श्रेणी का समझते हैं।

वास्तविकता : क्रिसिल के आँकड़ों के अनुसार, पहली पीढ़ी के उद्यमियों के समर्थन से चलने वाली कंपनियों की ऐसी अच्छी संख्या है, जिनकी व्यवसाय काफी सुदृढ़ है और उन्होंने मज़बूत ब्रांड निर्मित किए हैं तथा बड़ी वैश्विक कंपनियों सहित देशीय कंपनियों की प्रतिस्पर्द्धा का सामना करने की क्षमता सिद्ध की है। ऐसी कंपनियों को उच्च श्रेणीनिर्धारण प्राप्त हुआ है और वे रियायती दरों पर वित्त प्राप्त करने में समर्थ हुई हैं।    

भ्रांति 2: अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) आम तौर पर व्यवसाय के संबंध में विश्वसनीय वित्तीय एवं गैर-वित्तीय सूचनाएँ उपलब्ध नहीं कराते हैं।

वास्तविकता: अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) श्रेणीनिर्धारण प्राप्त होने से होने वाले मूर्त लाभ समझते हैं और इसलिए अपेक्षित सूचनाएँ उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहते हैं। इसके अलावा, एमएसएमई उद्यमों की एक बड़ी संख्या है, जो बड़े घरेलू एवं विदेशी व्यवसायियों के साथ लेनदेन करते हैं और वे उच्च गुणवत्ता वाली सटीक वित्तीय एवं व्यवसाय संबंधी सूचनाओं का रखरखाव करते हैं। इन लघु एवं मध्यम उद्यमों को अक्सर उच्च श्रेणीनिर्धारण प्राप्त होता है।  

भ्रांति 3: एमएसएमई के लिए, श्रेणीनिर्धारण ऋणदाताओं से अनुकूल शर्तों का लाभ लेने का एक साधन मात्र है।

वास्तविकता: श्रेणीनिर्धारण एमएसएमई व्यवसायों के लिए एक रिपोर्ट-कार्ड हैं, जो उनकी सबलताएँ और दुर्बलताएँ दर्शाता है। इससे एमएसएमई को अपने प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में अपनी स्थिति और सुधार के क्षेत्र पहचानने में मदद मिलती है। फिर, श्रेणीनिर्धारण से अपने-आप कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है, बल्कि यह एक साधन मात्र है और इसकी प्रभाविता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यवसाय भागीदारों के साथ मोलभाव/बातचीत करते समय इसका कैसे प्रयोग किया जाता है। इसके माध्यम से अत्यधिक लाभ मिलने की संभावनाएँ मौजूद हैं।

भ्रांति 4: किसी लघु एवं मध्यम उद्यम को प्राप्त श्रेणीनिर्धारण ऋणदात्री संस्थाओं के आंतरिक श्रेणीनिर्धारण को प्रतिस्थापित कर सकता है।

वास्तविकता: एजेन्सियों से प्राप्त श्रेणीनिर्धारण ऋणदात्री संस्थाओं के आंतरिक श्रेणीनिर्धारण को प्रतिस्थापित करेगा। ऋणदात्री संस्थाएँ अपने आंतरिक श्रेणीनिर्धारण के आधार पर प्रतिनिधि ब्याजदर का आकलन करते हैं। अनेक एमएसएमई अपने आंतरिक श्रेणीनिर्धारण से अनभिज्ञ होते हैं और यदि उसकी जानकारी होती भी हैं, तो ऐसे श्रेणीनिर्धारण पर पहुँचने के आधार से अनजान रहते हैं। श्रेणीनिर्धारण एजेन्सियों से प्राप्त बाह्य श्रेणीनिर्धारण के संबंध में एमएसएमई उधारकर्ता को न केवल श्रेणीनिर्धारण की जानकारी होती है, बल्कि एक बाहरी दृष्टिकोण से उसके आकलन का आधार भी पता होता है, जिससे उसे प्रतिस्पर्द्धी बढ़त प्राप्त होती है। इस जानकारी से एमएसएमई अपने आंतरिक श्रेणीनिर्धारण में सुधार भी कर सकता है और ऋणदाता वर्ग से बेहतर शर्तों का लाभ उठाने का प्रयास भी सकता है।