वेंचर कैपिटल

Venture Capital for MSMEs

वेचर कैपिटल लघु और मध्यम आकार की फर्मों के लिए, खासकर व्यवसाय शुरू करने और व्यवसाय को विस्तार देने के लिए फाइनेन्स के एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहा है। उद्यमी आम तौर पर अपने धन से और बैंकों से उधार लिए गए धन से व्यवसाय शुरू करते हैं। एक्स्पैंशन के समय उनको धन जुटाने में कठिनाई होती है। लघू और मध्यम उद्यम विस्तार के लिए और कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए परंपरागत रूप से बैंकों पर निर्भर रहते आए हैं। किन्तु पिछले कुछ समय में मंदी के कारण गैर निष्पादक आस्तियों (एनपीए) का जोखिम बढ़ जाने की वजह से बैंकों ने लघु एवं मध्यम उद्यमों को उधार देना कम कर दिया है। इस प्रकार कई लघु एवं मध्यम उद्यमों की परियोजनाओं व एक्स्पैंशन योजनाओं के लाभप्रद होने के बावजूद उनको अपनी परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने में कठिनाई होती है, क्योंकि उच्च जोखिम वाली परियोजनाओं में बैंक धन नहीं लगाना चाहते।

इस तरह की उद्यमी प्रतिभा और व्यवसाय कौशल के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से वेंचर कैपिटल की अवधारणा अस्तित्व में आई है। तेजी से विकसित हो रही प्राइवेट कंपनियों के लिए वेंचर कैपिटल ईक्विटी फाइनेन्स का एक साधन है। कंपनी शुरू करने, उसके विस्तार अथवा कंपनी खरीदने के लिए वित्त की जरूरत होती है। वेंचर कैपिटलिस्टों में विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल होते हैं। वे परियोजना की ध्यानपूर्वक जाँच करने के बाद इन फर्मों को निधियाँ (जिनको वेंचर कैपिटल फंड कहते हैं) देते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अपने निवेश पर अधिक से अधिक प्रतिलाभ पाना होता है। लेकिन उनके तौर-तरीके परंपरागत साहूकारों से अलग होते हैं। वे कंपनी के प्रबंधन में सक्रियता से भाग लेते हैं और अच्छे बैंकर, टेक्नोलॉजिस्ट, प्लैनर व प्रबंधक के रूप में विशेषज्ञता-युक्त व गुणवत्तापूर्ण सेवा देते हैं।

भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए वेंचर कैपिटल

परंपरागत रूप से भारत में वेंचर कैपिटलिस्ट एमएसएमई क्षेत्र से बचे हुए हैं। भारत के अधिसंख्य एमएसएमई के गैर-निगमित ढाँचे और छोटे आकार और लेन-देन की लागत ऊँची होने तथा ऐसे निवेश से एग्जिट में कठिनाई के कारण के कारण वेंचर कैपिटलिस्ट और प्राइवेट ईक्विटी प्लेयर उनमें निवेश करने के लिए अनिच्छुक रहते हैं। किन्तु भारत में वेंचर कैपिटल का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। भारत के एमएसएमई क्षेत्र में वेंचर कैपिटल जैसी फंडिंग का चलन बढ़ रहा है। साथ ही, वेंचर कैपिटल अपनी पहुँच का विस्तार परंपरागत वेंचर कैपिटल क्षेत्रों जैसे सूचना प्रौद्योगिकी से आगे तक कर रहे हैं। आजकल स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल, औषधि-निर्माण, खुदरा व्यापार, मीडिया आदि क्षेत्रों में भी रुचि बढ़ रही है।

हाल के वर्षों में सरकार-नियंत्रित वित्तीय संस्थाओं ने एमएसएमई को उचित और वहन करने योग्य लागत पर तथा आम तौर पर आनेवाली कठिनाइयों के बिना निधियों तक पहुँचने के लिए सकारात्मक व प्रगतिशील उपाय आरंभ किए हैं। कम लागत पर निधियाँ लाने, जोखिम शेयर करने और प्रबंधन व प्रौद्योगिकी उन्नयन में इन उद्यमों को सहायता करने के लिए वेंचर कैपिटल फंडिंग संस्थाएं आरंभ की गई है। राष्ट्रीय व राज्य, दोनों स्तरों पर सरकार से निधि-प्राप्त योजनाएं मौजूद हैं। वे अपैक्षाकृत छोटी होती हैं- वे 50 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की नहीं होतीं।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) वेंचर कैपिटल परिचालनों में लगी हुई सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख वित्तीय संस्था है। सिडबी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था सिडबी वेंचर कैपिटल लिमिटेड (एसवीसीएल) SIDBI Venture Capital Limited (SVCL). के माध्यम से काम करता है। यह राज्य-स्तरीय निधियों का सह-वित्तीयन करता है और कभी-कभी किसी-किसी मामले में प्राइवेट क्षेत्र के वेंचर कैपिटल में सह-निवेश करता है।

