अपना अनुरोध प्रस्तुत करना

Presenting Your Request

आप किसी बैंक या ऋणदात्री संस्था से किस प्रकार संपर्क करते हैं, यह सर्वाधिक महत्त्पूर्ण है। यहाँ कुछ युक्तियाँ दी जा रही हैं। इनमें से अधिकतर सामान्य ज्ञान पर आधारित उपाय हैं और आपको सदैव विनम्रता /शिष्टाचार एवं खुलेपन के मूल सिद्धांत का पालन करना चाहिए।

यह जानें कि आप किसके साथ संव्यवहार कर रहे हैं।

यदि आप पहले से संस्था के ग्राहक नहीं हैं और उसे अच्छी तरह से नहीं जानते हैं, तो संस्था के बारे में जो कुछ भी जानकारी आप प्राप्त कर सकते हैं, उसे अग्रिम रूप से प्राप्त करें। अपने व्यापार संघ, चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स, या स्थानीय उद्योग परिसंघ से उसके बारे में सलाह प्राप्त करें। संस्था की वार्षिक रिपोर्ट की प्रति प्राप्त करने का प्रयास करें और उसकी संबद्धता, शेयरधारकों एवं निदेशकों के बारे में समीक्षा करें। बैंकों और अन्य संस्थाओं में विवरणिकाएँ (ब्रोशर) और वार्षिक रिपोर्टें बे-रोकटोक उपलब्ध रहती हैं। इनसे उनकी संरचना, संगठन और सेवाओं के बारे में काफी जानकारी मिलती है। बैंक अपनी उधार दरें भी इंगित करते हैं और अपने सेवा-प्रभार एवं शुल्क संबंधी सारणी भी देते हैं।

अपने आशय के बारे में पहले ही सूचना दें

पहले से ही मुलाक़ात के लिए कॉल कर समय लें या पत्र लिखें यौ फ़ैक्स भेजें, जिसमें अपने बारे में और अपने पेशे के बारे में संक्षिप्त जानकारी दें तथा यह भी इंगित करें कि आप कितना ऋण लेना चाहते हैं और क्यों। यद्यपि आप अपना संव्यवहार पत्राचार के माध्यम से भी कर सकते हैं, किंतु यह सामान्यत: बेहतर होगा कि आप अल्पावधि वाणिज्यिक उधार या व्यापार वित्त के प्रभारी व्यक्ति से मुलाक़ात करें। यदि संस्था काफी दूर है, तो जाहिर है यह संभव नहीं होग, ऐसी स्थिति में आप इस बात के लिए विशेष रूप से सावधानी रखें कि आप अपना परिचय कैसे करवाते हैं और आप क्या जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

अच्छी तरह से तैयारी करें

आपका बैंकर एक व्यस्त व्यक्ति है और उसे आपके अनुरोध का स्वरूप तेज़ी से समझनी होती है : इसले आप शीघ्रता से अपने मुख्य विषय पर आएँ। यह बताएँ कि आप कौन हैं, आपका व्यवसाय क्या है, आप कितनी राशि चाहते हैं और किस प्रयोजन से वह राशि चाहते हैं। अपनी वार्षिक रिपोर्ट (यदि आप प्रकाशित करते हैं) या वित्तीय विवरण (तुलनपत्र, लाभ-हानि लेखा, बज़ट, व्यवसाय योजना) और साथ ही अपनी कंपनी की विवरणिका (ब्रोशर) उपलब्ध कराने के लिए तैयार रखें। यह स्पष्ट रूप से बताएँ कि आप उधार ली जाने वाली निधियों का क्या करना चाहते हैं। यदि आप वित्त का उपयोग सामान या निर्यात के लिए उत्पाद विनिर्माण हेतु आवश्यक सामग्री (या निर्यात के लिए उत्पादकों से उपयोग-योग्य माल) खरीदने के लिए करना चाहते हैं, तो अपने बैंकर को पूरी जानकरी /विवरण बताएँ – जैसे – आप किससे खरीद रहे हैं, आप किसे बेच रहे हैं, आप कैसे भुगतान करेंगे या भुगतान प्राप्त करेंगे। अपने आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों के साथ संविदा या करार पर हस्ताक्षर करने या भुगतान व्यवस्था करने से पहले इन सभी मामलों के बारे में अपने बैंक को बताएँ।

सलाह लें

अनुभवी बैंकर विभिन्न भुगतान विधियों के जोखिम, संव्यवहारों के लिए वित्तीयन के उचित माध्यम तथा आपके ऋण के प्रति गारंटी के रूप में उपलब्ध कराई जोने वाली प्रतिभूतियों के बारे में आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं और आपको सलाह दे सकते हैं। मुद्रा एवं मूल्य के उचार-चढ़ाव के जोखिम के लिए या उन्हें कम करने के लिए प्रतिरक्षा/बचाव व्यवस्था की संभावनाओं के बारे में पूछना न भूलें।    

