महिलाएँ, अल्पसंख्यक एवं कमज़ोर वर्ग

Women, Minorities and Weaker Sections

केंद्र एवं राज्य सरकारों ने महिलाओं, अल्पसंख्यक एवं अनुसूचित जाति/अनु.जनजाति/अन्य पिछड़े वर्गों को सरलता से वित्त उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएँ चलाई हैं। विशिष्ट योजनाओं के अलावा, सरकार उन्हें विभिन्न अन्य योजनाओं के अधीन विशेष रियायतें भी देती है। 

महिलाओं के लिए योजनाएँ

महिला उद्यमियों के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ, अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाएँ महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन और रियायतें प्रदान करती हैं। उदाहरणार्थ, प्रधानमत्री रोज़गार योजना के अंतर्गत, महिला लाभार्थियों को वरीयता दी जाती है। सरकार ने इस योजना में महिलाओं की भागीदारी सरल बनाने के लिए कई प्रकार की छूट दी हैं। इसी प्रकार, एमएसएमई मंत्रालय के एमएसई समूह विकास कार्यक्रम के अंतर्गत, हार्ड इंटरवेन्शन के मामले में एमएसएमई मंत्रालय का अंशदान कुल परियोजना लागत के 30-80% के बीच होता है, किंतु महिलाओं के स्वामित्व वाले और उनके द्वारा प्रबंध किए जाने वाले समूहों के लिए एमएसएमई मंत्रालय का अंशदान परियोजना लागत का 90% तक होता है। इसी प्रकार, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋम गारंटी निधि योजना के अधीन, प्रदत्त ऋण के लिए सामान्यत: 75% तक गारंटी उपलब्ध होती है, किंतु महिलाओं के स्वामित्व वाले और उनके द्वारा प्रबंध किए जाने वाले अत्यंत लघु एवं लघु उद्यमों के लिए यह गारंटी 80% होती है। भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) भी महिला उद्यमियों के लिए विशेष योजनाओं का कार्यान्वयन करता है।  

महिला उद्यमियों के लिए विशेष योजनाओं में से कुछ का विवरण नीचे दिया गया है :


राष्ट्रीय महिला कोष

राष्ट्रीय महिला ऋण कोष (एनसीएफ़डब्ल्यू), जिसे सामान्यत: राष्ट्रीय महिला कोष के नाम से जाना जाता है, की स्थापना भारत सरकार ने 1993 में की थी। इसकी स्थापना अनौपचारिक क्षेत्र में निर्धन व्यक्तियों की ऋण आवश्यकताएँ तथा महिलाओं की आस्ति आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए की गई थी।  रा.म.कोष अत्यंत लघु उद्यमों की स्थापना सहित विभिन्न गतिविधियों के लिए अल्प वित्त संस्थाओं के माध्यम से अल्प ऋण प्रदान करता है।

महिलाओं के लिए व्यापार संबद्ध उद्यमिता सहायता एवं विकास योजना (ट्रीड)

महिलाओं को उनके अपने उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, सरकार महिलाओं के लिए व्यापार संबद्ध उद्यमिता सहायता एवं विकास योजना चलाती है। इस योजना के अंतर्गत गैर-कृषि गतिविधियों में महिलाओं के उद्यमिता कौशल का विकास कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की परिकल्पना की गई है।  इस योजना के तीन प्रमुख घटक हैं :

  • महिलाओं में उद्यमिता के संवर्द्धन /प्रोत्साहन के लिए गैर-सरकारी संगठनों को कुल परियोजना लागत के 30% तक का सरकारी अनुदान। परियोजना लागत की शेष 70% राशि का वित्तीयन ऋणदात्री संस्था गतिविध चलाने के लिए ऋण के रूप में करती है, जैसा कि परियोजना में निहित है। 
  • महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं / गैर-सरकारी संगठनों को भारत सरकार का अनुदान, बशर्ते ये संस्थाएँ / संगठन भारत सरकार के अनुदान के 25%, पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में 10%, के बराबर राशि अपने अंशदान के रूप में लगाएँ। 
  • सर्वेक्षण, अनुसंधान अध्ययन, मूल्यांकन अध्ययन, प्रशिक्षण मॉड्यूल की डिज़ाइनें तैयार करने, आदि के लिए राष्ट्रीय उद्यमिता विकास संस्थाओं और अन्य प्रतिष्टित संस्थाओं को 5 लाख रुपये तक का भारत सरकार का आवश्यकता-आधारित अनुदान।


