कार्बन बाजार

Carbon Credits

 

कार्बन क्रेडिट क्या होते हैं?

भारत में कार्बन डाई ऑक्साइड (ग्रीन हाउस गैसों से इतर) कम करनेवाली परियोजनाओं के कार्यान्वयन से कार्बन क्रेडिट जुटाए जा सकते हैं। प्रत्येक एक टक कार्बन डाई ऑक्साइड कम करने पर एक कार्बन क्रेडिट मिलता है।

लागू किए गए कार्बन कार्यक्रम के अनुसार कार्बन क्रेडिट को भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है।

  • सर्टिफाइड एमिशन रिडक्शन्स (सीईआर)- ईयू एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम के अंतर्गत अनुपालन के उद्देश्य से औद्योगिक प्रदूषणकर्ताओं द्वारा व्यवहृत
  • वेरिफाइड एमिशन रिडक्शन्स (वीईआर्स)- गैर-निष्पादन उद्देश्यों जैसे सीएसआर, कार्बन फुट-प्रिंटिंग एवं दुनिया में कहीं भी ऐसे अन्य प्रयासों के लिए व्यवहृत
  • कार्बन ऑफसेट

क्या आप कार्बन क्रेडिट्स का कोई उदाहरण दे सकते हैं? उनको अर्जित कैसे किया जाता है?

को 1 मेगावाट घंटे की क्षमता वाली पवन चक्की प्रतिवर्ष लगभग 1800 कार्बन क्रेडिट पैदा करती है, क्योंकि यह बिजली पैदा करने के लिए पवन ऊर्जा का इस्तेमाल करती है और उसे भारतीय ग्रिड में डालती है।

इसका आशय यह है कि ग्रिड ने 1 मेगावाट प्रति घंटा बिजली पैदा करने के लिए  सामान्यतः कोयला या प्राकृतिक गैस (फॉसिल फ्यूल) जलाई होती, किन्तु अब वह पवन चक्की परियोजना से सप्लाई की जा रही है। इस प्रकार पवन चक्की का मालिक कार्बन लाभ के लिए आवेदन कर सकता है और ग्रिड द्वारा फॉसिल फ्यूल के उपयोग में कमी लाने के कारण कार्बन बचत के लिए पात्र है। यह ग्रिड में हर वर्ष डाली गई बिजली इकाइयों की संख्या के आधार पर कार्बन क्रेडिट में बदल जाता है।

कार्बन क्रेडिट्स की संख्या की गणना करने के लिए मालिक को मीटर रीडिंग बताते हुए पैदा की गई बिजली के विवरण , कमिशनिंग प्रमाणपत्र, मीटर कैलिब्रेशन रिपोर्ट और राज्य बिजली बोर्ड (एसईबी) को भेजे गए मसिक बीजक प्रस्तुत करने होते हैं।.

कार्बन क्रेडिट्स अर्जित करने की पात्र लघु परियोजनाओं की सूची देखने के लिए यहाँ क्लिक करें Click here

 

क्या आप सीईआर और वीईआर के बीच अंतर पर प्रकाश डाल सकते हैं?

सीईआर केवल क्लीन डेवलपमेंट मकैनिज्म (सीडीएम), युनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेन्शन ऑन क्लाइमेट चेन्ज (यूएनएफसीसीसी) कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पन्न होते हैं और वर्तमान में यूरोपीयन अनुपालन बाजार में इस्तेमाल किए जा सकते हैं यानी ईयू उद्योगों को सीईआर खरीदने की अनुपालन बाध्यता है।

गैर-अनुपालन बाजार वह है जहाँ वीईआर अथवा स्वैच्छिक क्रेडिट उत्पन्न होते हैं। ये दुनिया भर में केवल गैर-अनुपालन उद्देश्यों यानी सीएसआर, कार्बन फुटप्रिंट ऑफसेटिंग उद्देश्य आदि के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

चूंकि सीईआर अर्जित करने की प्रक्रिया अधिक कड़ी और समय-साध्य है, इसलिए सीईआर से वीईआर की तुलना में अधिक मूल्य मिलते हैं। चूंकि संयुक्त राष्ट्र सीईआर की मंजूरी करता है, अतः उनको स्वैच्छिक उद्देश्यों से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। परन्तु वीईआर स्वैच्छिक बाजार के उद्देश्य को बेहतर तरीके से पूरा करते हैं, क्योंकि उनका मूल्य सीईआर से कम रखा जाता है।

 

स्वच्छ विकास प्रणाली (सीडीएम) क्या है)?

