प्लास्टिक

Plastics

 

प्लास्टिक भारतीय अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य अंग है।  प्लास्टिक का प्रयोग पैकेजिंग, मूलभूत संरचना, प्रसंस्कृत खाद्य तथा  उपभोक्ता टिकाउ€ वस्तुओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों में होता  है।  

 

भारतीय प्लास्टिक उद्योग में 25000 से भी अधिक इकाइयाँ शामिल हैं, जिनमें से 10 से 15% को मध्यम स्तर की इकाइयों और शेष अन्य को लघु स्तर की इकाइयों के रूप  में वर्गीकृत किया जा सकता है।  वर्ष  2008-09 के दौरान 16500 करोड़ रुपये का प्लास्टिक निर्यात किया गया। प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग से  प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से  33 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।   वर्ष 2000-2005 के दौरान प्लास्टिक प्रसंस्करण क्षेत्र की संस्थापित क्षमता 8% की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से बढ़ी और यह 8270 किलो टन से बढ़कर 11167 किलो टन हो गई ।  इससे सरकार को  प्रतिवर्ष 6900 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।

 

भारत में प्लास्टिक उद्योग 4 भागों में विभाजित है - जिनमें पोलिमर्स, संसाधित प्लास्टिक, उपकरण विनिर्माता और रिसाइक्लिंग इकाइयाँ शामिल हैं। संसाधित प्लास्टिक,  उपकरण विनिर्माता और रिसाइक्लिंग इकाइयाँ मुख्यतः असंगठित स्वरूप की हैं, जबकि पोलिमर क्षेत्र रिलायंस, गेल, फिनोलेक्स तथा हल्दिया जैसी बड़ी कम्पनियों की उपस्थिति से अधिमान्यतः संगठित प्रकृति का है।

 

वर्ष 1991 के बाद प्लास्टिक उद्योग को नई ज़िन्दगी मिली, जब विकसित देशों के  संयुक्त उद्यमों, विदेशी निवेशकों तथा प्रौद्योगिकी तक पहुंच ने इस उद्योग को प्रेरित किया।  प्लास्टिक उद्योग का समर्थन करने वाले प्लास्टिक मशीनरी  क्षेत्र के सथ-साथ  पैट्रो रसायन क्षेत्र दोनों में हुई जबरदस्त वृद्धि  से इस क्षेत्र को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार   दोनों  को सेवा प्रदान करने के लिए अपनी क्षमताओं का निर्माण करने में मदद मिली है।  

 

विभाजित प्रकृति वाले प्लास्टिक उद्योग में उत्पादन कम मात्रा में होता है, जिसके कारण उत्पादन की लागत बढ़ जाती है।  तथापि, पोलिमर क्षेत्र में भारत का आधार मजबूत है  और इसे कम लागत में श्रमिक तथा अधिक मात्रा में  रिसाइक्लि प्लास्टिक भी असानी से उपलब्ध हो जाता है।   इस उद्योग को अपने उत्पादों  का निर्यात करने पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ विद्यमान हैं।  भारत के साथ प्लास्टिक उत्पादनों का व्यापार करने वाले शीर्ष स्तर के 10 साझेदार देशों में  यूएसए, यूएई, इटली, यूके, बेल्जियम, जर्मनी, सिंगापुर, साउदी अरब, चीन तथा हांगकांग शामिल हैं।

 

अगले दो दशकों में भारत में प्लास्टिक उद्योग में  अभूतपूर्व अवसर मिलने की संभावनाएँ हैं। भारत में प्लास्टिक की प्रति व्यक्ति खपत  विश्व की औसतन खपत का पाँचवा हिस्सा है अर्थात विश्व के औसत 25 किलोग्राम प्रति व्यक्ति की तुलना में यह 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है।  इससे पता चलता है कि भारत में अभी भी अपार संभावनाएँ तलाशी जा सकती हैं।   वर्ष 2008 में विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा काफी कम अर्थात 1.6% था।  वर्ष 2012 तक इसके दोगुना होकर 3.2% होने की संभावना है। इसके साथ-साथ प्लास्टिकल्चर ( जो भारत में आरंभिक चरण में है) और  संसाधित प्लास्टिक निर्यात में भी अवसर  विद्यमान हैं।  फिलहाल इन क्षेत्रों में भारत की  उपस्थिति  नगण्य है।  

 

आँकड़ों का स्रोत : आईसीपीई, क्रिसल रिपोर्ट, सिपेट, प्लेक्सकाँसिल, योजना आयोग

Relevant Reports
Indian Plastics Industry Vision 2012->Indian Center for Plastics In Environment (ICPE)
Strategic Analysis and Road Map for Penetrating the US markets for Plastic Consumer Products
A Strategic Supply Side Analysis Of Indian Exporters of Plastic Consumer Products
Bio-degradable Plastics- Impact on Environment
The Plastics Conundrum What is the Way Out?
Rubber and Plastics
Evolution of packaging: Trend and growth of the plastic Industry