एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए दिशानिर्देश

अपनी व्यवसाय संबंधी किसी विचार के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय सहायता का अनुरोध करते समय, आपकी कंपनी को एक परियोजना रिपोर्ट तैयार करनी होती है, जिसमें नीचे दिए गए विवरण के अनुसार परियोजना के कतिपय महत्त्वपूर्ण पहलू शामिल किए जाने होते हैं:

  • प्रवर्तक की पृष्ठभूमि / अनुभव
  • निर्मित की जाने वाली क्षमता सहित उत्पाद और शामिल प्रक्रियाओं का विवरण
  • परियोजना का स्थान
  • परियोजना लागत और उनके वित्तीयन के स्रोत
  • उपयोगी सुविधाओं की उपलब्धता
  • तकनीकी व्यवस्थाएँ
  • बाज़ार संबंधी संभावनाएँ और बिक्री की व्यवस्थाएँ
  • पर्यावरणीय पहलू
  • लाभप्रदता संबंधी प्रानुमान और वित्तीय सहायता की चुकौती की समग्र अवधि के लिए नक़दी प्रवाह  

चूँकि परियोजना के मूल्यांकन में निम्नलिखित क्षेत्रों में परियोजना का मूल्यांकन किया जाना होता है, अत: आपकी कंपनी को इस मामले में कुछ दस्तावेज़ /सूचनाएँ प्रस्तुत करनी होंगी।  

 

प्रबंधकीय मूल्यांकन

  • संस्था के बहिर्नियम एवं अंतर्नियम: उद्देश्य, प्राधिकृत एवं चुकता शेयर पूँजी, प्रवर्तक का अंशदान, उधार लेने की शक्ति, निदेशक मंडल में शामिल निदेशकों की सूची, निदेशकों की नियुक्ति की शर्तें।
  • प्रवर्तक के रूप में आपकी कंपनी : कंपनी की कॉर्पोरेट योजना, प्रवर्तित /क्रियान्वित /क्रियान्वयन के अधीन परियोजनाएँ, पिछली ऋण सहायता से संबंधित संव्यवहारों और चुकौती के बारे में बैंकर की रिपोर्ट, समूह की अन्य कंपनियों का विवरण, प्रवर्तक कंपनी का परिचालन, तुलनपत्र एवं लाभ-हानि लेखा।    
  • नए प्रवर्तक : शैक्षिक पृष्ठभूमि, किसी तरह का औद्योगिक अनुभव, परिवार की पृष्ठभूमि, आय के स्रोत, व्यक्तिगत संपत्तियों का विवरण, बैंकर का संदर्भ, आयकर /धनकर विवरणियाँ।
  • प्रबंधकीय एवं संगठनात्मक संरचना /व्यवस्था : निदेशक मंडल का संघटन, पूर्णकालिक निदेशकों का विवरण और उनकी जिम्मेदारियाँ, अर्हताओं व अनुभव सहित मुख्य कार्यपालक एवं कार्यकारी कार्यपालकों का विवरण, मौजूदा कंपनी और परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान नई कंपनी के लिए संगठनात्मक ढाँचा।

 

तकनीकी व्यवहार्यता

  • प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण प्रक्रिया : सिद्ध /नई प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी के चयन का आधार, प्रतिस्पर्द्धी प्रौद्योगिकियाँ, प्रौद्योगिकी पर आधारित संयंत्रों के कार्यनिष्पादन संबंधी आँकड़े /विवरण, प्रौद्योगिकी के लाइसेन्स–प्रदाता का विवरण, प्रक्रिया प्रवाह का चार्ट और वर्णन।
  • परियोजना का स्थान : स्थान संबंधी लाभ, कच्चे माल एवं अन्य उपयोगी सुविधाओं की उपलब्धता, मूलभूत संरचना संबंधी सुविधाएँ, श्रमिकों की उपलब्धता, पर्यावरणीय पहलू।
  • संयंत्र एवं मशीनें :  मशीनों एवं उपकरणों की सूची, आपूर्तिकर्ताओं का विवरण, प्रतिस्पर्द्धी दर-सूचियाँ (कोटेशन), प्रमुख उपकरणों का तकनीकी एवं वाणिज्यिक मूल्यांकन।
  • कच्चा माल, उपयोगी सुविधाएँ और श्रम-शक्ति :  कच्चे माल और उनके आपूर्तिकर्ताओं का विवरण, बिजली और जल आपूर्ति, श्रम-शक्ति संबंधी अनुमान का आधार, श्रम-शक्ति का विवरण, जैसे – प्रबंधकीय, पर्यवेक्षण संबंधी कर्मचारी, कुशल /अकुशल श्रमिक, प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताएँ, आदि।
  • संविदाएँ :  ठेकेदारों की तकनीकी जानकारी, इंजीनियरिंग, अधिप्राप्ति /खरीदारी, निर्माण, वित्तीय सुदृढ़ता और अनुभव के विस्तृत विवरण सहित उनके साथ किए जाने वाले करार।
  • परियोजना की निगरानी एवं क्रियान्वयन :  क्रियान्वयन की विधि, निगरानी दल का विवरण, क्रियान्वयन की विस्तृत समय-सारणी /कार्यक्रम।  

