साझेदारी प्रतिष्ठान

साझेदारी प्रतिष्ठान

जब दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी ऐसे व्यवसाय के लाभ का साझा करने के लिए सहमत होते हैं, जो उन सभी के द्वारा अथवा उन सभी की ओर से उनमें से किसी एक के द्वारा चलाया जाए, तो उन व्यक्तियों के बीच के संबंध को साझेदारी कहा जाता है। इस स्वरूप की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :

  • गठन में आसानी (कोई विस्तृत कानूनी गतिविधियाँ नहीं)
     

  • न्यूनतम साझेदार -2, अधिकतम साझेदार - 10 बैंकिंग में), 20 ( अन्य सभी व्यवसायों में)


 

  • विधिक अस्तित्व का कोई पृथक्करण नहीं.
     

  • प्रत्येक साझेदार के लिए संपत्ति का स्वामित्व परस्पर एक दूसरे के लिए प्रबंध का अधिकार देता है।

 

  • साझेदारों की देयता असीमित 

  • हितों के अंतरण पर प्रतिबंध

  • सीमित जीवन काल (यदि एक भी साझेदारी इसे कायम रखने में समर्थ नहीं है तो इसे समाप्त किया जाना चाहिए)

  • पूंजी के लिए बड़ी राशि जुटाने में कठिनाई

  • भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 द्वारा शासित

 

लाभ

हानि

गठन में आसानी

अंतिम प्राधिकारी की अनुपस्थिति

अपेक्षाकृत अधिक पूँजी तथा ऋण संसाधन

अन्य साझेदारों के कार्यों के लिए देयता

बेहतर निर्णय तथा अधिक प्रबंधकीय गतिविधि

सीमित जीवन

 

असीमित देयता


उपयुक्तता : मझोले आकार के कारोबार जिनमें सीमित पूंजी की जरूरत हो।