चर्म उद्योग

Leather

 

चर्म उद्योग का भारतीय अर्थव्यवस्था में विशेष स्थान है।  इस उद्योग को निर्यात के क्षेत्र में नियमित रूप से अत्यधिक आय अर्जित करने के लिए जाना जाता है और इस प्रकार इसकी गणना देश के लिए विदेशी विनिमय अर्जित करने वाले शीर्ष क्षेत्रों में होती है। भारतीय चमड़ा उत्पादों के प्रमुख बाजारों में जर्मनी का हिस्सा 14.12%, इटली का 12.82%, यूके का 11.48%, यूएसए का 9.9 8%, हांगकांग का 6.61%, स्पेन का 6.9% फ्रांस का 6.14%, नीदरलैंड का 4.13%,  यूएई का 2.38% और आस्ट्रेलिया का हिस्सा 1.55% है।  भारत के कुल चमड़ा उत्पादन निर्यात का लगभग 75.30% निर्यात इन 10 देशों में होता है। भारत में वित्तीय वर्ष 2009 के दौरान  32100 करोड़ रुपये से भी अधिक की वार्षिक बिक्री हुई।  पिछले दशक के दौरान चमड़ा एवं चमड़ा उत्पाद के निर्यात में काफी अधिक वृद्धि हुई और यह वित्तीय वर्ष 2009 में 16500 करोड़ रुपये पर पहुँच गया, जो कि लगभग 9.58% की संचयी वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है।

विश्व के पशुओं और भैंसों की कुल संख्या का 21% तथा बकरियों और भेडों की कुल संख्या का 11% भारत में है, जिससे यहाँ चमड़ा उद्योग के लिए कच्चा माल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।  इसके अलावा, यह देश पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कुशल मानव शक्ति, नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी, अधिकाधिक उद्योगों द्वारा पर्यावरण संबंधी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन और सहयोगी उद्योगों के समर्पित सहयोग के कारण लाभप्रद स्थिति में है।

चमड़ा उद्योग रोजगार प्रधान क्षेत्र है और इससे लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार मिलता है, जिनमें से अधिकतर लोग समाज के कमजोर वर्गों से होते हैं।  चमड़ा उत्पादन क्षेत्र में 30% भागीदारी के साथ महिलाओं का पहले से ही वर्चस्व है। 

भारतवर्ष  जूता-चप्पल और चर्म-निर्मित परिधानों का उत्पादन करने वाले देशों में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है, किन्तु विश्व के 5.8 लाख करोड़  रुपए  के चमड़ा आयात व्यापार में इसकी हिस्सेदारी मात्र लगभग 3% ही  है। 

देश में चर्म एवं चमड़े से बनी वस्तुओं का उत्पादन करने वाले प्रमुख केद्र हैं - तमिलनाडु में चेन्नै, अम्बुर, रानीपेट, वानियांवड़ी, त्रिची, डिंडिगुल;  पश्चिम बंगाल में - कोलकाता; उत्तर प्रदेश में - कानपुर, आगरा और नोएडा; महाराष्ट्र में - मुंबई;  पंजाब में - जालंधर; कर्नाटक में - बेंगलूर ; आंध्र प्रदेश में - हैदराबाद;  हरियाणा में अम्बाला, गुडगाँव, पंचकुला और करनाल; दिल्ली है।

भारत सरकार ने निर्यात संवृद्धि और रोजगार सृजन की व्यापक संभावनओं को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2009 की अपनी विदेश व्यापार नीति में चमड़ा क्षेत्र को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है, जिस पर  विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।  तदनुसार, सरकार चमड़ा क्षेत्र के विकास के लिए विदेश व्यापार नीति के तहत ऐसे बहुत-से प्रयासों को   कार्यान्वित करने की प्रकिया में है, जिनसे इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा सके।

औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के साथ-साथ निर्यात संवर्द्धन गतिविधियों को कार्यान्वित करके तथा पिछले कार्य-निष्पादन और उद्योगों की अन्तर्निहित क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए, भारतीय चमड़ा उद्योग का लक्ष्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है, ताकि  वित्तीय वर्ष 2014 तक निर्यात को बढ़ाकर 32300 करोड़ बिलियन रुपये किया जा सके और अन्य दस लाख लोगों के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराएँ जा सकें।

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