सतर्क रहें

अत्यधिक लंबी अवधि या अत्यधिक ऊँची ब्याजदर पर अपनी आवश्यकता से अधिक ऋण लेने से बचें। कभी-कभी बैंक उस प्रकार के ऋणों या भुगतान विधियों का प्रस्ताव करते हैं, जिनसे वे परिचित होते हैं, जो अधिक लाभकारी होते हैं या जो सबसं कम जोखिम वाले होते हैं। लागत के बारे में पूछें।  यह याद रखें कि ब्याजदर के अलावा भी अन्य लागतें, शुल्क एवं प्रभार होते हैं। अग्रशुल्क क्या है? (ये वे भुगतान हैं, जो बैंक/ऋणदाता आपके अनुरोध का मूल्यांकन करने, जोखिम का निर्धारण करने या खाता खोलने की अपनी लागत के रूप में ऋण के पहले संवितरण में से काट लेता है)। संसाधक कार्यालय(बैक-ऑफ़िस) शुल्क क्या है? जो प्रत्येक संवितरण पर लगाया जाता है। यदि विदेशीमुद्रा खरीदने या कोई दस्तावेज़ी साख खोलने के लिए बैंक अग्रिम का उपयोग करता है, तो उसकी लागत क्या होगी?

अधिकतर संस्थाओं में उनकी सेवाओं के लिए मानक या परिवर्तनीय (स्लाइडिंग) दरें होती हैं। उसकी एक प्रति माँगने से न झिझकें। साथ ही यह मार्गदर्शन भी प्राप्त करें कि वे दरें आपके संव्यवहारों को कैसे प्रभावित करेंगी। यदि कोई विधिक लागत हो,, जैसे ऋण संविदा के प्रारूपण या किसी आस्ति या डिबेन्चर पर भार का पंजीकरण कराने के लिए अधिवक्ता का शुल्क, तो अपनी प्रतिबद्धता देने से पहले उनके बारे में स्पष्टीकरण प्राप्त करें।   

अन्य बैंकों में पूछताछ करने से बचें

सर्वोत्तम सौदे के चक्कर में अनेक बैंकों /ऋणदाताओं से बार-बार पूछताछ, अनेक संस्थाओं के दौरे और तुलना करने से बचें, क्योंकि बैंकर आपके इस बर्ताव को पसंद नहीं करेंगे। यदि बैंकर ने आपके साथ घंटों व्यतीय के हों, दस्तावेज़ीकरण तैयार किए हों और अपनी ऋम समितियों, वरिष्ठ प्रबंधतंत्र या निदेशक मंडल से ऋण के लिए अनुमति प्राप्त कर ली हो और उसके बाद आप यह कहते हैं कि आपको अन्य कहीं बेहतर सौदा मिल गया है, तो आप उनका समय व्यर्थ कर दिया है। वस्तुत: बैंकिंग क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करने और सर्वोत्तम सौदा करने में कोई गलत बात नहीं है, किंतु बातचीत के उस स्तर तक पहुँच जाने के बाद, जहाँ यथार्थ रूप में करार को अंतिम रूप दिया जा चुका हो और प्रबंधतंत्र या निदेशक मंडल का अनुमोदन प्रतीक्षित हो, तब आप यह दर्शाने का प्रयास न करें कि आप अन्य संस्थाओं से भी बातचीत कर रहे हैं। उधारकर्ता और ऋणदाता के बीच अच्छे संबंध की सफलता मुख्यत: विश्वास पर टिकी होती है। विश्वास समय के साथ बढ़ता है और यह सकारात्मक अनुभव पर आधारित होता है। कोई भी बैंकर अक्सर अत्यंत अल्पावधि के छोटे और भली-भाँति प्रतिभूत ऋण देकर संभावित ग्राहक का परीक्षण करने का प्रयास करता है कि देखें यह कितना सफल होता है। जैस-जैसे संव्यवहार सफलतापूर्वक दोहराए जाते हैं, ग्राहक की प्रतिष्ठा बढ़ती जाती है और उसका ऋण बढ़ता है। जब आप किसी संस्था से पहली बार संपर्क करते हैं, तो इसे ध्यान में रखें। सबसे सस्ता ऋणदाता दीर्घावधि में सबसे अच्छा सिद्ध नहीं हो सकता है।

स्रोत: - इंटरनेशनल ट्रेड सेन्टर (जेनेवा) और सिडबी का संयुक्त प्रकाशन, 2002 - हाउ टु एप्रोच बैंक्स इन इंडिया? से उद्धरण