डिजाइन और कार्यान्वयन

Design & Implementation

कार्यनीतिक प्रबंध किसी व्यवसाय के आरंभ अथवा उसके विस्तार, दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मिकाइल ई. पोर्टर के अनुसार, कार्यनीति

  • तुलनात्मक स्थिति के विषय में होती है। किसी कंपनी की अपने बाजार प्रतिस्पर्धियों की तुलना में स्थिति से संबंधित होती है।
  • ग्राहक की निगाह में खुद को अलग दिखाने के विषय में होती है।
  • प्रतिस्पर्धियों द्वारा प्रयुक्त गतिविधियों से भिन्न गतिविधियों के मिश्रण के जरिए मूल्यवत्ता बढ़ाने के विषय में है।

समग्रतः, कार्यनीति को एक सामान्य कार्ययोजना कहा जा सकता है, जिसे फर्म के दीर्घकालिक लक्ष्यों तथा उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तैयार किया जाता है। कार्यनीतिक प्रबंध के तीन घटक हैं - निरूपण, डिजाइन तथा कार्यान्वयन।

 

निरूपण

कार्यनीति डिजाइन करने से पहले, व्यक्ति को व्यवसाय के परिवेश के तत्वों की जानकारी और समझ होनी चाहिए। चाहे नए उद्यम के लिए कार्यनीति डिजाइन करनी हो, चाहे मौजूदा उद्यम के लिए, व्यक्ति को उस व्यावसायिक परिवेश का विश्लेषण करना होगा, जिसमें उद्यम काम कर रहा है / करने वाला है। व्यवसाय निरूपण के लिए कुछ महत्वपूर्ण साधन नीचे दिए गए हैं। नीचे दिए गए साधनों का उपयोग एमएसएमई प्रबंधक द्वारा बाहरी (पेस्टल) तथा आंतरिक (स्वॉट) व्यावसायिक परिवेश के लिए किया जा सकता है।

 

 

साधन Tools

विवरण Description

पेस्टल (PESTEL) विश्लेषण
('पेस्टल विश्लेषण पर टेंपलेट डाउनलोड करें।)

पेस्टल (PESTLE) का अर्थ है  - राजनीतिक, आर्थिक, सामाजशास्त्रीय, प्रौद्योगिकीय, विधिक तथा पर्यावरणिक। वस्तुतः यह किसी संगठन के पर्यावरणीय प्रभावों की लेखापरीक्षा है, जिसका उद्देश्य इस जानकारी से कार्यनीतिक निर्णयन के लिए मार्गदर्शन पाना है।

प्रोइमो-एफ (PRIMO-F)

यह या तो संगठन के भीतर तुलना के लिए सतत ढाँचा प्रदान करता है अथवा किसी पिछले विश्लेषण की तुलना में बेंचमार्क या किसी अन्य संगठनों की सापेक्षता में बैंचमार्क प्रदान करता है।

 

स्वॉट विश्लेषण(SWOT Analysis)
स्वॉट विश्लेषण पर टेंपलेट डाउनलोड करें

यह एक आयोजना-साधन है जिसका प्रयोग किसी परियोजना या व्यवसाय में निहित शक्तियों, कमजोरियों, अवसरों तथा चुनोतियों को समझने के लिए किया जाता है। इसमें व्यवसाय या परियोजना के उद्देश्यों का निर्दिष्ट किया जाना तथा उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अनुकूल तथा प्रतिकूल कारकों को चिह्नित किया जाना शामिल है।

 

डिजाइनिंग

कार्यनीति तैयार करना संगठनात्मक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए उपयुक्त कार्ययोजना निर्धारित करने और इस प्रकार संगठनात्मक उद्देश्य पूरा करने की प्रक्रिया है। यह कार्यनीतिक प्रबंधन प्रक्रिया का दूसरा चरण है, जिसकी परिणति संगठनात्मक लक्ष्यों तथा विनिर्दिष्ट कार्यनीतिक योजना की स्थापना में होती है।