क्योटो क्लीन डेवलपमेंट मकैनिज्म एक ऐसी व्यवस्था है जो उद्योगीकृत देशों (अमेरिका, अधिकतर यूरोप तथा जापान) को ग्रीनहाउस गैस कम करने, अधिक कीमती घरेलू उत्सर्जन घटाने वाले अधिक कीमती उपायों के विकल्प के रूप मेंविकासशील देशों में उत्सर्जन कम करनेवाले उपक्रमों में निवेश करने के लक्ष्य देती।  संयुक्त राष्ट्र द्वारा चलाए जानेवाले इस कार्यक्रम का इस्तेमाल उद्योगीकृत राष्ट्र अपने घरेलू कार्बन उत्सर्जन की भरपाई करने के लिए और अपने क्योटो रिडक्शन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए कर सकते हैं। इन परियोजनाओं में वनीकरण, पुनर्वनीकरण तथा स्वच्छ ईंधन प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन शामिल है।

भारत में यह कार्यक्रम केवल नए और अभी आरंभ की जानेवाली परियोजनाओं पर लागू है। परियोजना-मालिकों द्वारा संयुक्त राष्ट्र को बताना होता है कि वे परियोजना आरंभ होने के 6 माह के भीतर क्योटो सीडीएम के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट्स अर्जित करने का इरादा रखते हैं, अन्यथा वे स्वतः ही अनर्ह हो जाते हैं।  यदि आप 6 माह के समय-सीमा संबंधी नियम का पालन कर रहे हों तो निश्चित रूप से आप परियोजना के काम करना शुरू करने से पहले ही संयुक्त राष्ट्र में आवेदन कर सकते हैं (जो कि परियोजना की वित्तीय बंदी के दौरान आदर्श स्थिति होती है)। क्योटो सीडीएम में उपयोगकर्ताओं को प्रमाणीकृत उत्सर्जन कटौती अथवा सीईआर उत्पन्न करने की सुविधा है, जिसके बाजार में सबसे अधिक दाम मिलते हैं।

वैश्विक सीडीएम बाजार के बारे में बुनियादी सांख्यिकी के लिए यहाँ क्लिक करें Click here

 

क्या भारत की कंपनियों को सीडीएम प्रणाली से मौद्रिक लाभ हुआ है?

यथा 11 अगस्त 2010 भारत में यूएनएफसीसीसी को प्रस्तुत की गई कुल 2.313 परियोजनाओं में से 520 पंजीकृत सीडीएम परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं में 43 मिलियन सीईआर प्रतिवर्ष उत्पन्न करने की संभावना है, जो विश्व में पंजीकृत सीडीएम परियोजनाओं द्वारा प्रतिवर्ष उत्पन्न सीईआर का लगभग 12%  है। यथातिथि भारतीय परियोजनाओं को 79 मिलियन सीईआर जारी किए जा चुके हैं और यदि प्रति सीईआर 10 डॉलर का मूल्य भी मान लिया जाए तो भारतीय परियोजनाओं को वास्तव में जारी किए गए सीईआर का मूल्य 790 मिलियन अमेरिकी डॉलर होता है। सीडीएम का लाभ लेनेवाली कुछ कंपनियों में एसआरएफ, जीएफसीएल तथा नवीन फ्लोनीर शामिल हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में पवन फॉर्मों वाली बहुत सी एसएमई ने अनुपालन और स्वैच्छिक बाजार से कार्बन राजस्व अर्जित किया है।

मैं एक छोटा उद्यम चलाता हूँ। क्या सीडीएम प्रणाली से लाभ लेने के लिए कोई न्यूनतन आवश्यकताएं हैं? क्या मैं उसके लिए अर्ह हूँ?

