ब्याजदर संबंधी लाभ

Interest Rate Benefits

सरकार एवं सार्वजनिक संस्थाओं की कुछ प्रमुख वित्तीयन योजनाएँ नीचे दी गई हैं।


एमएसएमई मंत्रालय

सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी निधि योजना

भारत सरकार ने अत्यंत लघु एवं लघु उद्यम क्षेत्र को संपार्श्विक प्रतिभूति से मुक्त ऋण उपलब्ध कराने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ऋण गारंटी निधि योजना शुरू की। मौजूदा एवं नए दोनों प्रकार के उद्यम इस योजना के अधीन शामिल किए जाते हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ऋण गारंटी निधि योजना के क्रियान्वयन के लिए, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ऋण गारंटी निधि ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) नामक ट्रस्ट की स्थापना की। यह योजना औपचारिक रूप से 30 अगस्त, 2000 को शुरू की गई और 01 जनवरी, 2001 से इस योजना का परिचालन शुरू हुआ।    


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ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाणन योजना (आएसईसी)

ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाणन योजना खादी कार्यक्रमों के लिए निधीयन का प्रमुख स्रोत है। यह मई, 1977 में शुरू की गई, और इसका उद्देश्य वास्तविक निधि आवश्यकता और बज़टीय स्रोतों से उसकी उपलब्धता के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए बैंकिंग संस्थाओं से निधियाँ जुटाना है। ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाणन योजना के अंतर्गत, संस्थाओं की आवश्यकता के अनुसार, पूँजीगत व्यय एवं कार्यशील पूँजी के लिए 4 प्रतिशत प्रतिवर्ष की रियायती ब्याजदर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।  वास्तविक उधार दर और 4 प्रतिशत के बीच की अंतर-राशि का भुगतान केंद्र सरकार केवीआईसी के माध्यम से ऋणदात्री संस्था को करती है और इस प्रयोजन के लिए केवीआईसी को खादी अनुदान शीर्ष के अधीन निधि उपलब्ध कराई जाती है।  


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सिडबी – भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक

प्रत्यक्ष ऋण योजना

प्रत्यक्ष ऋण योजना के अंतर्गत, पात्र लघु एवं मध्यम उद्यमों को सावधि ऋण एवं अन्य रूपों में, जैसे कार्यशील पूँजी सावधि ऋण व बिल भुनाई सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना का लाभ विभिन्न प्रयोजनों जैसे – नई लघु उद्योग /सेवा क्षेत्र की इकाई की स्थापना / विस्तार /विविधीकरण /आधुनिकीकरण /प्रौद्योगिकी उन्नयन /गुणवत्ता प्रमाणन, विपणन संबंधी विभिन्न गतिविधियाँ चलाने के लिए, अतिरिक्त मशीनें /उपकरण खरीदने के लिए, एमपीबीएफ़ या मार्ज़िन में अंतर सहित कार्यशील पूँजी आवश्यकता पूरी करने के लिए चुनिंदा आधार पर किया जा सकता है।


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 लघु उद्योगों के उत्पादों का विपणन

यह योजना घरेलू एवं निर्यात बाज़ारों में लघु उद्योगों की कुल बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से आवश्यक विभिन्न गतिविधियाँ चलाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। इस योजना के अधीन कॉर्पोरेट संस्थाओं के लिए भी वित्त शामिल है, ताकि वे लघु उद्योगों की विपणन क्षमता बेहतर बनाने के लिए उन्हें सहयोगी सेवाएँ और/या मूलभूत संरचनागत सुविधाएँ उपलब्ध करा सकें। इस योजना के अंतर्गत, लागू मूल उधार दर से 3.5% ऊपर तक ब्रॉड बैन्ड में ब्याजदर निर्धारित की जाती है और ब्याज की अवधि एक वर्ष की ऋम-स्थगन अवधि सहित तीन से आठ वर्ष तक हो सकती है। 


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स्वच्छतर उत्पादन उपाय योजना

इस योजना के अंतर्गत, चर्मशोधन एवं परिष्करण, वस्त्र आर्द्र संसाधन, धातु परिष्करण, इलेक्ट्रोप्लेटिंग एवं ढलाई वाले क्षेत्रों के लिए मौजूदा एसएमई इकाइयों को एकीकृत स्वच्छतर उत्पादन उपायों के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के अधीन ऋम 8.5% प्रतिवर्ष की ब्याजदर पर उपलब्ध है।


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एमएसएमई क्षेत्र में ऊर्जा बचत परियोजनाओं के लिए योजना

इस योजना के अंतर्गत, सिडबी के माध्यम से और साथ ही साथ बैंकों /राज्य वित्त निगमों एवं गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफ़सी) को पुनर्वित्त के माध्यम से एमएसएमई को वित्तीय सहायता दी जाती है, ताकि उन्हें ऊर्जा खपत कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, कार्बन-डाई-ऑक्साइड का उत्सर्जन कम करने और दीर्घकाल में लाभप्रदता में वृद्धि करने के लिए संयंत्र एवं मशीनों /उत्पादन प्रक्रियाओं में ऊर्जा बचत संबंधी निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।   बैंड के अंदर ब्याजदर का विवरण नीचे दिया गया है :

स्थिर दर :      9.5   -      10% प्रतिवर्ष
चल दर :       9.75   -      10.5% प्रतिवर्ष

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एनएसआईसी  - राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम

बैंक ऋण सरलीकरण योजना :

एनएसआईसी ने अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों की आवश्यकता के अनुरूप उन्हें सावधि ऋण एवं कार्शील पूँजी की मंजूरी के लिए वाणिज्य बैंकों अर्थात् सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, ऐक्सिस बैंक, ऐस बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, ओरियन्टल बैंक ऑफ़ कॉमर्स, एचएसबीसी, युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया तथा चाइनाट्रस्ट कामर्शियल बैंक के साथ व्यवस्था की है।


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 बिल भुनाई योजना

इस योजना के अधीन वास्तविक व्यापार लेनदेनों, जैसे – लघु उद्योगों से प्रतिष्ठित सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों /राज्य एवं केंद्र सरकार के विभागों /उपक्रमों को की गई आपूर्तियों की खरीदारी के बिलों की खरीदारी /भुनाई की जाती है।

इस योजना में ब्याजदर निम्नवत् होगी (11/05/2009 से प्रभावी):

  • बीजी/एसडीआर/एफ़डीआर की प्रतिभूति के प्रति सहायता  : 11.25 % प्रतिवर्ष
  • ऊपर अंकित प्रतिभूतियों से इतर अन्य प्रतिभूतियों के प्रति सहायता : 13.25% प्रतिवर्ष से 16.25% (ऐसे मामलों में, प्र.का. सेतर पर उच्च शक्ति-प्राप्त स्वीकृति समिति को प्रत्येक मामले में अलग-अलग ब्याजदर निर्धारित करने अधिकार है)


विलंबित भुगतान पर ब्याजदर (11/05/2009 से प्रभावी) निम्नवत् लगाई जाएगी : -

  • 90 दिन से अधिक किंतु 180 दिन तक विलंब के लिए : सामान्य ब्याजदर से 2.50% अधिक
  • 180 दिन से अधिक विलंब के लिए : सामान्य ब्याजदर से 3.00% अधिक


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