रसायन

Chemicals

देश के समग्र अर्थिक विकास में भारत के रसायन उद्योग का प्रमुख योगदान रहा है।  इस उद्योग की वस्त्र, कागज, रंगाई एवं वार्निस, चमड़ा आदि जैसे अन्य उद्योगों के साथ सशक्त संबद्धता रही है।  भारत सरकार के रसायन एवं पैट्रोरसायन विभाग के अनुमान के अनुसार भारतीय रसायन उद्योग का आकार वित्तीय वर्ष 2008 के दौरान 1.6 लाख करोड़ रुपये का था, जो कि भारत के सकल घरेलू  उत्पाद का लगभग 3% है।  वित्तीय वर्ष 2008 के दौरान भारत में इस उद्योग का कुल निर्यात एवं आयात अनुमानित रूप से क्रमशः 14% और 9% था।

यह क्षेत्र  मूल रसायन, विशिष्ट रसायन और उच्च ज्ञान आधारित रसायन नामक तीन क्षेत्रोंडड  में विभाजित है।

विश्व स्तरीय मानदंडों से तुलना करें, तो भारतीय रसायन उद्योग अब भी इस क्षेत्र में परिचालनरत बड़ी एवं लघु स्तर की मिली-जुली इकाइयों में विभाजित है।  पिछले दशक में सरकार ने इस क्षेत्र को राजकोषीय रियायतें प्रदान कीं, जिससे इसमें बड़ी संख्या में लघु उद्योग इकाइयाँ स्थापित हुईं।   मूल रसायन अपने 91800 कराड़ रुपये के बाजार मूल्य के साथ आकार में सबसे बड़ा क्षेत्र है, किन्तु अनुसंधान और विकास में जबरदस्त निवेश के कारण धीरे-धीरे  विशिष्ट रसायन और उच्च ज्ञान आधारित रसायन क्षेत्र का आकार भी बढ़ता  जा रहा है।  वित्तीय वर्ष 2008 में भारत के रसायन क्षेत्र में कुल निवेश अनुमानतः 2.8 करोड़ रुपये था।  विशिष्ट  रसायन क्षेत्र तथा उच्च ज्ञज्ञन आधारित रसायन क्षेत्र  का बाजार उसी वित्तीय वर्ष में क्रमशः 42200 करोड़ रुपये और 28800 करोड़ का होने की संभावना है।

मूल रसायन क्षेत्र भारतीय रसायन उद्योग क्षेत्र में सबसे पुराना क्षेत्र है। यह क्षेत्र उप-क्षेत्रों में बंटा हुआ है और अन्य क्षेत्रों के अलावा इसमें पैट्रोरसायन, अकार्बनिक रसायन, कार्बनिक रसायन, उर्वरक और कीटनाशक क्षेत्र भी शामिल हैं।  विशिष्ट रसायन क्षेत्र के अंतर्गत मुख्यतः बड़ी संख्या में लघु उत्पादक इकाइयाँ आती हैं।  यह क्षेत्र लागत के मामले में लाभप्रद स्थिति में है। फलस्वरूप इसमें छोटे उद्योग लगाए जाते है जिनमें उत्पादन की लागत कम होती है।  सरकार द्वारा अनुसंधान और विकास पर विशेष बल देने से इस उप क्षेत्र को काफी मदद मिली  है, जो कि पिछले दशक में हुई जबरदस्त वृद्धि से परिलक्षित होती है।  उच्च ज्ञान आधारित रसायन उप क्षेत्र के अंतर्गत औषधि-निर्माण, कृषि रसायन और जैव प्रौद्योगिकी शामिल होती हैं।  भारत सरकार द्वारा अनुसंधान और विकास की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के फलस्वरूप  विशिष्ट रसायन क्षेत्र की तरह ही ज्ञान आधारित रसायन उप-क्षेत्र ने भी जबरदस्त वृद्धि दर्शायी  है।

 इस क्षेत्र में परिचालनरत लघु एवं मध्यम उद्यमों ने इसके विकास और निर्यात में भी प्रमुख योगदान किया है।  रसायन उद्योग में परिचालनरत लघु एवं मध्यम उद्यमों को बड़ी कम्पनियों की तुलना में कतिपय लाभ मिल रहे हैं, जिनका विवरण निम्नवत हैः

  • कम निवेश की आवश्यकता
  • परिचालनों में लचीलापन
  • स्थान परिवर्तन की सुगमता
  • उपयुक्त देशीय प्रौद्योगिकी विकसित करने की क्षमता
  • आयात स्थानापन्न

पिछले दशक से भारत के रसायन उद्योग में जबरदस्त विविधता आई है।  आज मूल कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों, कीटनाशकों, रंगाई, रंग-द्रव्यों एवं मध्यवर्तियों, पैट्रो रसायनों, बढ़ियाँ और विशिष्ट रसायनों के साथ-साथ सौंदर्य एवं प्रसाधन सामग्री के उत्पादन में भारत की स्थिति मजबूत है।  आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग,  निरंतर अनुसंधान और विकास,  कच्चे माल के आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए घरेलू क्षमताओं का विकास जैसे घटक भारत के रसायन उद्योग को आगे ले जाने में प्रमुख भूमिका निभाएँगे। इसके अलावा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे भी ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।  भारतीय रसायन विनिर्माता अपने उत्पादनों का विस्तार भारत से बाहर भी कर रहे हैं, जिसके मद्देनज़र वैश्विक मानकों को पूरा करने की अनिवार्यता होगी।  इन मानकों को बेहतर कच्चे माल का प्रयोग करके, उत्पादन मे सुधार करके, सह-उत्पादों को कम करके और उनका उपयोग करके, ऊर्जा में कटौती करके और उसका संरक्षण करके, स्राव प्रबंधन, जल प्रबंधन, संयंत्र और उपकरणों का उन्नयन करके और कौशल का विकास करके किया जा सकेगा।

 

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