अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए सरकारी प्रोत्साहन

Government Promotion for MSME

चूँकि भारत में कृषि के बाद, एमएसएमई क्षेत्र रोज़गार उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है, अत: भारत सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए सक्रिय रूप से रुचि ले रही है। इस क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता में सुधार के लिए, भारत सरकार एमएसएमई उद्यमियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करती है कि वे अपना श्रेणीनिर्धारण कराएँ। इससे एमएसएमई को ऋणदाताओं से बेहतर ऋण सुविधाएँ प्राप्त करने में मदद मिलेगी और साथ ही उन्हें अपनी साख /प्रतिष्ठा स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

 
सरकार ने एक सब्सिडी योजना शुरू की है, जिसमें राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम श्रेणीनिर्धारण शुल्क के एक अंश की प्रतिपूर्ति करता है। इस योजना के अनुसार, नामित श्रेणीनिर्धारण एजेन्सी को श्रेणीनिर्धारण के लिए दिए गए शुल्क के प्रति 75% तक प्रतिपूर्ति की जाती है, किंतु इस प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक की कुल बिक्री वाले उद्यमों के लिए 25000 रुपये, 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक की कुल बिक्री वाले उद्यमों के लिए 30000 रुपये और 2 करोड़ से रुपये अधिक की कुल बिक्री वाले उद्यमों के लिए 40000 रुपये है।  यह योजना एमएसएमई को इस बात के लिए प्रोत्साहित करती है कि वे अपना श्रेणीनिर्धारण कराएँ। यह सब्सिडी केवल पहले वर्ष के लिए उपलब्ध है। नवीकरण के लिए, एमएसएमई को खुद श्रेणीनिर्धारण एजेन्सी को भुगतान करना होगा। भारत के श्रेणीनिर्धारण बाज़ार की कुछ प्रमुख एजेन्सियों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की “कार्यनिष्पादन एवं श्रेणीनिर्धारण योजना” के विवरण के लिए यहाँ क्लिक करें।