प्रधानमंत्री का महिला रोज़गार सृजन कार्यक्रम

भारत सरकार पूरे राष्ट्र में रोज़गार सृजन कार्यक्रम का कार्यान्वयन कर रही है, जिसके अंतर्गत महिलाओं को निम्नलिखित रूप में रियायतें/ छूट दी जाती हैं :

  • शहरी महिला लाभग्राहियों के लिए, 25 प्रतिशत (सामान्य श्रेणी के लिए यह 15% है) की दर से परियोजना लागत की मार्ज़िन राशि, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए यह 35% है(सामान्य श्रेणी के लिए यह 25% है)। 
  • महिला उद्यमियों के मामले में, लाभग्राही का अंशदान परियोजना लागत का 5% होता है, जबकि सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए यह परियोजना लागत का 10% है।
  • महिलाओं तथा अन्य कमज़ोर वर्गों के उधारकर्ताओं के मामले में, बैंक का वित्त परियोजना लागत का 95% होता है, जबकि सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए यह परियोजना लागत का 90% है।


सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई)

सिडबी के सहयोग से भारत सरकार ने इसे स्थापित किया है। यह ट्रस्ट अपनी ऋण गारंटी योजना के अधीन एमएसई को 100 लाख रुपये तक के संपार्श्विक प्रतिभूति से मुक्त ऋणों के लिए ऋण गारंटी उपलब्ध कराता है और महिला उद्यमियों को प्रदत्त ऋणों को विशेष रियायत देता है, अर्थात् उन्हें गारंटी सुरक्षा 80% तक दी जाती है। यथा 31 अगस्त, 2010 को सीजीटीएमएसई ने महिला उद्यमियों के उद्यमों के लिए 2571 करोड़ रुपये की 78400 गारंटियाँ दी हैं, जो कुल गारंटियों का 20% है।

संवर्द्धनशील एवं विकासपरक सहायता

भारत सरकार विभिन्न संवर्द्धनशील एवं विकासपरक सहयोग के माध्यम से महिला उद्यमिता की महती भावना के संवर्द्धन के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

  • एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार विभिन्न प्रशिक्षणों और सहयोग सेवाओं के माध्यम से महिला उद्यमिता, विशेष रूप से प्रथम पीढ़ी की उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त महत्त्व देता है।  इसी प्रकार, राज्य स्तर की विभिन्न विकास संस्थाएँ, बैंक /वित्तीय संस्थाएँ एवं गैर-सरकारी संगठन भी विशेष रूप से महिलाओं के लिए नियमित रूप से उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित करते हैं। ये महिला-केंद्रित कार्यक्रम संभावित महिला उद्यमियों का तकनीकी /प्रबंधकीय ज्ञान एवं कौशल बेहतर बनाते हुए, उन्हें आवश्यकतानुरूप प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किए जाते हैं, ताकि वे विभिन्न क्षेत्रों में एमएसई शुरू कर सकें।  इन कार्यक्रमों को अक्सर सीमांत-पहुँच (आउट-रीच) कार्यक्रम कहा जाता है, क्योंकि ये ग्रामीण /अल्प विकसित क्षेत्रों में आयोजित के जाते हैं। ईएसडीपी/ईडीपी के कुल लक्ष्य में से 22.5% कार्यक्रम केवल अनु.जाति/अनु.जनजाति/महिलाओं और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए आयोजित किए जाते हैं। अनु.जाति/अनु.जनजाति/महिलाओं और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
  • सिडबी भी उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विभिन्न संस्थाओं को सहयोग देता है। यह पाया गया है कि सिडबी से सहायताप्राप्त ईडीपी से निम्नतम स्तर पर अनेक महिला उद्यमियों को अत्यंत लघु उद्यम स्थापित करने में मदद मिली है।
  • विपणन सहायता – एमएसएमई मंत्रालय ने महिला उद्यमियों के लिए एक योजना तैयार की है, ताकि महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाली लघु एवं अत्यंत लघु विनिर्माण इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों /प्रदर्शनियों में एमएसएमई स्टाल के अधीन उद्यमों से व्यापार-संपर्क स्थापित करने और उनका विकास करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके और इस प्रकार ऐसी इकाइयों से निर्यात में वृद्धि की जा सके। इस योजना के अंतर्गत,
    • प्रदर्शनियो में किराया-मुक्त स्थान (6/( वर्ग मीटर) उपलब्ध कराया जाता है।
    • एक प्रतिनिधि के लिए वायुयान से इकोनॉमी किराये की 100% प्रतिपूर्ति। तथापि  समग्र सीमा 1.25 लाख रुपये होगी।