2006 से कुछ नए वेंचर कैपिटल एसएमई स्तर पर चल रहे हैं, जैसे हेलियन वेंचर पार्टनर्स, इरैस्मिक वेंचर फंड (ऐक्सेल इंडिया वेंचर फंड), सीड फंड और अपस्ट्रीम वेंचर्स ( Helion Venture Partners, Erasmic Venture Fund (Accel India Venture Fund), SeedFund, and Upstream Ventures.) हालांकि निवेश के लिए प्रौद्योगिकी क्षेत्र की माँग सबसे अधिक है, किन्तु इन्टरनेट कंपनियों से अन्य प्रकार के परिचालनों की और- विशेषकर आईसीटी सक्षम सेवाओं और बायोटेक्नोलॉजी की और रुझान बढ़ा है। कुछ वेंचर कैपिटल शुरुआती चरण में भी चल रहे हैं, जैसे इरैस्मिक वेंचर फंड, सीड फंड, इन्फिटी वेंचर, आईएफआई प्रायोजित सुविधाएँ जैसे स्विस टेक वीसीएफ और सरकार की योजनाएं जैसे सिडबी वेंचर कैपिटल और गुजरात वेंचर कैपिटल।

शुरुआती चरण के वेंचर कैपिटल में सौदे का आकार छोटा और खास तौर से 10 से 30 लाख डॉलर की रेज में रहता है। किन्तु वे 5 लाख डॉलर के निशान से नीचे बहुत कम ही जाते हैं, जहाँ वित्तीय की माँग बहुत अधिक है किन्तु अवसर बहुत कम। छोटे निवेश के संभावित स्रोत सार्वजनिक क्षेत्र की स्थानीय सुविधाएं, बिजनेस ऐंजल, बिजनेस इन्क्यूबेटर निधियाँ और अपवाद स्वरूप मामलों में बीज वेंचर कैपिटल निधियाँ जैसे आविष्कार इंडिया माइक्रो वेंचर कैपिटल फंड Aavishkaar India Micro Venture Capital Fund (AIMVCF) आदि माइक्रो वेंचर योजनाएं. हैं।

निधीयन के अन्य तरीकों की तुलना में वेंचर कैपिटल के लाभ

वित्तीयन के दूसरे रूपों की तुलना में वेंचर कैपिटल के कई लाभ हैः

  • यह दीर्घकालिक ईक्विटी फाइनेन्स लाता है, जिससे भविष्य के विकास के लिए ठोस पूँजी-आधार मिलता है।
  •  वेंचर कैपिटल एक व्यवसायिक हिस्सेदार है जो जोखिम और फायदे, दोनों में हिस्सेदारी करता है। वेंचर कैपिटलिस्ट को व्यवसायिक सफलता और पूंजीगत लाभ प्राप्त होते हैं।
  • वेंचर कैपिटलिस्ट कंपनी को व्यावहारिक सलाह और सहायता दे पाता है, जो इसी तरह की परिस्थितियों वाली दूसरी कंपनियों से मिले अनुभव पर आधारित होती है।
  • वेंचर कैपिटलिस्ट के पास कई क्षेत्रों के संपर्कों का नेटवर्क होता है जो कंपनी के लिए मुख्य-मुख्य कार्मिकों की भर्ती करने, अंतरराष्ट्रीय बाजार से सूत्र जोड़ने, रणनीतिक भागीदारों को लाने और यदि जरूरत हो तो वित्तीयन के अतिरिक्त राउंड की आवश्यकता होने पर दूसरी वेंचर कैपिटल फर्मों के साथ संपर्क जोड़ने में मूल्यवान साबित हो सकता है।.

 

भारत के वेंचर कैपिटल फंड

भारत में वेंचर कैपिटल फंड निम्नलिखित समूहों में वर्गीकृत किए जा सकते हैं:-
 

  • केन्द्र सरकार के नियंत्रण वाली विकास संस्थाओं द्वारा प्रवर्तित जैसेः

 

और सरकारी वेंचर कैपिटल निधियों के लिए यहाँ क्लिक करें click here.
 

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा प्रवर्तित जैसेः

भारतीय बैंकों की और अधिक वेंचर कैपिटल निधियों के लिए यहाँ क्लिक करें click here.

 

  • प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों द्वारा प्रवर्तित, जैसे:

 

 

भारत में, सभी पंजीकृत वेंचर कैपिटल निधियों की सूची के लिए यहाँ क्लिक करें, click here

 

वेंचर कैपिटल कैसे प्राप्त करें?

वेंचर कैपिटल निधीयन पाने के लिए जानना होता है- कौन सा वेंचर कैपिटल उचित रहेगा और उस तक कैसे पहुँचें?

