तुलनपत्र

एक मानक तुलनपत्र में 3 भाग होते हैं आस्ति, देयताएं और मालिक की पूंजी । आस्तियां पहले लिखी जाती हैं, सामान्‍यत: तरलता के क्रम में (आस्ति की नकदी में तेजी से और बिना मूल्‍य घटे बदलने की क्षमता) । देयताएं आस्तियों के बाद लिखी जाती हैं । आस्ति व देयता का अंतर कंपनी का निवल मूल्‍य या निवल आस्ति दर्शाता है । यह लेखांकन समीकरण से ज्ञात किया जाता है ।

लेखांकन समीकरण को देखने का एक अन्‍य तरीका यह है कि आपकी कंपनी की आस्तियां, देयताओं व मालिक की पुंजी के योग के बराबर होनी चाहिए । यह दर्शाता है कि आस्तियों का वित्‍तीयन किस प्रकार किया गया है , या तो उधार के माध्‍यम से (देयताएं) या मालिक की अपनी पूंजी से ।

तुलनपत्र में सामान्‍यत: आस्तियां एक खंड में और देयताएं व निवल मूल्‍य दूसरे खंड में दर्शाए जाते हैं और ये दोनों खंड बराबर होते हैं ।

नमूना तुलन पत्र  

आस्तियां

रु.

देयताएं

रु.

नकद

25,000

ऋण

10,000

प्राप्‍य खाते 

25,000

देय खाते 

20,000

उपकरण

1,00,000

कुल देयताएं 

30,000

 

 

मालिक की पूंजी 

 

 

 

शेयर

1,00,000

 

 

धारित आय 

20,000

 

 

कुल मालिक की पूंजी 

1,20,000

 

 

 

 

कुल

1,50,000

कुल

1,50,000

 

आस्तियां

सामान्‍यत: आस्तियों का वर्गीकरण चालू या गैर चालू (स्थिर) आस्तियों के रूप में किया जाता है ।

  • चालू आस्तियां - वह अ‍ास्ति, जो 12 माह के अंदर नकदी में बदली जा सके या चालू देयताओं के भुगतान में काम ली जा सके । सामान्‍य उदाहरण हैं : नकदी, प्राप्‍य खाते, अल्‍पावधि निवेश, मालसूची एवं अगले एक वर्ष की भावी सेवाओं हेतु पूर्वदत्‍त व्‍यय ।
  • स्थिर आस्तियां - वह आस्ति जो आसानी से नकदी में नहीं बदली जा सकती । इनकी अवधि 12 माह से अधिक लंबी होती है । सामान्‍य उदाहरण हैं : संपत्ति, प्‍लांट, उपकरण, दीर्घावधि व्‍यय, एवं अमूर्त आस्तियां जैसे कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं पेटेंट । 

देयताएं

                आस्तियों की तरह, देयताएं भी चालू व गैर चालू के रूप में वर्गीकृत की जा सकती हैं । 

  • चालू देयताएं - इनका एक वर्ष के अंदर भुगतान किया जाना होता है । उदाहरण हैं : देय खाते, अल्‍पावधि ऋण, कर, देय वेतन/मजदूरी  एवं अन्‍य ।

  • गैर चालू देयताएं - जो एक वर्ष के भीतर नकदी में न बदलें । उदाहरण हैं : दीर्घावधि ऋण, जारी बांड, दीर्घावधि लीज एवं दीर्घावधि उत्‍पाद, वारंटी । 

मालिक की पूंजी 

लेखांकन समीकरण दर्शाता है कि निवल आस्तियां (आस्तियों में से देयताओं को घटाकर) मालिक की पूंजी के बराबर होनी चाहिए । सामान्‍यत:,  मालिक की पूंजी में निम्‍नांकित शामिल होते हैं : शेयर पूंजी, धारित आय व कोई रिजर्व ।  ये मालिकों द्वारा कंपनी में निवेशित धन को दर्शाते हैं ।