सबसे पहले कार्बन क्रेडिट किसी उद्यम द्वारा केवल विशिष्ट कार्बन डाई ऑक्साइड अथवा ग्रीन हाउस गैस कम करनेवाली परियोजनाओं से उत्पन्न होते हैं। ऐसी परियोजना या तो फैक्ट्री साइट पर हो सकती है या किसी अन्य स्थान पर। उदाहरण के लिए कोई मुंबई-आधारित एसएमई ऐसा पवन फार्म रख सकती है जो सतारा के ग्रिड में बिजली देता हो।

यदि आप सीडीएम कार्बन क्रेडिट अर्जित करना चाहते हैं तो आपको उसके लिए परियोजना के काम करना आरंभ करने से कम से कम 6 माह पूर्व आवेदन करना चाहिए, और वरीयतः परियोजना की वित्तीय बन्दी के दौरान। आदर्श तो यह होगा कि आप आवेदन की लागत और लगनेवाले समय को देखते हुए आप अनुपालन कार्बन बाजार में प्रवेश करने के लिए 5000 कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करें।

हो सकता है अपने आप में कोई एसएमई इकाई लागत सक्षम रूप में कार्बन क्रेडिट बिक्री के लायक पर्याप्त सीईआर उत्पन्न न करती हो, किन्तु ऐसे दो तरीके हैं, जिनके ज़रिए एसएमई सीडीएम वित्तीयन में भाग ले सकती हैं।

  1. सीडीएम प्रोजेक्ट बन्डलर
  2. प्रोग्रामैटिक सीडीएम


बंडल्ड परियोजना सीडीएम परियोजना की संव्यवहार लागत को कम करने में मदद करती है। बंडल्ड परियोजना की संव्यवहार लागत में मूलतः निम्नलिखित का समावेश रहता है :

  • सीडीएम परियोजना चक्र की अपफ्रंट लागत और बंडल के संगठनात्मक पहलू
  • उत्पन्न सीईआर के सत्यापन व प्रमाणन से संबंधित वार्षिक परिचालन लागतें

विभिन्न एजेंसियाँ जैसे इंडियन एसएमई टेक्नोलॉजी सर्विसेड लि. (आईएसटीएसएल) Indian SME Technology Services Ltd. (ISTSL) एसएमई क्लस्टरों में बंडलिंग और ट्रेडिंग प्रक्रिया की सुविधा देती हैं।

सीडीएम परियोजनाओं की बंडलिंग और विशेषतः प्रोग्रामैटिक सीडीएम (पीसीडीएम) के बारे में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें Click here भारत में एसएमई पर सीडीएम की प्रयोज्यता संबंधी प्रेजेन्टेशन डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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यदि आप किसी ऐसी परियोजना से कार्बन क्रेडित अर्जित करना चाहते हैं जो पिछले दो वर्ष या अधिक समय से कार्यरत है तो आपको स्वैच्छिक कार्बन बाजार में कोशिश करनी चाहिए।.

 

मैंने सुना है कि सीडीएम प्रणाली सुचारु रूप से काम नहीं कर रही है। क्या यह सच है?

हाँ। क्योटो प्रोटोकॉल की पहली प्रतिबद्धता अवधि 2008 से 2012 के बीच है और एक उसकी अवधि बढ़ाने के लिए एक और करार की जरूरत है। किन्तु  कोपेनहेगन में 2009 में हुई ग्लोबल क्लाइमेट संबंधी बातचीत कोई नया नतीजा देने में असफल रही। इसलिए सीडीएम के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट के क्रेता इंतजार करो और देखते रहो की नीति अपनाए हुए हैं। क्योटो के बाद की अनिश्चितता को देखते हुए, क्रेता 2012 के बाद क्रेडिट खरीदने में हिचक रहे हैं। साथ ही, क्योटो सीडीएम के अंतर्गत कार्बन बाजार में अमेरिका नहीं उतरा है और इसलिए 2012 के बाद कोई भविष्य नहीं दिखने के कारण भारतीय कंपनियों के लिए अभी से सीडीएम की गाड़ी में सवार होना जोखिम से भरा है। यदि आप हिचक रहे हैं और क्योटो सीडीएम बाजार में विलंब के बारे में निश्चित नहीं हैं, तो वैकल्पिक कारब्न कार्यक्रमों- स्वैच्छिक कार्बन बाजार एवं कार्बन ऑफसेट् (आईएसओ 14064) पर ध्यान देना सबसे अच्छा रहेगा।

और कौन-से कार्बन कार्यक्रम उपलब्ध हैं? क्या वे सीडीएम की तुलना में भारतीय एसएमई के लिए अधिक उपयुक्त हैं?

