कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व

Corporate Social Responsibility

व्यावसायिक उद्यम के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक दायित्व

सामाजिक दायित्व से आशय है ऐसे कृत्यों के लिए नीतिबद्ध होना अथवा नैतिक रूप से जिम्मेदार होना जो किसी व्यक्ति, संस्था अथवा समूचे समाज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में योगदान करते हैं। व्यावसायिक उद्यमों के लिए सामाजिक दायित्व का अर्थ है व्यावसायिक गतिविधि से जुड़ा हुआ आत्म विनियमन जो टिकाऊ उद्यमिता तक ले जाता है।

टिकाऊ उद्यमिता  नीतिबद्ध रूप में व्यवहार करने और समाज के जीवन में सुधार लाने के साथ-साथ आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में योगदान करने की व्यवसाय की वचबद्धता और जिम्मेदारी है। इस प्रकार टिकाऊ उद्यमिता  संगठनात्मक परिवर्तन के उद्देश्य से वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों, निवेश, प्रौद्योगिकीय विकास के दीर्घकालिक आवंटन की ओर उन्मुख होती है। तदनुसार, टिकाऊ उद्यमिता अधिकांशतः ऐसे बड़े उद्यमों द्वारा अपनाई जाती है जो अधिक संख्या वाले हितधारकों जैसे ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं, विनियामकों आदि से अर्ध-विधिक अथवा स्वनियामक नीति के रूप में संपर्क में आते हैं, जिसे "कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर)” कहते हैं।


किन्तु सामाजिक दायित्व का दायरा बड़े उद्यमों की परिधि से बाहर भी जा सकता है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम भी सामाजिक दायित्व संबंधी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, जिसे उद्यम सामाजिक दायित्व (ईएसआर) कहा जाता है।

एमएसएमई के लिए उद्यम सामाजिक दायित्व (ईएसआर) का क्या आशय है?

दि इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर स्टैंडर्डाइडेशन (आईएसओ) के आईएसओ 26000 कार्यदल ने ईएसआई/सीएसआर की एक कामचलाऊ परिभाषा दी है, जो इस प्रकार है:

“…वह पद्धति जिससे फर्में सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक सरोकारों को अपने मूल्यों, संस्कृति, निर्णय-प्रक्रिया, रणनीति एवं परिचालनों में पारदर्शी व जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से शामिल करती हैं और इस प्रकार फर्म के भीतर बेहतर पद्धतियाँ स्थापित करती हैं, संपत्ति निर्मित करती हैं और समाज को सुधारती हैं।”


इस परिभाषा में दो आयामों का संकेत है जिनके ज़रिए एमएसएमई ईएसआर गतिविधियों में संलग्न हो सकती हैं:

  • आंतरिक रूप से अपने विभिन्न व्यवसायिक परिचालनों में। आंतरिक ईएसआर में मुख्य रूप से सामाजिक अनुपालन शामिल होता है, जो मानव संसाधन कल्याण और पर्यावरण में अनुकूल योगदान पर केन्द्रित है।
  • बाहरी रूप से ऐसे गतिविधियों में जो उनके व्यवसाय से सीधे संबंधित नहीं हैं। बाहरी ईएसआर गतिविधियाँ दयालुता अथवा दान के माध्यम से शिक्षा व सामाजिक सेवाओं को बढ़ावा देने के ज़रिए समुदाय विकास पर केन्द्रित होती हैं, जिन्हें आम तौर पर एमएसएमई और बड़े उद्यम करते हैं।

 

बड़े उद्यमों की तुलना में एमएसएमई को ईएसआर गतिविधियाँ निष्पादित करने में क्या कठिनाइयाँ होती हैं?

ईएसआर में एमएसएमई को यह दायित्व दिया गया है कि वे उन सभी तत्वों के कल्याण और भलाई की दिशा में काम करें, जो व्यवसायिक वातावरण पर बुरा प्रभाव डालते हैं। किन्तु बड़े उद्यमों की तुलना में एमएसएमई का आकार व परिचालन सीमित होता है, जो ईएसआर को सीएसआर से अलग करनेवाला मुख्य कारक है। एमएसएमई द्वारा अनुभव की जानेवाली मुख्य बाधाएँ निम्नलिखित हैं। ये न केवल एमएसएमई के जीवन पर असर डालती हैं, बल्कि सामाजिक दायित्व से संबंधित गतिविधि का चयन करने में भी बाधक बनती हैं:

  • सीमित संसाधन (जनशक्ति, वित्तीय, प्रबंधकीय, विपणन आदि)
  • पैमाने या क्षेत्र की सीमित मितव्ययिता
  • उन्नत प्रौद्योगिकी के लाभों की कमी
  • सीमित श्रम विभाजन
  • उत्पाद /बाजार/ क्रेता पर पूरी निर्भरता
  • विविधीकरण की कमी के कारण कम बारगेनिंग पावर और उच्च जोखिम।

 

ईएसआई गतिविधियाँ संचालित करने के लाभ क्या हैं?

