विशेषज्ञों से लाभ

 

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम परामर्शदाता (एमएसएमई मेंटर)

विभिन्न क्षेत्रों में व्यवसायिकों एवं विशेषज्ञों से मदद/मार्गदर्शन के लिए msmementor.in में जाएँ।

 

msmementor.in भारत का पहला ऐसा मंच है, जिस पर देशभर के व्यावसायिकों और सभी विषयों से संबंधित डाटाबेस एक सरल एवं खोजनेयोग्य फार्मेट में उपलब्ध है।  यह डाटाबेस देशभर के एमएसएमई के  उपयोग के लिए है, ताकि वे एक साधारण किन्तु सशक्त खोजनेयोग्य प्रक्रिया के माध्यम से उन व्यावसचियकों का पता लगा सकें, जो उनके लिए सहायक  हो सकते हैं।

 

इस  ऑनलाइन मंच पर व्यवसायी अपने प्रोफाइल प्रस्तुत कर सकते हैं और सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम अपनी आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञों तक पहुँच सकते हैं। इस प्रकार msmementor.in  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को अपनी क्षमताओं का निर्माण करने और प्रतिस्पर्द्धी क्षमता को बढ़ाने में सहायक है।  आरंभ में यह ऑनलाइन सेवा विशेषज्ञों को अपना पंजीकरण कराने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को व्यावसायिकों का पता लगाने के लिए नःशुल्क प्रदान की  जा रही हैं।

 

तकनीकी परामर्शदाता संगठन

 

 तकीनीकी परामर्शदाता संगठनों की स्थापना औद्योगिक परियोजनाओं के लिए तकनीकी परामर्श देने के उद्देश्य से की गई थी। इन संगठनों की स्थापना अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं(आईडीबीआई, आईसीआईसीआई, आईएफसीआई आदि) ने राज्य स्तरीय वित्तीय/विकास संगठनों और वाणिज्यिक बैंकों के सहयोग से हुई थी।  पूरे भारतवर्ष में कुल मिलाकर 18 राज्य-स्तरीय  तकनीकी परामर्श संगठन हैं।

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रेटिंग

क्रेडिट रेटिंग से किसी व्यक्ति अथवा संस्था की ऋण पात्रता(क्षमता) अर्थात उधारकर्ता की ऋण अदायगी क्षमता का अनुमान लगाया जाता है।  क्रेडिट रेटिंग तीसरे पक्षीय क्रेडिट मूल्यांकनकर्ता द्वारा की जाती है और यह लघु एवं मध्यम उद्यमों के ऋण प्रबंधन क्षमताओं को दर्शाती है।  रेटिंग का निर्धारण वित्तीय, गैर-वित्तीय मानदंडों, अर्थव्यवस्था और उस क्षेत्र के पिछले क्रेडिट इतिहास और भावी दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर किया जाता है, जिसमें  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम परिचालनरत हैं अथवा परिचालन आरंभ करने के इच्छुक हैं।

 

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प्रौद्योगिकी

ऐसी बहुत-सी सरकारी संस्थाएँ हैं, जो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को  प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन के लिए सहायता  प्रदान करते हैं।  भारत एसएमई प्रौद्योगिकी सेवा लि.(आईएसटीएसएल), राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी), राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम(एनएसआईसी), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक(सिडबी), आदि संस्थाएँ विभिन्न उद्योगों के लिए प्रौद्योटगिकी बैंक के रूप में कार्य कर रही  हैं।

 लघु उद्योगों की कार्यक्षमता और क्रेडिट रेटिंग के लिए भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और रेटिंग एजेंसियों के परामर्श से एक योजना बनाई गई है।  इस योजना को सूचीबद्ध एजेंसियों के माध्यम से कार्यान्वित करने हेतु एनएससीआई को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है।

 

लघु उद्योगों की कुल बिक्रियाँ

एनएसआई के माध्यम से शुल्क की प्रतिपूर्ति

50 लाख रुपये तक

शुल्क का 75% अथवा 25000 रुपये ( जो भी कम हों)

50 लाख रुपये से अधिक और 200 लाख रुपये तक

शुल्क का 75% अथवा 30000 रुपये ( जो भी कम हों)

200 लाख रुपये से अधिक

शुल्क का 75% अथवा 40000 रुपये ( जो भी कम हों)