सूचना प्रौद्योगिकी-सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र

ITes

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी-सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र ने देश के राजस्व में  महत्वपूर्ण योगदान किया है, जिसके कारण यह पिछले दशक में भी भारत की अर्थ-व्यवस्था में अधिकांश  वृद्धि करने वाला क्षेत्र बना रहा है।   इस क्षेत्र का योगदान  देश में रोजगार  और मूल्य सृजन में वृद्धि करने में भी रहा है और यह भारत में एक महत्वपूर्ण ब्रांड क्षेत्र के रूप में उभरा है।  ग्राहकों की मांगों और आवश्यकताओंड में आए बदलाव के कारण इस क्षेत्र में बेहतर दक्षता पैदा हुई है और लचीलापन आया है।  समय के साथ-साथ इस क्षेत्र ने अपनी सेवाओं का विविधीकरण किया है, उनके  लिए नए बाजार तैयार किए हैं,  अपने मूल्य मॉडलों में परिवर्तन किया है तथा अनुसंधान एवं विकास संबंधी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ चलाई हैं।  इन सभी पहलुओं से भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी-सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशें में भी अग्रणी उद्योग बन गया है।  भारत के  सूचना प्रौद्योगिकी - सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र उद्योग द्वारा  अर्जित राजस्व में निर्यात का वर्चस्व जारी रहा है।  सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अनुमानों के अनुसार,  भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी - सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र से निर्यात 28.6% की संचयी औसतन वृद्धि दर से बढ़ेगा और यह वित्तीय वर्ष 2002 के 34900 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2009 मे 2.1 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।   निर्यात वाहक क्षेत्र होने के बावजूद सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र - व्यवसाय संसाधन कार्यालय(बीपीओ) क्षेत्र ने घरेलू बाजारों में भी अच्छा व्यवसाय किया है और इस क्षेत्र में  इसकी घरेलू बिक्रियाँ  वित्तीय वर्ष 2002 के 11900 करोड़ रुपये से 22.2% की संचयी औसतन वृद्धि दर से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2009 में 56900 करोड़ रुपये हो गई हैं।

 

     भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी-सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र-व्यवसाय संसाधन कार्यालय(बीपीओ)उद्योग द्वारा जिन क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान की गई हैं, उनमें बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ और बीमा( बीएफएसआई-41%), उच्च प्रौद्योगिकी/दूर संचार(20%), विनिर्माण (17%), खुदरा (8%) क्षेत्रों से सर्वाधिक राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि  मीडिया, प्रकाशन एवं मनोरंजन, निर्माण एवं उपयोगिता, स्वास्थ्य देखभाल और एयरलाइन एवं यातायात क्षेत्र कम योगदान करने वाले क्षेत्र रहे हैं।

 

     सूचना प्रौद्योगिकी- सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र के  निर्यात में पिछले वर्षों के दौरान काफी वृद्धि हुई है और यह रोजगार सृजन का प्रमुख स्रोत बन गया है।  सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग के कुल रोगजार में  सूचना प्रौद्योगिकी- सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र के  निर्यात क्षेत्र की हिस्सेदारी वित्तीय वर्ष 2002 के 52.9% से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2009 में 77.6% हो गयी, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग के  कुल रोजगार में घरेलू बाजार का हिस्सा  वित्तीय वर्ष 2002 के 47.19% से घटकर वित्तीय वर्ष 2009 में 22.66% रह गया। पिछले कई  वर्षों से इस क्षेत्र के विकास में विनिर्माण, दूर संचार, बीमा, बैंकिंग, वित्त इकाइयों और हाल ही में खुदरा उद्योग का  प्रमुख योगदान रहा है। तथापि, सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा क्षेत्र- व्यवसाय संसाधन कार्यालय(बीपीओ) उद्योग क्षेत्र के व्यवसाय में निरंतर वृद्धि हो रही है।   भविष्य में इस उद्योग में मोबाइल अनुप्रयोगों और स्वास्थ देखभाल जेसे क्षेत्रों से योगदान मिलने की संभावना है।   भारतीय उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले लघु एवं मध्यम उद्यम अधिकाधिक संख्या में धीरे-धीरे सूचना प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों और सेवाओं को अपना रहे हैं।   वर्ष 2011 के अंत तक, भारत का सॉफ्टवेयर और सेवा निर्यात 2.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा और  वित्तीय वर्ष 2012, जो कि 11वीं पंचवर्षीय योजना का अंतिम  वर्ष है, में इन आंक डों के  3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने की  संभावना है।

 

Relevant Reports

Tips: 
Refer to the resources below for support organisations and best practices.