इक्विटी सहायता और जोखिम पूंजी

Equity Support

समय से और पर्याप्त निधियों का उचित मूल्य पर न मिल पाना एमएसएमई क्षेत्र के सामने आनेवाली सबसे महत्त्वपूर्ण समस्याओं में से एक है। इस क्षेत्र को बैंक वित्त की कम उपलब्धता के कुछ प्रमुख कारण हैं- उच्च जोखिम अवधारणा, आंकड़ों और बाहरी क्रेडिट रेटिंग की अपर्याप्तता, कमजोर कॉर्पोरेट वित्तीय प्रणालियाँ, शुरुआती चरण में छोटे ऋणों की उच्च ट्रांजेक्शन लागत और एमएसएमई को उधार देनेवाले बैंकों की ऊँची कीमतें। पर्याप्त कोलैटरल की कमी इस क्षेत्र को धन की उपलब्धता को और भी बाधित करती है। ऐसी स्थितियों में एमएसएमई क्षेत्र को जोखिम पूँजी के विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है।

जोखिम पूँजी न केवल शुरुआती कंपनियों बल्कि नवोन्मेषी/ तेजी से बढ़ रही कंपनियों के लिए महत्त्वपूर्ण साधन है। वृद्धि के लिए प्रयासरत कंपनियों के लिए भी यह महत्त्वपूर्ण है। किन्तु विकासशील देशों में जोखिम पूँजी के स्रोत सीमित हैं। ज्यादातर एमएसएमई मालिक के चलाए चलती हैं। औपचारिक संरचनाओं के लिए इनमें बहुत कम रुझान होता है। भारत में ज्यादातर एमएसएमई की संरचना गैर-कॉर्पोरेट होने तथा उनका आकार छोटा होने के कारण वेंचर कैपिटलिस्ट और अन्य जोखिम पूँजी प्रदाता उनमें निवेश करने के अनिच्छुक रहते हैं, क्योंकि उनकी ट्रैंजेक्शन लागत अधिक होती है और ऐसे निवेशों से निकल पाना कठिन होता है। इस प्रकार अलग-अलग आकारों और संरचना वाले एमएसएमई के लिए उचित जोखिम पूँजी उत्पाद तथा फोकस्ड निधियों का होना महत्त्वपूर्ण है।

अंतरराष्ट्रीय रूप से और भारत में एमएसएमई क्षेत्र के लिए उपलब्ध कुछ प्रमुख जोखिम पूँजी विकल्प इस प्रकार हैः

वेंचर कैपिटलः

वेंचर फंड विशेष रूप से ईक्विटी प्रदान करते हैं। वे निश्चित स्रोत से ऋण प्रदान कर भी सकते हैं और नहीं भी। अच्छी गुणवत्तायुक्त वेंचर फंडिंग से कंपनी की क्रेडिट रेटिंग सुधर सकती है, जिससे यह वाणिज्यिक ऋण अथवा अन्य प्रकार का वित्त हासिल कर सकती है। किन्तु एग्जिट में कुछ अपेक्षित समस्याएं रहती हैं जो इन क्षेत्रों में निधियों के आगमन पर असर डाल सकती हैं। इससे एमएसएमई के परिचालन संबंधी लचीलेपन में कमी आपने संभावना आदि भी संभव है।

भारत में वेचर कैपिटल के बारे में और अधिक पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। click here.
 

ऐंजल निवेशक

      ऐंजल्स विशेष रूप से उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्ति होते हैं जो अपनी अतिरिक्त निधियों में कुछ का निवेश नए उद्यमों में करना चाहते हैं। कंपनी के विकास के शुरुआती चरण में वे पूँजी व सलाह का अच्छा स्रोत सिद्ध हो सकते हैं। निवेशक के लिए वे एमएसएमई में शुरुआती चरण में निवेश से उच्च प्रतिलाभ के अवसर लाते हैं। समस्या वाले क्षेत्र हैं- ईक्विटी बिक्री की स्थिति में बाहरी निवेशक लाने में एमएसएमई की अनिच्छा, निवेशक के लिए उच्च जोखिम और एमएसएमई प्रबंधन तथा निवेशक के बीच संबंध टूटने का जोखिम।

भारत में ऐंजल निवेशक नेटवर्क के बारे में और अधिक पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें click here.
 

