ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग हेतु उपकरण व कार्यक्रम

Equipments & Programs for Efficient Energy Use

ऊर्जा के दक्षतापूर्ण उपयोग हेतु उपकरण व कार्यक्रम 

विद्युतीय उपकरण 

इनमें ऊर्जादक्ष मोटरें, ट्रांसफार्मर व चल आवृत्ति ड्राइव्‍स शामिल हैं, जो विद्युतीय शक्ति को विद्युत के प्रभावी उपयोग में बदलती है, जिससे विद्युत उपभोग की लागत घटती है । ये उपकरण घरों व वाणिज्यिक कारोबार में उपयोग आते हैं । अन्‍य उदाहरण हैं :

  • प्रकाश व्‍यवस्‍था  – सीएफएल, मेटल हेलीडस लैंप, एलईडी आदि ।
  • अन्‍य विद्युत लोड – ऊर्जादक्ष वायु संपीडक, ब्‍लोअर, पंखे, पंप, कैपेसिटर, स्‍वचालित शक्ति घटक नियंत्रक (एपीएफसी)

 औद्योगिक उपकरण

वॉटर ट्यूब बॉयलर, ऊर्जादक्ष बॉयलर, रेक्‍यूपरेटर, कंडेसेंट रिकवर व रिसाइकल प्रणाली, हीट पंप आदि । ऊर्जादक्षता ब्‍यूरो  (बीईई) द्वारा जारी ऊर्जादक्ष उपकरणों की पूरी सूची हेतु  यहां क्लिक करें ।   

भवनों में ऊर्जा प्रबंधन कार्यक्रम 

बीईई द्वारा शुरू किए गए ऊर्जा प्रबंध कार्यक्रम का लक्ष्‍य ऊर्जा कचरे व लागतों को घटाना, ऊर्जा संरक्षण उपायों का किसी सुविधा या भवन पर प्रभाव का अध्‍ययन, ऊर्जा संरक्षण उपायों को लागू करने की लागतों व लाभ का अध्‍ययन व सुविधा रखरखाव हेतु एक कार्यक्रम का विकास करना है ।

बीईई ने स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं, होटलों स्‍कूल जैसे वाणिज्यिक भवनों हेतु ऊर्जा प्रबंधन कार्यक्रम बनाए हैं, ताकि इन्‍हें आवासीय, वाणिज्यिक व औद्योगिक भवनों में लागू किया जा सके ।  (संबंधित बीईई रिपोर्टों हेतु ऊपर की लिंक पर क्लिक करें)

ऊर्जा प्रबंधन हेतु कदम

  • ऊर्जा प्रबंध कार्यक्रम शुरू करना : इसमें ऊर्जा प्रबंध ग‍तिविधियों हेतु शामिल व उत्‍तरदाई सहभागियों की पहचान करना तथा ऐसी योजना बनाना है, ताकि किसी विशेष समयावधि हेतु ऊर्जा संरक्षण के लक्ष्‍यों पर ध्‍यान देता है । इसमें दृष्टिकोणों का प्रचार करने की प्रक्रिया हेतु उपाय लागू करने, रणनीतियों व उपायों की निगरानी व स्‍टाफ सदस्‍यों को शिक्षा व पुरस्‍कार द्वारा प्रेरित करना है ।
  • दक्षता का लक्ष्‍य निर्धारण :  दक्षता लक्ष्‍य भवन की लाभप्रदता की माप से निर्धारित किए जाते हैं व तदनुसार परिवर्ती घटकों जैसे राजस्‍व, परिचालन व्‍यय, परिचालन मार्जिन व ऋणों का मूल्‍यांकन व निगरानी की जा सकती है । उक्‍त परिवर्ती घटकों के अनुसार भवन की वार्षिक ऊर्जा लागत की गणना व विश्‍लेषण किया जाएगा ।
  • ऊर्जा आकलन करना :  इस आकलन में मौजूदा ऊर्जा उपयोग व लागत, संभावित ऊर्जा बचत के अवसर व कार्यक्रम के भावी तुलनाओं हेतु सीमा तय करना शामिल है । आकलन प्रत्‍यक्ष आकलन के माध्‍यम से, जिसमें प्रेक्षण व ऊर्जा उपयोग व लागतों का खाता तैयार करना शामिल है, अथवा ऊर्जा लेखापरीक्षा, जो एक विस्‍तृत विश्‍लेषण है, में सर्वे व ऊर्जा प्रवाह के विश्‍लेषण से किया जा सकता है ।
  • ऊर्जा बचत के अवसरों की तलाश करना : ऊर्जा बचत के अवसरों की पहचान किसी भवन में ऊर्जा प्रबंधन को कर्मचारी प्रशिक्षण, ट्रेकिंग व ऊर्जा उपभोग की रिपोर्टिंग व सतत सुधार हेतु परिस्थितियों के निर्माण से की जा सकती है ।
  • ऊर्जा प्रबंध प्रणाली (ईएमएस) का कार्यान्‍वयन : ईएमएस एक कंप्‍यूटर आधारित नियंत्रण प्रणाली है, जो भवन की यांत्रिक व विद्युतीय उपकरणों का नियंत्रण व निगरानी करती है , जैसे वायु का प्रवाह, प्रकाश, आग व सुरक्षा प्रणालियां आदि । इन प्रणालियों का लक्ष्‍य ऊर्जा दक्षता के कार्यनिष्‍पादन की निगरानी है, जो कि मौजूदा व पिछले कार्यनिष्‍पादन की तुलना से अथवा मौजूदा कार्यनिष्‍पादन की तुलना, संबंधित क्षेत्र के लिए उपयुक्‍त स्‍थापित प्रक्रियाओं से करके की जाती है ।

 वाणिज्यिक भवनों हेतु ऊर्जा प्रबंध कार्यक्रम के उदाहरणों में शामिल हैं :

  • गर्म व ठंडी प्रणालियों, ताप शोषक कांच, निम्‍न उत्‍सर्जक कांच
  • दीवारों व छतों का इंसुलेशन  
  • ऊर्जा, पानी व अन्‍य स्रोतों का दक्ष उपयोग  
  • निवासियों तथा /अथवा कर्मचारियों की स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा 

कचरे व जहरीले पदाथों में कमी, परिचालन व रखरखाव का अधिकतम उपयोग आदि ।