अन्य कार्बन कार्यक्रमों में स्वैच्छिक कार्बन मानक Voluntary Carbon Standard (VCS) तथा कार्बन ऑफसेट्स (आईएसओ 14064)  Carbon Offsets (ISO 14064) कार्यक्रम शामिल हैं। स्वैच्छिक बाजार में कार्बन के दाम वर्तमान में अपेक्षाकृत कम हैं (3.00 डॉलर और उससे कम)। स्वैच्छिक क्रेडिट के लिए माँग लगातार बढ़ रही है और आशा है कि बाजार इससे और आगे जाकर और चढ़ेगा। हालांकि कार्बन के दाम क्योटो सीडीएम प्रक्रिया से तुलनीय नहीं हैं, किन्तु 2004 के बाद काम आरंभ करनेवाली परियोजनाओं के लिए यह कम खर्चीला और तेज गति वाला विकल्प है। साथ ही, एसएमई ऐसे गैर-क्योटो क्षेत्रों में अपने कार्बन क्रेडिट से पैसा कमा सकती हैं, जहाँ दाम प्रति कार्बन क्रेडिट 1.00 से 3.00 डॉलर हैं।

सीडीएम प्रक्रिया का विकल्प समय भी कम लेता है। कार्बन बाजार प्रक्रिया की विशेष समय-सीमाएं इस प्रकार हैः:

  • स्वच्छ विकास प्रणाली (सीडीएम): 1.8 वर्ष
  • स्वैच्छिक कार्बन मानक (वीसीएस): 6-8 महीने
  • कार्बन ऑफसेट्स (ISO 14064): 2 महीने

 

वीसीएस बाजार की पात्रता शर्तें क्या हैं?

वीसीएस कई सारे स्वैच्छिक कार्यक्रमों में से एक है। वीसीएस कार्यक्रम में पात्र होने के लिए, आपकी परियोजना ने आवेदन की तारीख से दो वर्ष के भीतर काम आरंभ कर दिया हो। स प्रकार, यदि आप अगस्त 2010 मं बाजार में उतरने का निर्णय करें तो आपकी परियोजना को अगस्त 2008 में या उसके बाद कार्य आरंभ किए हुए होना चाहिए।.

दुबारा पहिए का आविष्कार करने के बजाय, स्वैच्छित बाजार सीडीएम बाजार के दिशानिर्देशों का पालन करता है और आप कार्बन परियोजना करने के लिए एनएफसीसीसी सीडीएम दिशानिर्देशों के अंतर्गत सूचीबद्ध कोई भी तरीका अपना सकते हैं। वीसीएस प्रक्रिया के बारे में और अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें click here।

वैश्विक स्वैच्छिक कार्बन बाजार के आंकड़ों के लिए यहाँ क्लिक करें Click here

 

मेरे लघु उद्यम की परियोजनाएं सीडीएम अथवा वीसीएस बाजारों के लिए क्वालिफाई नहीं करतीं। क्या कोई ऐसा तरीका है कि मैं उत्सर्जन में कमी का लाभ ले सकूँ?

