उद्यमी ज्ञापन दाखिल करना

 

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा ज्ञापन दाखिल करने का प्रावधान है। धारा 8 की उपधारा (2) में यह निर्धारित किया गया है कि ज्ञापन का फार्म, उसे दाखिल करने की प्रक्रिया तथा अन्य संबंधित मामले उस प्रकार होंगे, जिस प्रकार कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाएं।

  • उक्त ज्ञापन तीनों वर्गों के उद्यमों द्वारा उस जिला उद्योग केंद्र में दाखिल किया जाए, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह उद्यम अवस्थित हो अथवा अवस्थित होने वाला हो।

पंजीकरण फॉर्म तथा संबंधि दस्तावेज (प्रोफार्मा) डाउनलोड करें।    उद्यमी ज्ञापन हेतु फाइल फॉर्मेट

योजना की विशेषताएँ

ज्ञापन दाखिल करने की प्रक्रिया

मौजूदा प्रक्रिया की प्रमुख बातें निम्नवत हैं:

  • उद्यमी ज्ञापन इंटरनेट से डाउनलोड किया जा सकता है, जिसका पता राज्य / केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम संबंधी निदेशालयों से प्राप्त किया जा सकता है या फिर उनकी हार्ड प्रतियाँ जिला उद्योग केंद्रों से प्राप्त की जा सकती हैं। यह फार्म सिडो की वेबसाइट www.laghu-udyog.com अथवा www.dcmsme.gov.in से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
  • सूक्ष्म या लघु उद्यम स्थापित करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति, अपने स्वनिर्णय से; अथवा सेवाएं प्रदान करने में संलग्न कोई मध्यम उद्यम, अपने स्वनिर्णय से, अथवा माल के विनिर्माण या उत्पादन में संलग्न कोई मध्यम उद्यम अपने इलाके के जिला उद्योग केंद्र में सूक्ष्म, लघु अथवा मध्यम उद्यमी ज्ञापन, जैसी भी स्थिति हो, दाखिल करेगा।
  • जिला उद्योग केंद्र ज्ञापन के फॉर्म में सभी कोड भरेगा और डाक से ज्ञापन फॉर्म प्राप्त होने के पांच दिन के भीतर और व्यक्तिगत रूप से या ओनलाइन फार्म जमा होने पर उसी दिन, ईएम संख्या, जारी करने की तारीख तथा इकाई की श्रेणी आवंटित करने के बाद पावती जारी करेगा। 
  • पावती जारी करने से पहले, जिला उद्योग केंद्र यह सुनिश्चित करेगा कि फॉर्म सभी दृष्टियों से पूर्ण है और विशेष रूप से यह कि फॉर्म हस्ताक्षरित है और उसके साथ वचनपत्र लगा हुआ है, जो कि उद्यमिता ज्ञापन के फॉर्म का एक भाग होता है।
  • जिला उद्योग केंद्र सूक्ष्म और लघु उद्यमों तथा सेवाएं प्रदान करने में संलग्न मध्यम उद्यमों के संबंध में इस प्रकार दाखिल किए गए सभी उद्यमी ज्ञापनों का रिकॉर्ड रखेगा। जिला उद्योग केंद्र इस प्रकार दाखिल किए गए उद्यमी ज्ञापनों की एक प्रति आवंटित ईएम संख्या के साथ अपने राज्य / क्षेत्राधिकार के लघु उद्योग सेवा संस्थान को प्रेषित करेगा।
  • जिला उद्योग केंद्र उत्पादों के उत्पादन / विनिर्माण में संलग्न मध्यम उद्यमों के संबंध में इस प्रकार दाखिल किए गए सभी उद्यमी ज्ञापनों का रिकॉर्ड रखेगा और प्रत्येक उद्यमी ज्ञापन की एक-एक प्रति आवंटित ईएम संख्या के साथ अपने राज्य / क्षेत्राधिकार के लघु उद्योग सेवा संस्थान को तथा विकास आयुक्त (लघु उद्योग) कार्यालय में संयुक्त विकास आयुक्त (एमएसएमई पॉल.) को प्रेषित करेगा।
  • ज्ञानप का फॉर्म दो भागों में है। सूक्ष्म, लघु एवं सेवाएं प्रदान करने वाला मध्यम उद्यम स्थापित करने के इच्छुक व्यक्ति उद्यमिता ज्ञापन का भाग 1 जिला उद्योग केंद्र में दाखिल कर सकते हैं, जबकि उत्पादों के उत्पादन / विनिर्माण में संलग्न मध्यम उद्यम स्थापित करने के इच्छुक व्यक्ति उद्यमिता ज्ञापन का भाग 1 जिला उद्योग केंद्र में दाखिल करेंगे।
  • जैसे ही उक्त उद्यम उत्पादन करना या सेवाएँ देना आरंभ करें, वैसे ही उन्हें उद्यमिता ज्ञापन का भाग II जिला उद्योग केंद्र में दाखिल करना चाहिए। 
  • यदि उक्त ज्ञापन का भाग I  दाखिल करने के 2 वर्ष के भीतर ज्ञापन का भाग II दाखिल नहीं किया जाएगा, तो उद्यमी द्वारा दाखिल ज्ञापन (भाग I) अमान्य हो जाएगा।.
  • संयंत्र और मशीनरी में अथवा उपकरणों में निवेश में परिवर्तन की स्थिति में, जो उद्यमी पहले ही उद्यमी ज्ञापन दाखिल कर चुकें हों, उन्हें निवेश में परिवर्तन के एक माह के भीतर इस परिवर्तन की सूचना लिखित रूप में जिला उद्योग केंद्र को देनी चाहिए।
  • उत्पादों या सेवाओं में परिवर्तन अथवा उत्पादों या सेवाओं में वृद्धि होने की स्थिति में, जो उद्यमी पहले ही उद्यमी ज्ञापन प्रस्तुत कर चुके हों, उन्हें इस परिवर्तन की लिखित सूचना परिवर्तन के एक माह के भीतर जिला उद्योग केंद्र को देना चाहिए।
  • जिला उद्योग केंद्र लिखित रूप में रिकॉर्ड रखने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक रूप में या कंप्यूटर पर भी रिकॉर्ड रखेंगे।

मूल्यांकन का आधार निम्नलिखित होगा

इकाई ने अपेक्षानुरूप सभी आवश्यक मंजूरियाँ, चाहे वे सांविधिक हों या प्रशासनिक, जैसे - ड्रग नियंत्रण आदेश के अंतर्गत ड्रग लाइसेन्स, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्र आदि प्राप्त कर ली हों।

  • मूल्यांकन के समय इकाई अवस्थिति संबंधी किसी भी प्रतिबंध का उल्लंघन न करती हो।
  • संयंत्र और मशीनरी का मूल्य विनिर्दिष्ट सीमाओं के भीतर हो।
  • अधिसूचना के अनुसार, इकाई किसी अन्य औद्योगिक उपक्रम के स्वामित्व या नियंत्रण में या उसकी सहायक संस्था के रूप में न हो।