 

पूँजी तक आसान पहुँच

एमएसएमई को ऋण-प्रदायगी के निर्णय के लिए वित्तीय संस्थाएं ऐसी व्यवसाय योजना पर विचार कर सकती हैं, जिसमें प्रभावी ईएसआर प्रबंधन के प्रमाण हों। इस तरह की व्यवसाय योजना में उद्यमी की दीर्घकालिक निवेश लक्ष्यों में निवेश की क्षमता का निदर्शन हो सकता है।

वैश्विक बाजार तक पहुँच

चुनिंदा विकसित राष्ट्रों जैसे अमेरिका, जापान और यूरोपियन यूनियन के देशों द्वारा मानकों व प्रणामनों के अनुपालन से निर्यात-उन्मुख एसएमई के लिए प्रतिष्ठा और अनवरत व्यवसायिक जुड़ाव फैसिलिटेट हो सकता है।

सकारात्मक ब्रान्ड ईक्विटी

ईएसआर से जुड़नेवाले एमएसएमई सुदृढ़ प्रतिष्ठा अथवा ब्रान्ड ईक्विटी पैदा कर पाते हैं और इस प्रकार वे अपने ग्राहकों/क्रेताओं के मन में विश्वसनीय तथा उत्तरदायी उद्यम की छवि बना पाते हैं।

मानव संसाधन का प्रभावी धारण

आंतरिक ईएसआर गतिविधियों से जुड़ी कंपनियाँ अपने यहाँ काम-काज का बहुत अनुकूल वातावरण तैयार कर पाती हैं, जो नैतिकता सुधरी हुई स्थितियों पर आधारित होता है। इससे अंततः मानव संसाधनों के विकास में वृद्धि होती है और कर्मचारियों द्वारा काम छोड़कर जाने की दर में कमी आती है।

उत्पादकता में सुधार

अनुकूल कार्य-वातावरण में कर्मचारियों की दक्षता ऊँची रहती है जो उत्पादकता में सुधार और लागत में बचत के रूप में सामने आती है।

कारगर सप्लाई चेन संबंध

जिन एमएसएमई ने अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन व मानकीकरण को औपचारिक रूप से कार्यान्वित किया है, वे वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़कर उनका लाभ उठा सकते हैं। यह जुड़ाव घरेलू कंपनियों तथा भारत व विदेश स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लगातार व्यवसाय प्रदान कर सकता है।

जोखिम प्रबंधन में सुधार

सामाजिक रूप से जिम्मेदार उद्यम जिसते अपने घरेलू व विदेशी हितधारकों से रिश्ते अच्छे हैं, वह किसी भी विनियामक, आर्थिक, सामाजिक व पर्यावरणीय घटना अथवा अचानक आनेवाली परिस्थिति को समझने तथा उससे निपटने की दृष्टि से अनुकूल स्थिति में होता है।

सशक्त छवि

कंपनी के हितधारकों के संबंधों में लगातार सुधार होने के कारण उसकी छवि सशक्त होती जाती है जिससे सार्वजनिक, निजी और नागरिक समाज से संबंधों में मजबूती आती जाती है।

 

सीएसआर गतिविधियों के कार्यान्वयन में भारतीय एमएसएमई खास तौर से किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं?

अपने व्यवसायिक परिचालनों में ईएसआर गतिविधियों का कार्यान्वयन करते समय एमएसएमई मुख्य रूप से कुछ चुनौतियों का सामना करते हैं। चार प्रमुख चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:
 

व्यवसायिक टिकाऊपन

एमएसएमई को दीर्घ-काल में टिकाऊ होना चाहिए, ताकि उसके वित्तीय लाभ उसकी ईएसआर गतिविधियों के कार्यान्वयन से अधिक हों।

निगरानी, प्रमाणन और रिपोर्टिंग

एमएसएमई में कार्यान्वित ईएसआर गतिविधियों की विश्वसनीयता और निर्भरता की प्रक्रिया भारत में आम तौर पर परिभाषित नहीं है। इसलिए ईएसआर गतिविधियों का पालन कर रहे उद्यमों की जवाबदेही और सत्यापन की निगरानी और/अथवा रिपोर्टिंग नहीं होती। किन्तु ज्यादातर एमएसएमई कतिपय ईएसआर गतिविधियों के लिए चुनिंदा प्रमाणन हासिल करते हैं, ताकि ग्राहकों से मिलनेवाले कारोबारी ऑर्डर मिल सकें।

ईएसआर को सप्लाई-चेन की मुख्य धारा में लाना

भारत में ऐसी मानक प्रक्रियाएँ नहीं हैं, जिनसे ईएसआर को सप्लाई-चेन की मुख्य धारा में लाने में मदद मिले। इसलिए सप्लाई चेन में ईएसआर अनौपचारिक रूप से कुछ ऐसे एमएसएमई द्वारा कार्यान्वित किया जाता है, जिन्होंने क्षमता निर्माण और वित्तीय सहायता प्रदान करने जैसी गतिविधियाँ हाथ में ली हुई हैं।  साथ ही, सप्लाई-चेन में ईएसआर की निगरानी अचानक किए जानेवाले निरीक्षणों अथवा हितधारकों द्वारा साइट विजिट के माध्यम से की जाती है।

सार्वजनिक नीति की भूमिका

एमएसएमई में ईएसआर के लिए व्यवहार्य वातावरण के विनियमन व सक्षमकारी बनाने में भारत में सार्वजनिक नीति स्व-प्रेरणा से कोई भूमिका नहीं निभाती। तदनुसार भारत के एमएसएमई में सार्वजनिक नीति चार प्रमुख दायित्व निभा सकती है, जो इस प्रकार हैं- अनिवार्य बनाना, सहभागिता करना, सुविधाकारी बनाना और ईएसआर गतिविधियों को विज्ञापित करना।

एमएसएमई, सरकारी निकाय, परामर्श एजेंसियाँ आदि समूहबद्ध होकर और स्वतःसक्रियात्मक दृष्टिकोण अपनाकर उपर्युक्त चुनौतियों का मुकाबला कर सकती हैं।