यदि आप वीसीएस कार्यक्रम के अंतर्गत क्वालिफाई करने में असफल रहे, तो इसका अभिप्राय यह नहीं हैकि आपकी परियोजना कार्बन उत्सर्जन में कमी नहीं ला रही है। आप अब भी आईएसओ 14064 ऑफसेट के अंतर्गत पात्र हो सकते हैं। अपने कार्बन फुटप्रिंट्स के अनुमान लगाने के लिए दुनिया भर की कंपनियाँ  आईएसओ 14064 (भाग 1,2) का इस्तेमाल करती हैं। किन्तु आईएसओ 14064:3 में कार्बन ऑफसेट्स जनरेट करने के दिशानिर्देश भी दिए गए हैं। यह बाजार आईएसओ 14064 (1,2) आईएसओ 14064:3 परियोजना के कार्बन ग्राहकों से मेल खाता है और कॉर्पोरेट्स को मदद करता है कि वे दुनिया भर के अपने परिचालनों में कार्बन-न्यूट्रल बन जाएँ। आईएसओ 14064 कार्यक्रम के लिए आदर्श रूप से, आपकी कार्बन परियोजनाओं को 2003 में या उसके बाद आरंभ हुआ होना चाहिए। कार्बन क्रेडिट की गणना करने के तरीके वही हैं जो सीडीएम मानक पद्धतियों में हैं। वीसीएस कार्यक्रम की ही तरह सभी आईएसओ 14064 ऑफसेट परियोजनाओं में संयुक्त राष्ट्र अथवा भारत सरकार के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती। आप 2004 के बाद से (वर्षानुवर्ष आधार पर) कार्बन क्रेडिट का दावा कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में रिपोर्ट तैयार करना (2 सप्ताह), त्वरित वैधीकरण और सत्यापन, कार्बन परियोजना की निष्पक्ष लेखा परीक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कार्बन एजेंसी से पंजीकरण (1) शामिल है। यह एक नया बाजार है और बिक्री मूल्य 1 से 3 डॉलर प्रति क्रेडिट के बीच रहता है।

आईएसओ 14064 कार्बन ऑफसेट्स के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें या संपर्क करें- http://www.carbonyatra.com

याद रखें कि दुनिया की कोई भी कंपनी जो अपने प्लांट में कार्बन लेखा परीक्षा कर रही है वह आईएसओ 14064 दिशानिर्देशों का पालन करती है और इसलिए कार्बन न्यूट्रल बनने के लिए वह आईएसओ 14064 सत्यापित कार्बन क्रेडिट लेना चाहेगी।

 

कार्बन क्रेडित अर्जित करने के लिए मैं अपनी परियोजनाओं का सत्यापन और वैधीकरण कैसे कराऊँ?

पहले आपको एक संकल्पना टिप्पण तथा परियोजना डिजाइन दस्तावेज (पीडीडी) तैयार करना होगा, जिसमें परियोजना को समझाया गया हो और बताया गया हो कि वह कार्बन उत्सर्जन कैसे कम करती है। तब (संभवतः किसी सलाहकार की मदद से) अनुपालन अथवा स्वैच्छिक कार्बन बाजार के आधार पर अपनी पात्रता का निर्धारण करना होगा। परिणाम के आधार पर आप निष्पक्ष अनुमोदित अंकेक्षक की सेवाएं लेंगे, जो प्रचलिक मानकों व दिशानिर्देशों के अनुसार परियोजना का वैधीकरण व सत्यापन करेगा। सीडीएम के अंतर्गत लेखा-परीक्षक परियोजना के मूल्यांकन के बाद सीडीएम के पंजीकरण की संभावना के बारे में आपको पहले ही बता देंगे। स्वैच्छिक बाजार पहले आरंभ हो चुकी (2008 से पूर्व) परियोजनाओं को अधिक स्वीकार करता है, और पात्रता के परीक्षण के कई कार्यक्रम हैं। स्वैच्छिक परियोजनाओं के वैधीकरण व सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए गए निष्पक्ष लेखा-परीक्षक वैसे ही होते हैं जैसे सीडीएम के लिए, सिवाय कुछ अपवादों के।

क्या कोई ऐसा केन्द्रीय डाटाबेस है जिसमें जारी किए गए सीईआर और वीईआर से संबंधित जानकारी उपलब्ध हो?

हाँ। सीईआर जारी की गई सीडीएम परियोजनाएं निम्नलिखित पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध और ट्रैक की जाती हैं-

http://cdm.unfccc.int/Issuance/cers_iss.html

इसी प्रकार स्वैच्छिक बाजार में कार्बन ट्रैकिंग रजिस्ट्री होती हैं, ताकि क्रेता परियोजना प्रलेखन को देख सके और क्रेडिट क्रय करने के बाद उनको भुना सके। इससे विक्रेता द्वारा एक ही कार्बन क्रेडिट की बिक्री कई क्रेताओं को करने पर रोक लगती है।

लिंक: http://www.markitenvironmental.com/registryview.php?pg=prj

स्वैच्छिक कार्बन बाजार प्रतिभागियों की संक्षिप्त सूची के लिए यहाँ क्लिक करें-Click here

 

मैं एसएमई निर्यातक हूँ। क्या मुझे बढ़ते हुए कार्बन कर की चिन्ता करनी चाहिए?