कार्यनीति डिजाइनिंग के तीन पहलू हें - 1) कंपनी कार्यनीति, 2) व्यवसाय स्तरीय कार्यनीति, 3) प्रकार्यात्मक कार्यनीति

1) कंपनी कार्यनीति - कंपनी कार्यनीति संगठन के समग्र कार्यक्षेत्र तथा दिशा संबंधी व्यापक निर्णयों से संबंधित होती है। कंपनी कार्यनीति मूलतः संवृद्धि उद्देश्य के निर्धारण तथा उसकी प्राप्ति हेतु कार्यनीति, व्यवसाय की लाइनों तथा वे व्यवसाय की लाइनें किस तरह परस्पर फिट बैठती हैं आदि से संबंधित होती है। कंपनी स्तर की कार्यनीति के तीन घटकों के बारे में सोचना उपयोगी होगा

  • संवृद्धि अथवा दिशात्मक कार्यनीति - संवृद्धि कार्यनीति क्या होनी चाहिए, स्थिरता के जरिए कटौती से लेकर संवृद्धि की अलग-अलग मात्राएं - और उसे कैसे किया जाए।
  • संविभाग कार्यनीति - व्यवसाय की लाइनों का संविभाग क्या होना चाहिए, जिसकी निहित अपेक्षा यह है कि संकेंद्रण अथवा विविधीकरण की मात्रा पर पुनर्विचार किया जाए
  • पितृसुलभ कार्यनीति - संविभागों के बीच संसाधनों का बँटवारा तथा क्षमताओं और गतिविधियों का प्रबंधन कैसे किया जाए - कहां विशेष बल दिया जाए और व्यवसाय की विभिन्न लाइनों का कितना एकीकरण किया जाए।

 2) प्रतिस्पर्धात्मक कार्यनीति ( इसे व्यवसाय स्तरीय कार्यनीति भी कहा जाता है) - इसमें यह निर्णय किया जाता है कि प्रत्येक व्यवसाय-लाइन अथवा कार्यनीतिक व्यावसायिक इकाई के भीतर कंपनी किस प्रकार प्रतिस्पर्धा करेगी। प्रतिस्पर्धात्मक कार्यनीति पर एक बहुत प्रतिष्ठित अध्ययन पोर्टर का पंच शक्ति विश्लेषण है

 

पोर्टर का पंचशक्ति विश्लेषण

पॉर्टर पंचशक्ति विश्लेषण एक ढांचा है जो उद्योग विश्लेषण तथा व्यवसाय कार्यनीति विकास के लिए माइकल ई. पोर्टर द्वारा विकसित किया गया है। यह औद्योगिक संगठन अर्थशास्त्र के आधार उन पाँच शक्तियों का प्रतिपादन करता है जो प्रतिस्पर्धात्मक तीक्ष्णता और इसलिए बाजार का समग्र आकर्षण निर्धारित करती हैं।  

पोर्टर की चार जेनरिक प्रतिस्पर्धात्मक कार्यनीतियाँ

प्रतिस्पर्धात्मक कार्यनीतियाँ उन तरीकों पर ध्यान केंद्रित करती हैं, जिनसे कंपनी अपने उद्योग में सर्वाधिक संभव लाभपूर्ण स्थिति हासिल कर सकती है ।

 

3) प्रकार्यात्मक कार्यनीति  - प्रकार्यात्मक कार्यनीतियाँ अपेक्षाकृत अल्पकालिक गतिविधियां हैं, जो किसी कंपनी के भीतर प्रत्येक प्रकार्यात्मक क्षेत्र (विपणन, मानव संसाधन, वित्त आदि) करेगा, ताकि व्यापक, दीर्घावधि कंपनी स्तरीय तथा व्य्वसाय स्तरीय कार्यनीतियों को कार्यान्वित किया जा सके। प्रत्येक प्रकार्यात्मक क्षेत्र की कई कार्यनीतिक पसंदें हैं जो समग्र कंपनी कार्यनीतियों के साथ अंतर्क्रिया करती है और वे उनके साथ संगत होनी चाहिए।

 

