ऑटो घटक

Auto Components

ऑटो घटक उद्योग भारत के विनिर्माण क्षेत्र के तेजी से बढते वगों में से एक है । इस उद्योग ने भारतीय बाजार को घटकों के एक लघु आपूर्तिकर्ता से लेकर घरेलू व अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में एक बडा हिस्‍सेदार बनने तक का एक लंबा सफर तय किया है । आटो घटक क्षेत्र भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के कई उद्योगों का बड़ा सहायक है जिनमें ऑटोमोबाइल, मशीन टूल, स्‍टील, एलुमिनियम, रबर, प्‍लास्टिक, इलेक्‍ट्रानिक्‍स, फोर्जिंग व मशीनिंग शामिल है ।

वित्‍त वर्ष 2009 के दौरान, इस उद्योग का कुल टर्नओवर लगभग 87700 करोड़ रुपए रहा, जो गत वर्ष की तुलना 6% की वृद्धि दर दर्शाता है । वित्‍त वर्ष 2009 में, ऑटो घटकों के कुल निर्यात लगभग 8% बढ़कर 17450 करोड रुपए हो गए । कुल टर्नओवर के प्रतिशत के रूप में निर्यातों का प्रतिशत, वित्‍त वर्ष 2008 के 19.6% की तुलना में इस वर्ष 19.9% रहा । यूरोप, उत्‍तरअमेरिका व एशिया भारत के ऑटो घटकों के उच्‍च तीन निर्यात केंद्र रहे, जिनका वित्‍त वर्ष 2008 में कुल हिस्‍सा 81% रहा । इनमें वित्‍त वर्ष 2008 में, यूरोप की सबसे अधिक हिस्‍सेदारी 44% रही, जिसके बाद उत्‍तर अमेरिका (22%) और एशिया (15%) का स्‍थान है । ऑटो घटकों के आयात मजबूत रहे और इसमें लगभग 30% की वर्षानुवर्ष वृद्धि होकर यह 31230 करोड़ रुपए हो गए ।

जहां तक निवेशों का संबंध है, भारत सरकार क्षेत्र में विदेशी निवेशों को प्रोत्‍साहित कर रही है । कुछ नीतिगत प्रयासों में शामिल हैं ; ऑटोमोबाइल व घटकों के विनिर्माण हेतु 100% तक के विदेशी इक्विटी निवेश के लिए स्‍वत: अनुमोदन, उद्योग का विलाइसेंसीकरण और ऑटों घटकों का मुक्‍त आयात । परिणामस्‍वरूप, इस क्षेत्र के निवेश गत छह वषों में 19.9% के सीएजीआर से बढकर वित्‍त वर्ष 2009 में 35360 करोड रुपए हो गए । तथापि, घरेलू व विदेशी बाजारों में इतनी प्रगति के बावजूद, आटो घटक उद्योग अब भी विघटित है और कुल 584 कंपनियों में से केवल 41 कंपनियों का वार्षिक टर्नओवर 4.6 करोड़ रुपए से अधिक है । इस उद्योग में लघु व मध्‍यम उद्यमों का प्राधान्‍य है, जो देश भर में फैले समूहों में कार्यरत हैं । कुछ उल्‍लेखनीय समूह मध्‍य भारत में इंदौर व पुणे में, पूर्वी भारत में जमशेदपुर व कोलकाता में, उत्‍तर भारत में मानेसर, गुडगांव में व दक्षिण में चेन्‍नै में स्थित हैं ।


भविष्‍य में, भारत को एक वैश्विक आटो घटक केंद्र बनाने की प्रक्रिया में, भारत सरकार का लक्ष्‍य 2016 तक टर्नओवर व निर्यातों को क्रमश: 6.7 लाख करोड़ रुपए और 1.6 लाख करोड रुपए तक बढ़ाना है । जहां तक एसएमई का प्रश्‍न है, गत छह सात वषों में विदेशी कंपनियों, तकनीक व पूंजी का बडी संख्‍या में आगमन से एसएमई को बेहतर तकनीक मिली है, जिससे उत्‍पादकता बढी है । चूंकि सरकार क्षेत्र में नीतिगत प्रयासों के माध्‍यम से विदेशी निवेश बढ़ा रही है और एसएमई को सहायता उपलब्‍ध करा रही है, अत: ऑटो घटक समूहों के अगले तीन से पांच वषों के दौरान मजबूत वृद्धि होने की संभावना है । साथ ही, जैसे जैसे भारत में ऑटों घटकों की मांग बढती है, आटो घटक विनिर्माता एसोसिएशन का मानना है कि क्षमता वृद्धि और नवीन विनिर्माणों हेतु निवेश मांग को देखते हुए बडी मात्रा में बढेंगे ।

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Resources: 

सहायक संगठन

सरकारी निकाय

भारी उद्योग विभाग

उद्योग एसोसिएशन/निकाय

प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्‍थान

इं‍डस इंस्‍टीटयूट ऑफ टेक्‍नॉलॉजी व इंजीनियरिंग

वीआईटी विश्‍वविद्यालय

सर्वोत्‍कृष्‍ट चलन

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भारतीय ऑटो घटक उद्योग में सूचना प्रोद्योगिकी स्‍वीकार्यता ; नासकॉम