दि यूरोपीयन कमीशन ने हाल ही में (जून 2010) यूरोप के ऊर्जा उत्पादों के कर आधार का विभाजन उनकी ऊर्जा सामग्री और उनके CO2 उत्सर्जन में करने की योजना पर विचार-विमर्श किया है। लेकिन  उसने अभी तक अंतिम प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया है। अभी तक योजना का केवल कच्चा प्रारूप सबको दिखा गया है। यदि यूरोपियन यूनियन देश कार्बन पर स्थानीय रूप से कर लगाने का निर्णय करते हैं, तो प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने के लिए वे भारत से यूरोपियन यूनियन के सभी निर्यातकों पर कार्बन कर प्रणाली क्रियान्वित कर सकते हैं। यह कर उनकी अपनी-अपनी सीमाओं पर माल के पहुँचने पर लगाया जा सकता है। यह भी सुनने में आया है कि निर्यातकों से कहा जाए कि वे यूरोपियन यूनियन के कार्बन अनुमोदनों व परमिटों को खरीद लें और अपने कार्बन फुटप्रिंट्स को ऑफसेट कर लें।

कार्बन फुटप्रिंट्स क्या हैं? उनकी गणना कैसे की जाए?

किसी वस्तु, सेवा अथवा घटना से जुड़ी कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) और अन्य ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की समस्त मात्रा कार्बन फुटप्रिंट कहलाती है। उत्सर्जन इनकी सप्लाई-चेन, इनके इस्तेमाल और यहाँ तक कि इनके निस्तारण में पैदा हो सकता है। इन उत्सर्जनों का कारण - जैसे पावर प्लान्टों में बिजली का उत्पादन, फॉसिल फ्यूल्स से गरमी पैदा करना, ट्रांसपोर्ट परिचालन और अन्य औद्योगिक एवं कृषि प्रक्रियाएँ।

किसी भी उद्योग में कार्बन उत्सर्जन का ज्यादातर हिस्सा बिजली के इस्तेमाल (ग्रिड सप्लाई) से आता है। इसलिए निम्नलिखित लिंक पर जाकर अपने बिजली के उपयोग की जानकारी डालें जिससे केवर बिजली इस्तेमाल से होने वाले घरेलू उत्सर्जन के बारे में जानकारी मिल सके-: http://carbonyatra.com/carbon_calculator.php

कार्बन फुटप्रिंट्स गणकों के संकलन के लिए क्लिक करेंClick here

सभी कॉर्पोरेट /औद्योगिक कार्बन फुटप्रिंट्स की निष्पक्ष लेखा-परीक्षा करने की आवश्यकता होती है, क्योंकि सामान्यतः वे शेयरधारकों व निवेशकों को सूचित किए जाते हैं।.

निर्देशी उद्योग-विशिष्ट कार्बन फुटप्रिंट संगणकों को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें Click here


Download डाउनलोड करें एक्सेल फाइल स्प्रेडशीट्स जिनसे भारत के सीमेंट उद्योग द्वारा ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की गणना हो पाती है

 (खास तौर से भारत के सीमेंट क्षेत्र के लिए बनाया गया यह साधन दि एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी), नई दिल्ली ने एक मल्टी स्टेकहोल्डर कन्सल्टेंटिव प्रक्रिया के जरिए विकसित किया है, जिसमें इस क्षेत्र के अलग-अलग विशेषज्ञों की राय ली गई। यह साधन वर्तमान कॉर्पोरेट जीएचजी इन्वेन्टरी प्रोटोकॉल तथा वाशिंगटन आधारित गैर सरकारी संगठन वर्ल्ड रिसोर्सेज इन्स्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई) और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के जेनेवा आधारित सहयोग-संघ वर्ल्ड बिजनेस काउन्सिल फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (डब्ल्यूबीसीएसडी) द्वारा उनके –दि ग्रीन हाउस गैस प्रोटोकॉल- नामक प्रयास के अंतर्गत विकसित किया गया है। युनाइटेड स्टेट्स एन्वायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (यूएसईपीए) ने भारत के इस सीमेंट-विशिष्ट साधन के पहले संस्करण के लिए सहायता प्रदान की है। यह साधन सीमेन्ट कारखाने से होने वाले CO2 उत्सर्जन की सूची तैयार करने के लिए एक सरल दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिसे कॉर्पोरेट स्तर पर लागू किया जा सकता है। इस साधन का उद्देश्य  सीमेंट प्लान्टों से CO2 और SO2 उत्सर्जनों की गणना करने में सुभीता होगा)।