पर्यावरणीय पहलू: वायु, जल एवं भूमि प्रदूषण, प्रदूषणकारी /खतरनाक तत्त्वों की सूची, उनकी सुरक्षा, सँभलाई/रखरखाव और निपटान संबंधी व्यवस्थाएँ, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन, अपेक्षित एवं प्राप्त की गईं अनुमतियाँ एवं अनापत्ति प्रमाणपत्र, आदि।

वाणिज्यिक व्यवहार्यता

  • मात्रा एवं स्वरूप के संदर्भ में, प्रस्तावित उत्पाद की मौजूदा और भावी बाज़ार माँग एवं आपूर्ति।
  • विपणन रणनीति के माध्यम से, कुल बाज़ार में कंपनी के प्रस्तावित उत्पाद का हिस्सा।
  • उत्पाद का बिक्री मूल्य एवं निर्यात संभावनाएँ, यदि कोई हों।
  • वापसी-खरीद संबंधी व्यवस्था, यदि कोई हो।   

 

वित्तीय मूल्यांकन

  • परियोजना लागत  :  इसमें भूमि और परियोजना स्थल के विकास, भवन, संयंत्र एवं मशीनों की लागत, तकनीकी जानकारी एवं इंजीनियरिंग शुल्क, विविध स्थिर आस्तियाँ, प्राथमिक एवं परिचालन-पूर्व व्यय, आकस्मिक व्यय एवं कार्यशील पूँजी के लिए मार्ज़िन राशि शामिल होती है। आपकी कंपनी से अपेक्षित होता है कि वह यथार्थपरक अनुमान प्रस्तुत करे। परियोजना की लागत की उपयुक्तता की जाँच विभिन्न कारकों, जैसे - क्रियान्वयन अवधि, मुद्रास्फीति, विभिन्न करारों, दर-सूचियों, आदि के संदर्भ में की जाएगी।   
  • वित्तीयन के स्रोत :  वित्तीयन के स्रोतों में शेयर पूँजी और ऋण का उचित मिश्रण होना चाहिए। इसमें शेयर पूँजी, प्रवर्तकों एवं सहायक संस्थाओं से अप्रतिभूत ऋण, आंतरिक उपचय, सावधि ऋण, सरकारी सब्सिडी/अनुदान शामिल हैं। यदि ईक्विटी और ब्याज-मुक्त अप्रतिभूत ऋण के रूप में प्रवर्तकों का अंशदान शामिल होता है, तो उसकी उपयुक्तता का निर्धारण परियोजना के प्रति प्रतिबद्धता को ध्यान में रखकर किया जाता है। 
  • लाभप्रदता संबंधी प्रानुमान :  आपकी कंपनी के पिछले वित्तीय कार्यनिष्पादन की जाँच की जाएगी। आपकी कंपनी को परियोजना के लिए और समग्र रूप में कंपनी के लिए लाभप्रदता अनुमान, नक़दी प्रवाह और प्रानुमानित तुलनपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है। प्रानुमानों के आधार पर, विभिन्न वित्तीय अनुपात, जैसे – ऋण-ईक्विटी अनुपात, चालू अनुपात, स्थिर आस्ति सुरक्षा अनुपात, सकल लाभ, परिचालनगत लाभ, निवल लाभ अनुपात, आंतरिक प्रतिफल दर (परियोजना के आर्थिक जीवन के दौरान), ऋण चुकौती सुरक्षा अनुपात, प्रति शेयर अर्जन, देय लाभांश, आदि निकाले जाएँगे, ताकि आपकी परियोजना की वित्तीय सुदृढ़ता निश्चित की जा सके।   

 

आर्थिक व्यवहार्यता

  • परियोजना के आर्थिक मूल्यांकन के लिए आपकी कंपनी को, वित्तीय विश्लेषण में हिसाब में लिए गए मूल्य के विपरीत निविष्टियों का वास्तविक मूल्य लेना होगा।
  • आपकी कंपनी को परियोजना के फलस्वरूप समाज और अर्थव्यवस्था पर आने वाली लागत और उन्हें होने वाले लाभों के रूप में सामाजिक लागत-लाभ विश्लेषण करना चाहिए। 
  • इस प्रकार, आर्थिक विश्लेषण का लक्ष्य परियोजना की अंतर्निहित शक्तियों पर केंद्रित होता है और इससे यह निश्चित किया जाता है कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा का सामना करने में स्वयं समर्थ है या नहीं।

