कागज़ एवं कागज़ उत्पाद

Paper and Paper Products

देश में सामाजिक-आर्थिक विकास की दृष्टि से कागज़ उद्योग देश का सबसे पुरान और अति महत्वपूर्ण उद्योग है।  इस उद्योग का अनुमानित आकार 25000 करोड़ रंपये ( 5.95 बिलियन डॉलर) है।  विश्व के कागज और कागज बोर्ड उत्पाद में इसका हिस्सा लगभग 1.6% है।  इस उद्योग से 1.20 लाख लागों को प्रत्यक्ष रूप से और 3.40 लाख लोगों को परेक्ष रूप से रोजगार मिला हे।   अधिकतर पेपर मिल  पिछले लम्बे अर्से से  कार्य कर रहे हैं और इस प्रकार वर्तमान समय में इनमें पुरानी से लेकर अति आधुनिक तकनीक वाली दोनों प्रकार की प्रौद्योगिकियाँ इस्तेमाल हो रही हैं।

 

पिछले पाँच वर्षों से कागज़ की खपत लगभग 6% वार्षिक दर से बढ़ रही है।  कागज़ उद्योग को कागज के उत्पादन की किस्म के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है; जैसे क्रीमवोव, मैपलिथो, कोपलर, कोटेड पेपर, इंडिस्ट्रयल पेपर और स्पेस्लिटी पेपर। इंडिस्ट्रयल पेपर अधिक मात्रा में इस्तेमाल होता है, जो कि कुल खपत का लगभग 60% है।

 

अभी तक कागज उद्योग की वृद्धि सकल घरेलू उत्पाद में हुई वृद्धि के बाराबर रही है और पिछले कुछ वर्षों के दौरान इसमें औसतन 6-7% की वृद्धि हुई है।  विश्व स्तर पर भारत में कागज का बाजार तेजी से बढ़ रहा है ओर यह उत्सावर्घक स्थिति को दर्शाता है।    आर्थिक संवृद्धि के साथ कागज की खपत में भी अत्याधिक उछाल आने की संभावनाएँ हैं और यह 2015-16 तक 13.95 मिलियन टन तक पहुँच सकता है।  भावी अनुमान यह हे कि कागज की खपत में सकल घरेलू उत्पाद के गुणांकों में  वृद्धि होगी और इसप्रकार प्रति व्यक्ति 1 किलाग्राम खपत की वृद्धि से उसकी मांग में 1 मिलियन टन की वृद्धि होगी।  उद्योग के अनुमानानुसार वर्ष 2012-13 तक  कागज़ उत्पादन 8.4% संचयी वार्षिक वृद्धि दर(सीएजीआर) से बढ़ेगा, जबकि कागज की खपत 9%  संचयी वार्षिक वृद्धि दर(सीएजीआर) से बढ़ेगी।


Source: Indian Paper Manufacturer’s Association

Relevant Reports

Tips: 
Refer to the links below for support organisations and best practices