दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम

दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम असंगठित रोज़गार क्षेत्र अर्थात् दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं को सांविधिक दायित्व एवं अधिकार प्रदान करता है।


दायरा एवं व्याप्ति

  • यह राज्य विधान है; प्रत्येक राज्य ने इस अधिनियम के लिए अपने नियम बनाए हैं।
  • यह नियोक्ता के परिवार के सदस्यों को छोड़कर, प्रतिष्ठानों में अवैतनिक एवं सवैतनिक रूप से नियोजित अन्य सभी व्यक्तियों पर लागू होता है।
  • राज्य सरकार किसी प्रतिष्ठान को इस अधिनियम के सभी या किसी प्रावधान से, स्थायी रूप से या किसी निर्दिष्ट अवधि के लिए, छूट प्रदान कर सकती है।

मुख्य प्रावधान

  • कार्य आरंभ करने के तीस दिन के अंदर दुकान /प्रतिष्ठान का अनिवार्य पंजीकरण।
  • दुकान /प्रतिष्ठान बंद किए जाने के 15 दिन के अंदर प्रतिष्ठान बंद किए जाने की सूचना देना।  
  • यह अधिनियम प्रतिदिन एवं प्रति सप्ताह कार्य के घंटे निर्धारित करता है।
  • यह अधिनियम मजदूरों या कर्मचारियों से काम के वर्जित घंटो में भी विशेष आवश्यकता होने पर काम लेने, विश्राम के अंतराल, खुलने और बंद करने का समय, बंदी के दिन, राष्ट्रीय एवं धार्मिक अवकाश तथा समयोपरि कार्य के लिए दिशानिर्देश तय करता है।
  • वच्चों, नवयुवक व्यक्तियों और महिलाओं के रोज़गार के नियम।
  • वार्षिक छुट्टियों, मात्त्व छुट्टी, बीमारी एवं आकस्मिक छुट्टी, आदि के नियम।
  • रोज़गार एवं सेवा-समाप्ति के लिए नियम।
  • रजिस्टरों एवं अभिलेखों का रखरखाव तथा सूचनाओं का प्रदर्शन।
  • नियोक्ता के दायित्व।
  • कर्मचारी के दायित्व।

 

इसका कब ध्यान रखना है और संदर्भ लेना है

  • किसी उद्यम का आरंभ करते समय।
  • कार्मिक संबंधी नीतियाँ एवं नियम बनाते समय।

 

दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम एक राज्य अधिनियम है, इसलिए पंजीकरण और विभिन्न रजिस्टरों के रखरखाव के बारे में जानने के लिए राज्य-विशेष के दुकान एवं प्रतिष्ठान नियमों कों देखें।

कृपया राज्य-विशेष के दिशानिर्देश एवं प्रक्रियाएँ देखें