भारत में बैंकों की महिला-केंद्रित वित्तीयन योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए, यहाँ क्लिक करें।

अल्पसंख्यकों के लिए योजनाएँ

अल्पसंख्यकों के लिए अतिरिक्त वित्तीयन एजेन्सी उपलब्ध कराने के लिए, सरकार ने 1994 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम की स्थापना की। यह निगम विभिन्न योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यकों के पिछड़े वर्गों के विकास का संवर्द्धन एवं प्रोत्साहन करता है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम की वित्तीय सहायता योजनाओं में से कुछ निम्नवत् हैं :


राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम की विभिन्न योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें।


तदनुरूपी राज्य स्तरीय माध्यम एजेन्सी के संपर्क विवरण के लिए, यहाँ क्लिक करें।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए योजनाएँ

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम अनुसूचित जाति के उन व्यक्तियों की आर्थिक विकास संबंधी गतिविधियों के लिए वित्तीयन करने, उन्हें अन्य स्रोतों से निधियाँ प्राप्त करने /दिलाने में मदद करने और उनके संवर्द्धन के लिए कार्य करने वाली शीर्ष संस्था है, जो ग़रीबी रेखा से दो गुना नीचे हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम अनुसूचित जातियों के लाभ के लिए वित्तीयन की विभिन्न योजनाएँ चलाता है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की वित्तीय सहायता योजनाओं में से कुछ निम्नवत् हैं :

  • सावधि ऋण
  • अल्प ऋण वित्त
  • शिल्पी समृद्धि योजना
  • महिला समृद्धि योजना
  • महिला किसान योजना


उपर्युक्त वित्तीयन योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें।

तदनुरूपी राज्य स्तरीय माध्यम एजेन्सी के संपर्क विवरण के लिए, यहाँ क्लिक करें।

अन्य पिछड़ी जातियों के लिए योजनाएँ

राष्ट्रीय पिछड़ी जाति वित्त एवं विकास निगम, जो एक सरकारी उपक्रम है, इन जातियों के निर्धन वर्ग को राज्य-स्तरीय माध्यम एजेन्सियों और राज्य-स्तरीय माध्यम एजेन्सियों /स्व-सहायता समूहों के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है, ताकि कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों, लघु व्यवसाय, कारीगरी एवं परंपरागत पेशों, तकनीकी एवं व्यवसायी व्यापार /पाठ्यक्रमों, परिवहन और सेवा क्षेत्र, आदि के क्षेत्र में इन जातियों के निर्धन वर्ग के कौशल विकास एवं स्वरोज़गार उद्यमों को सहायता देते हुए उनकी व्यापक आय-उपार्जक गतिविधियों को सहायता दी जा सके।


राष्ट्रीय पिछड़ी जाति वित्त एवं विकास निगम की विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाएँ निम्नवत् हैं :

  • सावधि ऋण/मार्ज़िन राशि ऋण
    • महिलाओं के लिए नई स्वर्णिम विशेष योजना
    • नई आकांक्षा नामक शिक्षा ऋण योजना  
    • स्वयं सक्षम
  • अल्प वित्त योजनाएँ
    • महिला समृद्धि योजना


राष्ट्रीय पिछड़ी जाति वित्त एवं विकास निगम की उपर्युक्त वित्तीयन योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें।


तदनुरूपी राज्य स्तरीय माध्यम एजेन्सी के संपर्क विवरण के लिए, यहाँ क्लिक करें।

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