आपूर्तिकर्ता का मूल्‍यांकन

संभावित आपूर्तिकर्ताओं को चिन्‍हित करने के पश्‍चात यह आवश्यक हो जाता है कि उनमें से सही विक्रेता को चुनने के लिए उनका मूल्‍यांकन किया जाए।

 

आपूर्तिकर्ता के मूल्‍यांकन के मुख्‍य कारक है :-

1              गुणवत्‍ता

2              मात्रा और सुपुर्दगी

3              सेवा

4              मूल्‍य

 

गुणवत्‍ता

विक्रेताओं का चुनाव करते समय सबसे महत्वपूर्ण कारक है, वस्‍तुओं की गुणवत्ता / विक्रेता द्वारा उपलब्‍ध कराई जा रहा सेवाऍं, चूँकि उत्‍पादन की गुणवत्‍ता पर निविष्टि/ कच्चे माल / सेवा की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव पड़ता है ।

विक्रेताओं की गुणवत्‍ता का मूल्‍यांकन करते समय विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:-

 

विशिष्‍टताओं का पुष्टिकरणः खरीद के प्रस्‍ताव और आदेश में उत्‍पाद और सेवा की विशिष्‍टताएँ अवश्‍य इंगित की जानी चाहिए । इन विशिष्टताओं का निर्धारण विक्रेता के नमूना उत्‍पादों / सुविधाओं के भौतिक निरीक्षण के माध्‍यम से किया जा सकता है ।

 उद्योग मानक उत्‍पाद / सेवा : विक्रेता के उत्‍पाद और सेवाऍं उद्योग के न्यूनतम मांनदंडों के अनुरूप होने चाहिए ।

विश्‍वसनीयता : विक्रेता के उत्‍पाद/ सेवाऍं विश्‍वसनीय होनी चा‍हिए । इस का निर्धारण बाहरी स्रोतों के माध्यम से बाजार में विक्रेता की प्रतिष्‍ठा के बारे में प्राप्त प्रतिपुष्टि के आधार पर किया जा सकता है।

टिकाऊपन : विक्रेता के उत्‍पाद की तुलना उसके स्थायित्व  के आधार पर की जानी चाहिए। इस का निर्धारण बाहरी स्रोतों के माध्यम से बाजार में विक्रेता की प्रतिष्‍ठा के बारे में प्राप्त प्रतिपुष्टि के साथ-साथ विक्रेता द्वारा प्रदान की जा रही वारंटी के आधार पर किया जा सकता है।

वारंटी : विक्रेता का मूल्यांकन उसके द्वारा उत्‍पाद पर प्रदत्‍त समुचित वारंटी के आधार पर किया जा सकता है ।

अनुपालन : विक्रेता खरीद आदेश में दी गई शर्तों को पूरा करने के योग्‍य होना चाहिए ।

 

मात्रा और सुपुर्दगी

विक्रेता के मूल्‍यांकन का एक दूसरा कारक है वस्‍तुओं की मात्रा। तथापि, वस्‍तुओं की सुपुर्दगी सही मात्रा में करने की क्षमता का मूल्यांकन सुपुर्दगी के दौरान लिए गए समय को ध्‍यान में रखते हुए किया जाना चाहिए ।

 समय : विक्रेता वस्‍तुऍं / सेवाऍं निर्धारित समय में प्रदान करने के योग्‍य हों। विक्रेता द्वारा समय पर सपुर्द किए गए खरीद आर्डर के पिछले अनुभव को भी ध्यान में रखा जाए।

मात्रा :  विक्रेता फर्म द्वारा वांछित सारी मात्रा को सप्लाई करने के योग्‍य हों। इसका मूल्यांकन विक्रेता की उत्पादन क्षमता / पिछले अनुभव को ध्यान में रख कर किया जा सकता है।

पैकेजिंग : विक्रेता द्वारा की गई पैकिंग टिकाऊ, समुचित रूप से चिन्‍हित और क्षतिवि‍हीन होनी चाहिए । पटिटकाऍं सही आकार की होनी चाहिए ।

तत्‍काल सुपुर्दगी : उत्पादों की तत्काल सपुर्दगी के संदर्भ में भी  विक्रेताओं  योगयता को परखा जा सकता है ।

 

सेवा

 विक्रेताओं का मूल्‍यांकन करते समय विक्रेता द्वारा खरीद के समय और खरीद के बाद प्रदान की जा रही सेवाओं पर विचार करना एक महत्वपूर्ण कारक है।

विक्रय प्रतिनिधि :  विक्रेता फर्म के विक्रय प्रतिनिधियों में इतनी योग्यता होनी चाहिए कि वे बिक्री के समय अपने उत्‍पादों के बारे में प्रबन्‍धन वर्ग को आश्‍वस्‍त कर सकें। साथ ही,  वे प्रदान किए जा रहे अपने उत्‍पादों की समुचित जानकारी, कीमतों और तकनीकी जानकारी प्रदान करते ङुए अपनी क्षमताओं को उजागर करने में सक्षम हो ।

उत्‍पाद की जानकारीः विक्रेता को फर्म की उत्‍पाद संबंधी आवश्‍यकताओं की समझ होनी चाहिए, ताकि वह फर्म की आवश्‍यकताओं की पूर्ति से संबंधित विभिन्‍न प्रश्‍नों के उत्‍तर दे सके ।

बिक्री उपरान्‍त सेवाएँ : बिक्री उपरान्‍त सेवाओं के साथ-साथ विक्रेताओं का मूल्‍यांकन उनके द्वारा नियमित तकनीकी सहायता और किसी आपाती स्थिति के दौरान प्रदान की जा रही सोवाओं के आधार पर किया जा सकता हे। विक्रेता कम से कम समय में किसी समस्या को हल करने में सक्षम होना चाहिए।

 

मूल्‍

 विक्रेताओं के चयन में यह कारक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यदि अधिकतर विक्रेता उत्‍पाद की गुणवत्त, फर्म द्वारा की गई सपुर्दगी और सेवाओं के स्‍तर पर एक समान पाए जाते हैं तो प्राय़-, न्‍यूनतम मूल्य इंगित करने वाले को ही चुना जाता है।