रत्न एवं आभूषण

gems and jewellery

भारत में रत्न एवं आभूषण उद्योग दूसरे एमएसएमई उद्योगों की तरह अति विभाजित उद्योग है।  रत्न एवं आभूषण उद्योग की इकाइयाँ संगठित क्षेत्र की तुलना में असंगठित क्षेत्र में अधिक हैं।  आभूषणों के अंतर्गत न केवल पारम्परिक सोने, बल्कि अलग-अलग किस्म के हीरे और प्लेनटिम से बने आभूषण भी शामिल होते हैं।  इस उद्योग में कीमती एवं अर्ध-कीमती पत्थरों का भी व्यापार होता है।

 

रत्न और आभूषण भारत की समृद्ध संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।  भारत में रत्न एवं आभूषण उद्योग के फलने-फूलने का प्राथमिक कारण इसकी यही  संस्कृति रही है।  इस कथन की पुष्टि आंकड़ों से भी होती है।  भारत में सोने की सबसे ज्यादा खपत होती है और विश्व में सोने की कुल खपत में भारत का हिस्सा 20% से भी अधिक है।  इस उद्योग का समग्र आकार 12400 करोड़ रुपये है।  इस उद्योग से प्रतिवर्ष कुल 75100 करोड़ रुपये  का निर्यात होता है, जो कि विश्व के रत्न और आभूषण बाज़ार का 4% है।  भारत विश्व का सबसे बड़ा हीरा काटने और उसको चमकाने के क्षेत्र में भारत विश्व का सबसे बड़ा केद्र भी  है।  घरेलू बाज़ार में इसकी ब्रिक्रियाँ  73500 करोड़ रुपये के बराबर हैं।

 

भारत में रत्न और आभूषण बाज़ार के लिए काफी सुविधाएँ उपलब्ध कराइचर गई हैं।   भारत विश्व का ऐसा देश है, जहाँ ब्रांडेड आभूषण का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और  इसके 40% वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की संभावना है। भारत में अति कुशल श्रमिक पर्याप्त संख्या में कम लागत पर आसानी से मिल जाते हैं।  बहुत-से डिजायन केद्र और प्रशिक्षण संस्थान भी खुल रहे हैं।  उत्तम गुणवत्ता वाले आभूषण बनाने के क्षेत्र में विश्व बाजार में भारत की अच्छी साख  है।  इस उद्योग में आधुनिक तकनीक वाली प्रौद्योगिकियाँ इस्तेमाल की जाती हैं, जिनकी तुलना विश्व की सर्वोत्तम प्रौद्योगिकी से की जा सकती है। 

 

भारत में अभी भी पर्याप्त संभावनाएँ तलाशी जा सकती हैं।  इसके लिए सरकार ने शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( जिसके लिए पूर्वानुमति आवश्यक नहीं है) की अनुमति प्रदान की है, रत्न और आभूषण पार्कों की स्थापना का प्रस्ताव रखा है और  आईआईजेएस हस्ताक्षर के आयोजन हेतु  रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद का समर्थन किया है।  यह आयोजन एशिया का सबसे बड़ा आभूषण मेला है।

 

यदि आगे देखें, तो यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ब्रांडेड आभूषण बाजार वर्ष 2010 तक 10100 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।  इसका निर्यात वर्ष 2006 के 78100 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2012 तक 1.2 लाख करोड़ तक पहुँचने की संभावना है।  रत्न और आभूषण उद्योग का भविष्य काफी उज्ज्वल है और अभी भी इसमें पर्याप्त संभावनाएँ तलाशी जा सकती हैं।

 

आंकड़ों का स्रोत : भारतीय निवेश  आयोग, जवाहरात एवं आभूषण  निर्यात संवर्द्धन परिषद


Relevant Reports
Gems & Jewellery Investment Opportunities- Gujarat->Industries Commisionerate- Govt. of Gujarat
Standards in Jewellery Business->All India Gems And Jewellery Trade Association
Amendments in the Provisions Relating to Gem & Jewellery Export Promotion Schemes EXIM Policy 2002-2007->Ministry of Finance
FICCI Study on Gems & Jewellery Industry->FICCI
Report on Gems and Jewellery->Indian Brand Equity Foundation
Human Resource and Skil Requirements in the Gems and Jewellery Sector->National Skill Development Corporation (NSDC)