 

मैं कार्बन कर देने से कैसे बच सकता हूँ? क्या मेरे व्यवसाय के कार्बन फुटप्रिंट को ऑफसेट करने के कोई और फायदे भी हैं?

भारतीय एसएमई अपनी फैक्ट्री /उत्पाद से होनेवाले कार्बन फुटप्रिंट का आकलन कर सकते हैं और कार्बन उत्सर्जन को स्थानीय कार्बन क्रेडिट से अथवा अपने प्लान्ट में हरित उपायों (वायु, सौर, आदि) के कार्यान्वयन से कार्बन उत्सर्जन को ऑफसेट कर सकते हैं। उपभोक्ता उत्पादों पर उनके पर्यावरणीय प्रभाव जैसे उनके निर्माण, परिवहन और विक्य में उत्पादित ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा आदि के ब्यौरे दर्शाना आरंभ हो गया है। ऐसा करने से एसएमई अपने आप को कार्बन बाजार के लिए तैयार कर सकते हैं और कार्बन कर से बच सकते हैं, जो भारतीय निर्यातकों के लिए शीघ्र ही एक सच्चाई होनेवाला है। स्वतः सक्रियता और कार्बन बाजार नियमों को अभी समझ लेना फायदेमंद है, बजाय इसके कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य उपायों की प्रतीक्षा की जाए।

अपने व्यवसाय के कार्बन फुटप्रिंट्स को ऑफसेट करते हुए आप अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, सप्लायरों और शेयरधारकों के सामने एक सकारात्मक, ठोस उदाहरण पेश करते हैं। आपही की तरह वे सब भी जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हैं और पर्यावरण के सरोकारों के प्रति वचनबद्ध व्यसायों के प्रति वे और अधिक आकर्षित व वफादार रहेंगे।

ग्रीन कंपनियों का प्रबंधघन बेहतर होता है, वे अपने प्रतिस्पर्धियों से अधिक कुशल व अधिक लाभप्रद होती हैं। सर्वाधिक सफल कंपनियों में से ज्यादातर अब पर्यावरण संबंधी मुद्दों से होनेवाले व्यवसायिक लाभ को सुस्पष्ट रूप से देख पा रही हैं।

 

 

अपने कार्बन फुटप्रिंट का हिसाब लगाने और उत्सर्जन को कम करने के लाभ मुझे मालूम हैं, किन्तु मेरे पास अनुसंधान करने और खुद आवश्यक कार्रवाई करने का समय नहीं है। क्या कोई मेरी मदद कर सकता है?

कार्बन यात्रा डॉट कॉम Carbonyatra.com आपके लिए आदर्श कार्बन कार्यक्रम के आकलन, दस्तावेज तैयार करने, और स्वैच्छिक कार्बन क्रेडिट की बिक्री में आपका मददगार हो सकता है। आपको यह देखना है कि कौन सा कार्यक्रम आपकी परियोजना के लिए सबसे अच्छा रहेगा। यह उत्पन्न होने वाले कार्बन क्रेडिट्स की मात्रा, आकार, क्रेता की आवश्यकताओं, लागत तथा निवेश पर मिलने वाले प्रतिलाभ पर निर्भर करेगा।

सभी कॉर्पोरेट कार्बन फुटप्रिंट्स की निष्पक्ष एजेंसी से लेखा-परीक्षा करना आवश्यक होता है। और अधिक जानकारी के लिए कार्बन यात्रा डॉट  कॉम carbonyatra.com से संपर्क करें। कार्बन फुट-प्रिंटिंग पर डिमॉन्स्ट्रेशन के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें।
 

http://www.carbonyatra.com/carbon_calculator.php.

 

स्रोत: सामग्री  CARBONyatra के सहयोग से विकसित