पूर्ण स्वामित्व वाले प्रतिष्ठान

 

यह कारोबार का सबसे पुराना तथा सबसे सामान्य स्वरूप है। इस स्वरूप की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं :

  • गठन में आसानी (कोई विस्तृत विधिक औपचारिकताएं नहीं)

  • पूँजी स्वयं मालिक द्वारा प्रदान की जाती है।

  • पूर्ण नियंत्रण

  • स्वामित्व का कोई पृथक्करण नहीं

  • असीमित देयता

  • निरंतरता का अभाव - यदि मालिक मर जाए तो कारोबार समाप्त

  • पूंजी जुटाने में कठिनाई

लाभ

हानि

गठन में आसानी

सीमित पूंजी

मालिक को अच्छा कार्य करने के लिए प्रोत्साहन

सीमित प्रबंधकीय क्षमता

शीघ्र निर्णय तथा लोचशीलता

सीमित जीवन

व्यवसाय की गोपनीयता

असीमित देयता


निम्नलिखित के लिए उपयुक्त :

  • मध्यम जोखिम वाले व्यवसायों के लिए

छोटे वित्तीय संसाधन तथा छोटी पूँजी आवश्यकताएं

 

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