 

परियोजना का अनुवर्तन

संवितरण-पूर्व अवस्था

वित्तीय सहायता की मंजूरी का आशयपत्र कतिपय शर्तों के साथ जारी किया जाता है। जब आपकी कंपनी निदेशक मंडल के संकल्प के माध्यम से बिना किसी शर्त के आशयपत्र स्वीकार करती है, तो यथास्थिति लागू सहायता की शर्तों के अनुसार निम्नलिखित दस्तावेज़ निष्पादित किए जाने की ज़रूरत होती है।

  • ऋणदाता और उधारकर्ता के बीच संविदागत संबंध को सुनिश्चित रूप देने के लिए उनके बीच ऋण करार का निष्पादन
  • दृष्टिबंधक विलेख
  • शेयरधारिता न बेचने का वचनपत्र
  • अधिवृद्धि /कमी के लिए वचनपत्र
  • गारंटी विलेख
  • शेयर दस्तावेज़ों की गिरवी
  • अंतरिम प्रतिभूति के सृजन के लिए संबंधित कंपनी रजिस्ट्रार के पास दृष्टिबंधक विलेख के संबंध में फ़ॉर्म 8 व 13 का पंजीकरण   

अंतिम रूप से प्रतिभूति का सृजन

आपकी कंपनी को निम्नलिखित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे :

  • स्वत्व विलेख
  • समरूप /प्राथमिक प्रभार छोड़ने के लिए मौजूदा प्रतिभूत लेनदारों से अनापत्ति प्रमाणपत्र
  • यदि आवश्यक हो, तो पट्टाधारित भूमि के बंधक के लिए पट्टादाता की अनुमति
  • यदि आवश्यक हों, तो बंधक सृजित करने के लिए सांविधिक अनुमतियाँ

मंजूर सहायता का संवितरण

  • आपकी कंपनी को परियोजना की प्रगति और आवश्यक निधियों की जानकारी देते हुए, ऋण के आहरण के लिए आवेदन करना होगा।  
  • चूँकि अंतिम रूप से प्रतिभूति सृजन होने में समय लगता है, अत: विधिक दस्तावेज़ों के निष्पादन के बाद बैंक /संस्थाएँ संवितरण संबंधी अनुरोधों पर विचार कर लेती हैं, ताकि परियोजना के क्रियान्वयन में देरी न हो।  
  • आपकी कंपनी को निर्धारित प्रवर्तक अंशदान लाना होगा और संबंधित निधियों के उपयोग के साथ-साथ उसके संबंध में सनदी लेखाकार का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।
  • प्रमाणपत्र के आधार पर, बैंक /संस्थाएँ सामान्यत: समानुपातिक संवितरण पर विचार करती हैं। बैंक /संस्थाएँ संवितरण से पहले परियोजना में न्यूनतम प्रवर्तक अंशदान लगाए जाने पर ज़ोर दे सकती हैं।
  • सहायता के संवितरण से पहले बैंक अधिकारी प्रगति की जाँच के लिए कार्यस्थल का दौरा करते हैं और बैंक खाते की जाँच-पड़ताल करते हैं।
  • प्रत्येक संवितरण के समय बैंक प्रतिभूति सृजन की प्रगति की समीक्षा करता है।

 

संवितरण-पश्चात् अवस्था

क्रियान्वयन अवधि और परिचालन-पश्चात् अवधि के दौरान ऋणदाता बैंक /संस्था परियोजना की निगरानी करते हैं। ऋणदाता निम्नलिखित के लिए ज़ोर दे सकता है :

  • आवधिक प्रगति रिपोर्टें
  • बैंक /संस्था के अधिकारी द्वारा कार्यस्थल का दौरा
  • प्रगति का निश्चय करने के लिए कंपनी के मुख्य कार्यपालक /वरिष्ठ कार्यपालकों के साथ आवधिक वार्ता /चर्चा
  • आपकी कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट
  • आपकी कंपनी के निदेशक मंडल में बैंक /संस्था के नामिती की नियुक्ति
  • आपके नाम और बैंक /संस्था के साथ संयुक्त रूप से आपकी कंपनी की आस्तियों का बीमा

परियोजना का अनुवर्तन मूलत: इस उद्देश्य के साथ किया जाता है कि अभिप्रेत प्रयोजन के लिए मंजूर सहायता का अंतिम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और मंजूरी की शर्तों के अनुसार समय से सहायता की चुकौती हो सके।