  • विपणन कार्यनीति का संबंध उत्पाद/सेवा की पसंद और विशेषताओँ, मूल्यन कार्यनीति, लक्ष्य बाजार, वितरण तथा संवर्द्धन प्रतिफल से होता है।
  • वित्तीय कार्यनीति में पूँजी अर्जन, पूँजी आवंटन, लाभांश नीति तथा निवेश और कार्यशील पूंजी प्रंबध शामिल होता है। (अधिक जानकारी के लिए इस वेब पृष्ठ पर नीचे दिए गए "वित्तीय कार्यनीति" संबंधी दस्तावेज को डाउनलोड करें।)
  • उत्पादन अथवा परिचालन प्रकार्यात्मक कार्यनीतियाँ इस विषय में होती हैं कि उत्पाद अथवा सेवाओं का विनिर्माण अथवा सुपुर्दगी कहाँ और कैसे हो, कौन सी प्रौद्योगिकी इस्तेमाल हो, संसाधनों का प्रबंध कैसे हो तथा खरीद एवं आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंध कैसे हों। हाइटैक उद्योगों में फर्मों के लिए आरएंडडी कार्यनीति इतनी महत्वपूर्ण हो सकती है कि कई निर्णय व्यवसाय और यहां तक कि कार्पोरेट स्तर पर लिए जाएंगे। उदाहरण के लिए कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक कार्यनीति में प्रौद्योगिकी की भूमिका तथा प्रौद्योगिकी लीडर अथवा फोलोअर होने संबंधी विकल्प। तथापि इसमें अधिक विशिष्ट निर्णय भी होंगे जो आरएंडडी प्रकार्यात्मक कार्यनीति का हिस्सा होंगे, जैसे - उत्पाद और प्रक्रिया आरएंडडी के बीच तुलनात्मक बल, नई प्रौद्योगिकी कैसे प्राप्त की जाएगी (आंतरिक रूप से विकास अथवा खऱीद, अर्जन, लाइसेन्सिंग, सहयोग के जरिए बाहर से) और आरएंडडी गतिविधियों के विकेंद्रीकरण की मात्रा।
  • मानव संसाधन प्रकार्यात्मक कार्यनीति में अऩके विषय शामिल होते हैं जिनकी सिफारिश मानव संसाधन विभाग द्वारा की जाती है, किंतु जिनमें से अनेक के लिए शीर्ष प्रबंधन का अनुमोदन अपेक्षित होता है। उदाहरण हैं - कार्य के वर्ग और ब्योरे, वेतन औ लाभ, भर्ती, चयन तथा अभिविन्यास, करियर विकास तथा ट्रेनिंग, मूल्यांकन तथा प्रोत्साहन पद्धति, नीतियाँ तथा अनुशासन और प्रबंध/कार्यपालक चयन प्रक्रियाएं (अधिक जानकारी के लिए इस वेब पृष्ठ पर नीचे दिए गए "मानव संसाधन कार्यनीति" दस्तावेज को डाउनलोड करें।)
  • आईडी कार्यनीति संगठन जिस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने जा रहा हो उससे संबधित समग्र उद्देश्यों के विषय़ में होती है। आईसीटी के प्रभावी उपयोग के विषय में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

कार्यान्वयन 

कागज पर अच्छी कार्यनीति विकसित कर लेने पर केवल आधा काम हुआ होता है। कार्यनीति को सतत रूप से कार्यान्वित करने की क्षमता दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है। चुनौती यह है कि कार्यनीति प्रक्रियाओं को निष्पादित किया जाए, कार्यनीति को व्यवसाय सुधार में बदला जाए और इन परिवर्तनों को व्यवासाय परिचालनों में लागू किया जाए ताकि परिणामों में सुधार हो। कार्यनीति कार्यान्वयन में सफल संगठन निम्नलिएखित छह महत्वपूर्ण सहयोगी कारकों का सफल प्रबंधन करते हैं :

 

  • कार्रवाई की योजना बनाना
  • संगठनात्मक ढाँचा
  • मानव संसाधन
  • वार्षिक व्यावसायिक योजना
  • निगरानी और नियंत्रण
  • संपर्क

कार्यानीति कार्यान्वयन पर अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।