वेंचर कैपिटलों की नजर में आने का सबसे अच्छा तरीका है उनको जाननेवालों में से किसी की संस्तुति पाना। यदि आप कर पाएं तो किसी वाणिज्य बैंक से सलाह लें और आपको परिचित कराने को कहें। किन्तु निधीयन की तलाश में निकले ज्यादातर उद्यमी शायद इतने भाग्यशाली न हों। यहीं नेटवर्किंग काम आती है। टाई जैसे संगठन ऐसे नेटवर्किंग अवसर प्रदान करते हैं जिनका उद्यमियों को पूरा लाभ लेना चाहिए।

इन जैसे ऐंजल इन्वेस्टमेंट नेटवर्क की मदद लें:

ऐसे वेंचर कैपिटलिस्ट को चुनना आवश्यक है जिसके साथ अच्छे कामकाजी संबंध रखना संभव हो। आम तौर पर व्यवसाय अपनी कैश-फ्लो भविष्यवाणियों को पूरा नहीं कर पाते और उन्हें अतिरिक्त निधियों की जरूरत होती है, इसलिए यदि अतिरिक्त फाइनेंसिंग राउंडों में निवेश करने की जरूरत हो तो उसके लिए निवेशक की क्षमता भी महत्त्वपूर्ण है।. अंततः वेंचर कैपिटलिस्ट चुनते समय उद्यमी को केवल निवेश की राशि और शर्तों पर विचार नहीं करना चाहिए, बल्कि वेंचर कैपिटलिस्ट कंपनी में जो अतिरिक्त मूल्य ला सकता है उस पर भी विचार करना चाहिए। इन कौशलों में उद्योग की जानकारी, निधि जुटाना, वित्तीयन और रणनीतिक योजना का निर्माण, मुख्य-मुख्य कार्मिकों की भर्ती, विलयन तथा अधिग्रहण और अंतरराष्ट्रीय बाजारों व प्रौद्योगिकी तक पहुँच भी शामिल है।

एक बार जब वेंचर कैपिटलिस्टों की संक्षिप्त सूची बन जाए, तब उद्यमी को उन निवेशकों की पहचान करनी चाहिए जो उसकी निधिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इस बिन्दु पर उद्यमी को वेंचर कैपिटल फर्म और निवेश प्रबंधक से शुरुआती संपर्क बिन्दु के रूप में संपर्क करना चाहिए।

 

फंडिंग की तलाश में हैं?

  • आप इंडियन इन्वेस्टमेंट नेटवर्क Indian Investment Network, पर जानकारी ले सकते हैं जो स्थानीय उद्यमियों को भारतीय व अंतरराष्ट्रीय ऐंजल इन्वेस्टर्स से जोड़ने का एक ऑनलाइन प्लैटफॉर्म है।
  •  आप इंडियन वेंचर कैपिटल ऐसोसिएशन को भी अपनी जरूरत बता सकते हैं। अपने ब्यौरे देने के लिए http://www.indiavca.org/Guest_Book.aspx पर जाएं।.

अपने व्यवसाय के लिए वेंचर कैपिटल फंड जुटाने के बारे में पंकज सहाय की किताब “Smooth Ride to Venture Capital”, पढ़ें। किताब की विषयवस्तु पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें. Click here

 

वेंचर कैपिटल क्या चाहते हैं?

वेंचर कैपिटलिस्ट ऊंची जोखिम वाले निवेशक होते हैं और इन जोखिमों को स्वीकार करने में उनकी इच्छा रहती है कि अपने निवेश पर उनको ऊँचा प्रतिलाभ मिले।  वेंचर कैपिटलिस्ट केवल ऐसे व्यवसायों में निवेश करके जोखिम/लाभ अनुपात को मैनेज करते हैं जो उनके निवेश मानदंड में फिट होते हैं। वह पर्याप्त सम्यक सावधानी के पश्चात निवेश करते हैं।

वेंचर कैपिटलिस्टों की परिचालन पद्धतियाँ अलग-अलग होती हैं। ये अंतर व्यवसाय के स्थान, निवेश के आकार, कंपनी की स्टेज, उद्योग विशेषज्ञता, निवेश की संरचना और कंपनी की गतिविधियों में वेंटर कैपिटलिस्टों के इन्वॉल्वमेंट से संबंधित हो सकते हैं।

निवेश की जानेवाली भावी कंपनियों वेंचर कैपिटल फर्म उत्पाद अथवा सेवा, बाजार विश्लेषण, कंपनी के परिचालन, अपेक्षित निवेश और उसके उपयोग, वित्तीय अनुमान के बारे में जानकारी माँगेगी और सबसे महत्वपूर्ण यह कि वह प्रबंधन टीम के बारे में सवाल पूछेगी।

ऊपर बताए गए सभी सवालों के जवाब बिजनेस प्लान में होने चाहिए। यदि यह माना जाए कि वेंचर कैपिटलिस्ट निवेश के अवसर में रुचि दर्शाता है, तो अच्छे बिजनेस प्लान का होना एक पूर्वापेक्षा है। बिजनेस प्लान तैयार करने के बारे में और अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें। click here.

स्रोत

  • Business Portal of India
  • Financing Technology Entrepreneurs & SMEs in Developing Countries: Challenges and Opportunities – India Country Study, an infoDev publication
  • India Venture Capital AssociationNeytri.com