पब्लिक लिस्टिंग

      अच्छे कामकाज के रिकॉर्ड वाली एमएसएमई सार्वजनिक लिस्टिंग प्रक्रिया के माध्यम से पहले प्रारंभिक पब्लिक ऑफऱ (आईपीओ) के माध्यम से आम जनता से निधियाँ ले सकते हैं। एमएसएमई के लिए चालू आईपीओ रेजीम से शुरुआती चरणों में अन्य प्रकार की जोखिम पूँजी के प्रवेश में मदद मिलेगी। किन्तु आईपीओ का रास्ता केवल बड़े एमएसएमई तक सीमित है, जिनका पिछले कामकाज का सुस्थापित व सुदृढ़ रिकॉर्ड है और बाजार में प्रतिष्ठा है।

इस तरह की जोखिम पूँजी के बारे में और अधिक पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करेंclick here .
 

इन्क्यूबेटर

इन्क्यूबेटर ऐसे सहायता कार्यक्रम हैं जो कई तरह के व्यवसाय सहायता संसाधनों और सेवाओं के माध्यम से उद्यमिता आधारित कंपनियों के सफल विकास और उन्हें आगे लाने के लिए तैयार किए जाते हैं। ये संसाधन/सेवाएं या तो इन्क्यूबेटर में या उसके संपर्कों के नेटवर्क के ज़रिए दी जाती हैं। अनुसंधान और प्रौद्योगिकी पार्कों से अलग हटकर, इन्क्यूबेटर प्रारंभिक और शुरुआती चरण की कंपनियों को समर्पित होते हैं।

इन्क्यूबेटर संभावित उद्यमियों को आरंभिक चरणों में मदद करने के साथ-साथ कई अलग-अलग तरीकों से मदद करते हैं। वे भावी उद्यमी को नेटवर्कों, वाणिज्यिक रुझान रखनेवाली मेंटरिंग आदि से भी मिलवाते हैं।

भारत में सरकार द्वारा संचालित इन्क्यूबेटरों के बारे में और अधिक जानने के लिए क्लिक करें click here .
 

 

जोखिम पूँजी के पूरक

जोखिम पूँजी के कुछ पूरकों का पता एमएसएमई भी लगा सकती हैं। इनमें निम्नलिखित वित्तीय विकल्प शामिल हैं:

ऋण निधि

प्राइवेट पूँजी का इस्तेमाल करके संरचनागत निधियों से सहायता-प्राप्त शुद्ध ऋण निधि का लाभ उठाया जा सकता है।हालांकि एमएसएमई के लिए ऋण योजनाएं पूंजी का एक प्रमुख स्रोत होती हैं, किन्तु आम तौर पर ऋण-दाताओं को कोटैरल चाहिए होता है या वे क्रेडिट स्कोरिंग प्रक्रिया अपनाते हैं, जिसमें शुरुआती कंपनियों से भेदभाव हो सकता है।
 

गारंटी संघ

गारंटी निधियाँ या गारंटी संघ शुल्क लेकर एमएसएमई को गारंटी जारी करते हैं, ताकि वे बाहर से वित्त पा सकें (जो मुख्यतः ऋण आधारित किन्तु ईक्विटी भी होता है)। यह गारंटी जोखिम और प्रशासनिक तथा प्रोसेसिंग लागतों को कवर करने के लिए होता है। इससे एमएसएमई को सुधरी हुई वित्तीय शर्तों पर ऋण के रूप में वित्त लेने तथा ऋणदाता संस्था को जोखिम की मात्रा कम करने में मदद मिलती है। किन्तु ये ऋण जोखिम की आंशिक पूर्ति ही करते हैं और अकसर वित्तीय लिखतों की एक सीमित रेंज पर लागू होते हैं।
एमएसएमई की ऋण गारंटि निधि योजना के बारे में और अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करेंclick here .

अल्प वित्त

अल्प वित्त को विशेष रूप से उस व्यवसाय के लिए बनाया गया है, जिसकी वित्तीय जरूरतें कम हैं। यह सूक्ष्म व्यवसाय आरंभ करने और विकसित करने में बाजार की विफलता को पूरा कर सकता है। किन्तु इसमें ऋण प्रदायगी की लागत अधिक आती है और साथ ही, यह केवल छोटी जरूरतों को पूरा करता है और आम तौर पर इसमें एक समरूपी तथा अच्छे नेटवर्क से जुड़े सामाजिक समूह की जरूरत होती है।

सिडबी की अल्प वित्त योजना के ब्यौरे जानने के लिए यहाँ क्लिक करें, click here